मुख्यपृष्ठनए समाचार२८ वर्षों से पुनर्विकास का काम जारी है... डेवलपर का धीमा रवैया!

२८ वर्षों से पुनर्विकास का काम जारी है… डेवलपर का धीमा रवैया!

• हाउसिंग एसोसिएशन ने जताई आपत्ति
•  ९० लोगों को है घरों का इंतजार
सामना संवाददाता / मुंबई
घाटकोपर-पश्चिम में एलबीएस मार्ग पर स्लम पुनर्वास प्राधिकरण परियोजना का काम डेवलपर और हाउसिंग एसोसिएशन के बीच विवाद के कारण लगभग २८ वर्षों से बहुत धीमी गति से चल रहा है। साथ ही तैयार २ इमारतों में रहने वाले कुछ नागरिक और जीवदया हाउसिंग सोसाइटी और डेवलपर के बीच चल रहे विवादों के कारण परियोजना का काम और भी धीमी गति से आगे बढ़ा है। इस पर हाउसिंग एसोसिएशन ने आपत्ति जताई है।
१९९३ में एसआरडी ने एनओसी के लिए कलेक्टर कार्यालय में पुनर्वास के संबंध में एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। कलेक्टर से अनुमति मिलने के बाद एसआरए ने १९९८ में योजना प्रस्तुत की, लेकिन इसी बीच प्रोजेक्ट का काम रोक दिया गया। इसलिए, २००२ स्लम पुनर्वास प्राधिकरण (एसआरए) ने संशोधित योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। २००५ में अंबाजी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करके परियोजना को आगे बढ़ाया। इसके तहत डेवलपर ने २ ट्रांजिट कैंप स्थापित किए और वहां नागरिकों को अस्थायी आश्रय प्रदान किया। कुल २८७ किराएदारों में से २२५ किराएदार योग्य हुए। ९० लोग किराए पर बाहर रह रहे हैं।

साल २००९ से लेकर आज तक कई लोगों के घर का भाड़ा रुका हुआ है। यह रकम लगभग १२ करोड़ रुपए है, वहीं उनके द्वारा बनाई गई २ बिल्डिंगों का काम भी काफी खराब है। घर मिलने के १ महीने के भीतर ही छत का स्लैब नीचे गिर गया। पार्किंग की सुविधा भी नहीं की गई। कुछ लोगों से तो जबरदस्ती सोसाइटी के खिलाफ हस्ताक्षर करवाया जा रहा है।
-घनश्याम भिवबाजे, सोसाइटी सचिव
बिल्डिंग जो हमें दी गई है, उसकी हालत खराब है। लोगों को उसकी वजह से काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। किसी के घर का स्लैब गिर गया तो किसी के घर में बारिश के कारण पानी आने लगा। यहां तक कि हमें धमकियां भी दी जा रही हैं।
-अशोक नाईक, सोसाइटी अध्यक्ष
हमारे ऊपर लगे सभी आरोप झूठे हैं। मौजूदा हाउसिंग सोसायटी कमेटी का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लेकिन अभी भी नई कमेटी के चयन के लिए चुनाव नहीं हो पा रहा है। मकान ढह गए थे, लेकिन उनकी तुरंत मरम्मत कर दी गई। कोरोना काल और बीच में डेवलपर बदलने के कदम के कारण प्रोजेक्ट रुका हुआ था। हम किराया सीधे एसआरए के पास जमा करते हैं और उनके माध्यम से किराएदारों को किराया भुगतान किया जाता है। इसलिए इस आरोप में कोई सच्चाई नहीं है कि मकान का किराया खत्म हो गया है। बाकी प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है।
-अंबाजी कंस्ट्रक्शन, डेवलपर
जीवदया हाउसिंग कॉर्पोरेशन ने जताई आपत्ति
घटिया निर्माण के कारण कब्जे के एक माह के भीतर मकानों का गिरना
११५ किराएदारों का किराया डेवलपर ने रोख रखा है।
३ पुनर्वास भवन बनाने के बजाय २ भवन बनाकर एक और झुग्गी बस्ती का निर्माण किया जा रहा है।

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