मुख्यपृष्ठनए समाचारयूपी पुलिस में 60 हजार सिपाहियों की भर्ती, 27 दिसंबर से आवेदन

यूपी पुलिस में 60 हजार सिपाहियों की भर्ती, 27 दिसंबर से आवेदन

लोकसभा चुनाव देख कर चला 60 का हाथ-रामगोविंद चौधरी
मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने शनिवार को यूपी पुलिस में भर्ती के लिए इंतजार कर रहे युवाओं का इंतजार खत्म करते हुए आरक्षी नागरिक पुलिस के 60,244 पदों पर भर्ती के लिए कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। अभ्यर्थी 27 दिसंबर से 16 जनवरी तक आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के लिए शुल्क समायोजन और आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 18 जनवरी है। 60,244 पदों पर भर्ती में अनारक्षित पदों की संख्या 24,102, ईडब्ल्यूएस के लिए पदों की संख्या 6024, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए पदों की संख्या 16,264, अनुसूचित जाति के लिए 12,650 और अनुसूचित जनजाति के लिए 1204 पद निर्धारित किए गए हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने इसे यूपी में युवाओं के बदलते सुखद भविष्य ट्रेलर बताया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को सरकारी नौकरी व रोजगार उपलब्ध कराने को संकल्पित है। जो शैक्षिक होनहार होगा उसको अपनी योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरियों में सेवा का अवसर मिलेगा। जो हुनरमंद हैं उन्हें उनके हुनर के अनुसार निखार कर रोजगार का अवसर देंगे। कृषि क्षेत्र को लगातार हाईटेक किया जा रहा है, जिससे किसान की आय दोगुनी हो जाय। कम लागत और पैदावार अधिक हो इसके लिए वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

भर्ती की अधिसूचना के बाद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा कि यदि युवाओं को निष्पक्षता के साथ समय से नौकरी मिल जाये तो इसका स्वागत है। पिछले छह वर्षों का इस सरकार का जो रिकॉर्ड है उसे देखते हुए हम कह रहे हैं कि यह सरकार बाजीगरी से बाज नहीं आ रही है। लोकसभा चुनाव के पहले इस तरह का विज्ञापन निकाल कर युवाओं का ध्यान भटकाने का नाटक कर रही है। अपनी असफलताओं से डर कर निर्णय लिया गया है। रोजगार देने को लेकर इस सरकार का अब तक का ट्रैक रिकॉर्ड ठीक नहीं है। सरकार यह बता दे कि अब तक जितने रिक्तियों के लिए कार्यक्रम जारी किया था सबको नौकरी मिल गयी? कितने परीक्षाओं में पेपर लीक हुआ? 69 शिक्षक भर्ती में आरक्षण का सही अनुपालन कब होगा। पहले रिक्तियों की घोषणा करते हैं फिर परीक्षा को कोर्ट में घसीटवा देते हैं। लचर पैरोकारी के चलते मामला लटक जाता है। युवक इधर-उधर की ठोकर खा कर भटकते हैं।यह सरकार लोकसभा चुनाव देखते हुए युवाओं का गुस्सा दबाने के लिए काम कर रही है। इसकी नियत साफ नहीं है। मैं तो कहूंगा कि लोकसभा चुनाव देख कर चला 60 का हाथ।

अन्य समाचार