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पाठकों की रचनाएं : `बेरंग तस्वीर’

`बेरंग तस्वीर’
हिज्र के रंगों से…  उनकी तस्वीर बनाई है।
अश्क-ए-गम के मोतियों से उसे सजाई है।।
कारोबार-ए-इश्क में आशिक हुए मकबूल।
क्या करें… हमारे हिस्से तो बस रुसवाई है।।
हमें भूलकर वो… हैं बुलंदियों पर काबिज।
हमने उनकी…. यादों की दौलत कमाई है।।
जमाने के हिस्से में…उनकी वफाएं हैं।
हमारी किस्मत में उनकी बेवफाई है।।
था मंजूर किस्मत को तड़पाना मुहब्बत में।
हाथों से तभी हमने, लकीरें भी मिटाई हैं।।
ख्वाहिश थी फक्त.. आशियाने बनाने की।
`काजी’ अब तलक…. जिंदगी में तन्हाई है।।

`मां की महानता’
फकत मेरे बारे में वो……. सोचती रहती है।
खामुशी उसकी बहुत कुछ बोलती रहती है।।
न दिखाई दूं…इक पल के लिए जब उसको।
घर के आंगन में वो मुझको खोजती रहती है ।।
वो `मां’ है .. मेरे दर्द का अहसास है उसको ।
उतार कर नज़र मेरी मुश्किलें टालती रहती है।।
उसके आंचल की छांव में,…… मेहफूज हूं मैं।
दूरी इक पल की उससे मुझे कचोटती रहती है।।
`काजी’ उसकी मुहब्बतों की कर्जदार है जिंदगी।
बदल क्या दे सकूंगा हर सांस यही सोचती रहती है ।।

नज्म- `शहादत’
हमारे सुकून के खातिर,
वो अपना सुकून खोते रहे।
हम सो सकें बेफिक्रे ,
वो अपनी नींदें खोते रहे।।
जांबाज हैं, डटे हैं सरहद पर,
हमारे लिए वो जिंदगी खोते रहे।
शहादत पर न अश्क बहाना यारों,
ताबूत उनके वतन के लिए रोते रहे।।
किसी ने बेटा खोया है,
किसी का सुहाग उजड़ा है।
बहनों की आंखों में बसा,
हर ख्वाब टुकड़ा-टुकड़ा है।।
आबरू-ए-वतन के लिए,
वो अपना सब-कुछ खोते रहे।
दाग न लगे देशभक्ति को,
वो कतरा-कतरा लहू बहाते रहे।।
बहुत-सी उम्मीदें बहुत से ख्वाब,
अब न जाने कब पूरे होंगे।
सिसकियों में ढूंढ़ना होगी जिंदगी अब,
तुम्हारे बिन सदा हम अधूरे हों।।
-डॉ. वासिफ काजी, इंदौर

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