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भाजपा पर दर्ज हो मनी लॉन्ड्रिंग का मामला!

-असंवैधानिक तरीके से खाते में आए हजारों करोड़ रुपयों पर क्यों चुप है ईडी?

-संजय राऊत का सवाल

सामना संवाददाता / मुंबई

मोदी सरकार द्वारा छह साल पहले शुरू की गई इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक घोषित कर दिया है। इससे मोदी सरकार को झटका लगा है और अब उन्हें इस स्कीम के जरिए भाजपा के खाते में आए पैसे का हिसाब देना होगा। लोग यह सवाल पूछेंगे कि यह पैसा कहां है, उसका क्या किया और कहां से आया। असंवैधानिक तरीके से भाजपा के खाते में हजारों करोड़ आए। यह काला धन है और आपराधिक तरीकों से आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता व सांसद संजय राऊत ने मांग की है कि यह मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है और ईडी को इसकी जांच करनी चाहिए।
मीडिया से बात करते हुए सांसद संजय राऊत ने कहा कि असंवैधानिक तरीके से भाजपा के खाते में करीब सात हजार करोड़ रुपए आए हैं। यह काला धन है और भाजपा ने इसका इस्तेमाल राजनीति के लिए किया। इस पैसे का इस्तेमाल सरकारें गिराने, विधायकों और सांसदों को खरीदने में किया गया। यह पीएमएलए एक्ट के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है। ये काला धन है और जो पैसा भाजपा के खाते में आया उसे दूसरे खाते में भेज दिया गया। ईडी को इसकी जांच करनी चाहिए। साथ ही जब से ये पैसा भाजपा के खाते में आया है, तब से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाए। चीन ने भी पीएम केयर फंड में फंड का योगदान दिया है। चीन लद्दाख में घुसकर भारतीय सैनिकों को मार रहा है और यहां उनसे फंड लिया जा रहा है। क्या इसका मतलब यह है कि आपने चीन से हजारों करोड़ रुपए लेकर सैनिकों की शहादत स्वीकार करते हुए लद्दाख की जमीन चीन को बेच दी? इस तरह का सवाल राऊत ने पूछा।
चलाया जाना चाहिए मामला
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रोरल बॉन्ड स्कीम काले धन को सफेद करने और अन्य माध्यमों से अपने खातों में लाने का एक बड़ा प्रयोग था। यह मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है। संजय राऊत ने यह भी मांग की है कि तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली उनमें से नहीं हैं, लेकिन जो लोग तब से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, उनके खिलाफ मामला चलाया जाना चाहिए।
लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार को यह नहीं देता शोभा
संजय राऊत ने दिल्ली में किसानों के मोर्चे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों को दिल्ली की सीमा पर रोकने के लिए सड़कों में कीलें ठोक दी हैं। सशस्त्र पुलिस तैनात कर दी, दीवारें खड़ी कर दीं। यह स्वतंत्र हिंदुस्थान में लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार को शोभा नहीं देता है। गारंटी मूल्य एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने किसानों के मुद्दे पर एक समिति गठित की थी। इसकी रिपोर्ट तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपी थी। उस रिपोर्ट में मोदी ने कहा था कि किसानों को न्यूनतम गारंटी मूल्य मिलना जरूरी है, लेकिन वही मोदी पिछले १० साल से प्रधानमंत्री हैं। गारंटी मूल्य तो हाशिए पर रहा, यह सरकार ने स्वामीनाथन को भारत रत्न तो देती है, लेकिन उनकी सिफारिशों को मानने को तैयार नहीं है। ये दिखावा नहीं तो क्या है? इस तरह का सवाल भी राऊत ने पूछा।

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