मुख्यपृष्ठनमस्ते सामना1 अक्टूबर के अंक नमस्ते सामना में प्रकाशित पाठकों की रचनाएं

1 अक्टूबर के अंक नमस्ते सामना में प्रकाशित पाठकों की रचनाएं

जय गणेश
सारे साथ बोलो एक और दो
गणेश जी का आशीर्वाद लो
सारे साथ बोलो तीन-चार
गणपति जी का जय-जयकार
सारे‌ साथ बोलो पांच और छह
हे विघ्नहर्ता हर विघ्न हर ले
सारे साथ बोलो सात-आठ
नित गजानन का पूजा-पाठ
सारे साथ बोलो नौ और दस
गौरी नंदन दो दास को दरस
सारे साथ बोलो ग्यारह-बारह
लंबोदर के चरणों में जीवन सारा
– घूरण राय ‘गौतम’, मधुबनी

पूछा जाए
तेरे तल्ख लहजे की वजह
पूछा जाए
पता ठिकाना कुल गोत्र भी पूछा जाए ।।
दिया है नाम किसी ने मिली धरोहर है
चलो मिल-जुल हाल-चाल भी
पूछा जाए।।
यार उदासी का कारण पूछे कब, कैसे
चलें मस्त हवा, थिरकते कदम,
पूछा जाए।।
दिल के कोने में दबी राख में है चिंगारी
अंधेरे में छिपी रोशनी से पूछा जाए।।
स्वप्न भी, नींद भी, रोशनी में है जिंदगी
तपन की बात राह में वैâसे पूछा जाए।।
मेरी हकतलफी पर खामोश है ठीक नहीं
मगर इस चुप्पी की वजह तो
पूछा जाए।।
हम अदब लिहाज जीने का सलीका सीखें
चलो उससे उदासी की वजह
पूछा जाए।।
आमने-सामने जब भी हम होते हैं कभी
मुस्कुराते हुए दिल से हाल तो
पूछा जाए।।
आखिर क्यों बेचैन टहलता है ‘उमेश’
उसके परेशानियों की वजह
पूछा जाए।।
– डॉ. उमेश च़ंद्र शुक्ल

अनंत व्रत
अनंत व्रत है अति सुख पावन,
महिमा अगणित अमित सुहावन,
आदि मध्य नहीं अंत है जिनका,
दरस देव का है मनभावन।
सहस्रों सिर है सहस्रों चक्षु,
सहस्रों पाद-रज हम बुभुक्षु,
करुणा करो तव नाथ सिंधु
कर जोड़े जन मिले ममुक्षु।
चौदह ग्रंथि का सूत सुखकारी,
हरे सब विपदा सम प्रलयंकारी,
ध्यान व्रत जप से प्रभु कृपा मिले,
दर्शन देते द्रुत भय भंजनहारी।
द्रौपदी मात सब भ्रात युधिष्ठिर
श्रीकृष्ण उपाय दिये शुचिस्थिर,
किये व्रत शुभ वन में रह के ही,
पाये पुन: ऐश्वर्य स्वराज्य सुस्थिर।
श्रद्धा-भक्ति से व्रत किए,
महिमा सबनहि समुझाये,
अंत अनंत सुखधाम मिले,
पुण्य से व्रती सूजन तर जाए।
– राजीव नंदन मिश्र,
भोजपुर (आरा)

पूछा जाए
तेरे तल्ख लहजे की वजह
पूछा जाए
पता ठिकाना कुल गोत्र भी पूछा जाए ।।
दिया है नाम किसी ने मिली धरोहर है
चलो मिल-जुल हाल-चाल भी
पूछा जाए।।
यार उदासी का कारण पूछे कब, वैâसे
चलें मस्त हवा, थिरकते कदम,
पूछा जाए।।
दिल के कोने में दबी राख में है चिंगारी
अंधेरे में छिपी रोशनी से पूछा जाए।।
स्वप्न भी, नींद भी, रोशनी में है जिंदगी
तपन की बात राह में वैâसे पूछा जाए।।
मेरी हकतलफी पर खामोश है ठीक नहीं
मगर इस चुप्पी की वजह तो
पूछा जाए।।
हम अदब लिहाज जीने का सलीका सीखें
चलो उससे उदासी की वजह
पूछा जाए।।
आमने-सामने जब भी हम होते हैं कभी
मुस्कुराते हुए दिल से हाल तो
पूछा जाए।।
आखिर क्यों बेचैन टहलता है ‘उमेश’
उसके परेशानियों की वजह
पूछा जाए।।
– डॉ. उमेश च़ंद्र शुक्ल

हम फिर मिलेंगे
फिर मिलेंगे तुमसे फिर से साथ गुजारेंगे पल
फिर से तेरे साथ नया ख्वाब हम देखेंगे
फिर से तुम्हें अपनी बातों में उलझाएंगे
फिर से तेरे बालों को हम सहलाएंगें
फिर से तेरे चेहरे पर अपनी जुल्फें लहराएंगे
फिर से तेरी बांहों में हम खुद को भूल जाएंगे
फिर से तेरे सबसे करीब हम आएंगे
फिर से तुझे बेचैन हम कर जाएंगे
जो रह गया है इस जन्म में अधूरा
वो फिर अगले जन्म पूरा करने आएंगे
हम फिर मिलेंगे…
– शेजल यादव, नालासोपारा

मुंबई पुलिस
धूप में बरसात में
भीगते लिबास में
तीज में त्यौहार में
जीत में और हार में
प्यार में तकरार में
सदैव तत्पर रहती है
तुम डरो नहीं यह कहती है
खुद का घर कुनबा त्याग के
कितनी रातों में जाग के
न भूख प्यास की चिंता हो
दिल में लिए तमन्ना एक
सुखी सुरक्षित जनता हो
इतनी खूबी है जिसमें बसी
तकलीफ हो लाख चहरे पर हंसी
कोई और नहीं यह है ‘मुंबई पुलिस’
– श्रवण चौधरी, प्रभादेवी

हाइकु
स्वर कोकिला
लता मंगेशकर
जन्मदिवस ।।
सुर-ओ-ताल
का अद्भुत संगम
थी लता दीदी ।।
सुरीले गीत
सबके मन भाए
लता ने गाए।।
आज भी प्रिय
नगमें लताजी के
सारे जग में।।
– संजय डागा, इंदौर

पथिक बढ़े चलो
रुकूंगा नहीं, थकूंगा नहीं,
मैं बाधाओं के सामने झुकूंगा नहीं।
जीवन के संघर्ष से लड़ जाऊंगा,
नित नए स्वप्न आंखों में बसाऊंगा।
चहुं ओर घोर अंधेरे बांधों के,
चीरकर उजाले तक ले जाऊंगा।
अपनी सफलता का पथ,
अब मैं स्वयं ही बनाऊंगा।
बिजली की कंपन से,
अब नहीं डर बदन में लाऊंगा।
सफलता के शिखर पर पहुंच,
संसार में विश्वास पैâलाऊंगा।
जानता हूं ना मंजिल आसान पाऊंगा,
हौसला हृदय में हैं बुलंद
हर जंग जीत जाऊंगा।
मन में विश्वास की उमंग
हर जगह फैलाऊंगा
द्वेष, घृणा हटाकर प्रेम कुसुम
हृदय में खिलाऊंगा।
– डॉ. निशा सतीश चंद्र मिश्रा,
मीरा रोड

वृक्ष बचाओ
विश्व बचाओ
जोड़ लिए जब मानव ने
प्रकृति से रिश्तों के तार,
रोज-रोज उसे मिलने लगे
सुंदर से पुष्पों के उपहार!
-डॉ. मुकेश गौतम, वरिष्ठ कवि

अन्य समाचार