मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनापाठकों की रचनाएं : आठ अरब लोगों का घर!

पाठकों की रचनाएं : आठ अरब लोगों का घर!

जी हां! आठ अरब हुई दुनिया की आबादी।
आठ अरब उम्मीदें।
आठ अरब सपने।
आठ अरब संभावनाएं।
आठ अरब अशांति के कारण। हमारा पृथ्वी ग्रह अब आठ अरब लोगों का घर है।
पृथ्वी ग्रह `मील का एक अद्भुत पत्थर’ कहलाएगा।
पृथ्वी ग्रह पर वो सब कुछ है, जो अन्य ग्रहों पर नहीं है।
प्रभु की अजब लीला है और प्रभु ने ही यह संसार रचा है।
आठ अरब लोगों का फर्ज है कि वे सुख-शांति और आनंदमय जीवन बिताएं।
विधाता ने लालन-पालन की सारी व्यवस्था की है।
लेकिन हम मानव सदुपयोग करने की बजाय दुरुपयोग करते हैं। कृपया ऐसा न करें।
-आर.डी. अग्रवाल `प्रेमी’ मुंबई

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