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जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के परिजनों ने फहराया तिरंगा

दीपक शर्मा / जम्मू
जम्मू संभाग के किश्तवाड़ जिले में स्थित सुदूर दच्छन इलाके और कश्मीर के बारामूला जिले के सोपोर कस्बे में हिजबुल मुजाहिदीन के सक्रिय आतंकवादियों के परिजनों ने अपने-अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। २००९ में आतंकवाद में शामिल हुए ३० लाख रुपए के इनामी आतंकवादी जावेद अहमद के भाई रईस अहमद ने सोपोर कस्बे में अपने घर की पहली मंजिल के बरामदे से राष्ट्रीय तिरंगा फहराया।
रईस ने कहा, `मैंने अपनी मर्जी से तिरंगा फहराया। मेरे ऊपर किसी का कोई दबाव नहीं था। ये मेरे देश का झंडा है, जो हमें सब कुछ देता है। मेरे भाई से गलती हो गई। मैं उससे कहना चाहता हूं कि अगर वह जीवित है तो हमारे राष्ट्रीय ध्वज के नीचे वापस आए।’ उत्तरी कश्मीर का सोपोर शहर २०१९ में अनुच्छेद ३७० के निरस्त होने से पहले तीन दशकों से अधिक समय तक आतंकवादियों और अलगाववादियों का गढ़ था। सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी भट और संसद हमले के दोषी मोहम्मद अफजल गुरु सहित कई शीर्ष अलगाववादी नेता इसी क्षेत्र से थे।
इस बीच, किश्तवाड़ जिले के पहाड़ी जिले के सुदूरवर्ती दच्छन इलाके में आतंकवादी हुसैन के पिता तारिक ने संवाददाताओं से कहा, `मेरे बेटे ने गलत रास्ता अपना लिया है।’ उन्होंने कहा, `हम सरकार से उसे ढूंढ़ने का अनुरोध करते हैं। हमने अपने घर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और चाहते हैं कि हर घर में तिरंगा फहराया जाए।’ हुसैन की मां ने कहा कि वह चाहती हैं कि वह वापस लौट आए और सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दे। `हमने उसका पता जानने की पूरी कोशिश की लेकिन असफल रहे। उन्होंने कहा, `सेना को हमारे लिए उसे ढूंढना चाहिए क्योंकि हम चाहते हैं कि वह वापस आए।’ पुलिस के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश में सर्वाधिक वांछित आतंकवादियों में से एक हुसैन के सिर पर २० लाख रुपए का इनाम है।

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