मुख्यपृष्ठनए समाचारलाल परी या ताबूत! एसटी बसों का है बुरा हाल, सड़क हादसों...

लाल परी या ताबूत! एसटी बसों का है बुरा हाल, सड़क हादसों में हर साल हो रही वृद्धि

सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की जीवन रेखा कही जाने वाली एसटी बसें चलती-फिरती ताबूत साबित हो रही हैं। एसटी बसों से होने वाले सड़क हादसों में हर साल वृद्धि हो रही है। वर्ष २०२२-२३ में राज्य में चलने वाली एसटी बसों से कुल ४ हजार ६५९ एसटी दुर्घटनाओं में३४३ नागरिकों की मौत हो गई जबकि ३ हजार ५८४ लोग घायल हुए हैं। एसटी कॉर्पोरेशन की वार्षिक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि पिछले पांच साल में हुए हादसों की तुलना में इस साल सबसे अधिक हादसे हुए हैं।
बसों की दयनीय स्थिति 
एसटी बसों की हालत बेहद ही खराब है। अक्सर बसों के ब्रेक फेल होने, इंजन फेल होने और स्टीयरिंग रॉड टूटने की वजह से दुर्घटनाएं होती रहती हैं। साथ ही अधिकांश दुर्घटनाएं मानवीय भूल के कारण भी होती हैं। कोरोना काल में २०१८ से २०२३ के बीच १,२०० से १,४०० दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, लेकिन कोरोना से पहले यानी वर्ष २०१८-१९ में तीन हजार ३१० दुर्घटनाएं हुईं और वर्ष २०१९-२० में तीन हजार ३३७ दुर्घटनाएं हुई हैं।

पांच साल में ५६१ पैदल यात्रियों की मौत
२०१८ से २०२३ के बीच राज्य में एसटी दुर्घटनाओं में ५६१ पैदल यात्रियों की मौत हो गई है। सड़क पर चलते समय एसटी द्वारा कुचले जाने और एसटी से टक्कर के दौरान अन्य वाहनों के नीचे आने से उनकी मृत्यु हो गई है। वर्ष २०२२-२३ में घटी दुर्घटनाओं

अन्य समाचार