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एमपी में मूल भाजपाइयों की पार्टी से बगावत, २० साल पार्टी को दिए, क्या मिला? निष्ठावान भाजपाई का सवाल

सामना संवाददाता / ग्वालियर
पूरे देश पर एकछत्र राज करने की मंशा के तहत भाजपा और उसकी पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार तमाम विपक्षी दलों को खत्म करने के लिए लगातार प्रयास करती रही है। केंद्रीय जांच एजेंसियों के मार्फत विपक्षी एवं प्रतिद्वंद्वी नेताओं, सांसदों, विधायकों एवं दूसरे पदाधिकारियों को खत्म करने या तोड़कर अपने साथ मिलाने का एक विशेष अभियान भाजपा और केंद्र सरकार ने पिछले ९ वर्षों से चला रखा है। भाजपा अब दूसरे दलों से आयातित नेताओं सांसदों एवं मंत्रियों की संख्या अधिक हो गई है। नतीजतन, पार्टी में आयातित लोगों को ही महत्व मिलने लगा है और मूल व निष्ठावान भाजपाई हाशिए पर चले गए हैं। खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे ऐसे ही भाजपाई अब पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत का बिगुल बजाने लगे हैं। कर्नाटक के बाद अब एमपी में भी ऐसा देखने को मिल रहा है।
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा प्रत्याशियों की पहली सूची आते ही चंबल से बगावत शुरू हो गई है। भाजपा के प्रदेश मंत्री सबलगढ़ के रणवीर रावत दावेदारी कर रहे थे, लेकिन उनकी जगह पार्टी ने सरला रावत को टिकट दे दिया।

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