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चुनाव आते ही आई सब्सिडी की याद! … गरीबों को लुभाने की कवायद शुरू

पांच राज्यों की चुनावी हवा को देखते हुए भाजपा की परेशानी बढ़ गई है। पिछली बार मध्य प्रदेश में भाजपा ने बहुमतवाली कमलनाथ सरकार को धोखे से गिराकर मामा की सरकार बनवाई थी। अब वहां भाजपा विरोधी बयार बह रही है। राजस्थान में भी अशोक गहलोत की सरकार ने जिस तरह से गरीबों का खयाल रखा है, वैसे में भाजपा की वापसी की संभावना कमजोर ही है। छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में भी भाजपा की हालत पतली ही नजर आ रही है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि हाल ही में बिहार में जातिगत जनगणना के आंकड़े ने भाजपा पर दबाव बढ़ा दिया है, जिससे २०२४ की मुश्किलें भी बढ़ती दिख रही हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी पूरे उत्साह में देश के हर तबके के पास पहुंचकर उनके दुख-सुख के सहभागी बन रहे हैं। तमाम सर्वे में भाजपा की हालत खस्ता बताई जा रही है, ऐसे में भाजपा बेचैन हो उठी है। अब उसने गरीबों पर ध्यान फोकस किया है। उन्हें लुभाने के लिए उज्जवला गैस सिलिंडर की सब्सिडी बढ़ाने की घोषणा की गई है।
कल मोदी सरकार ने उज्जवला की सब्सिडी बढ़ाकर ३०० रुपए करने का फैसला किया है। मजे की बात है कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार पहले से ही मुख्यमंत्री योजना के तहत ५०० रुपए में सिलिंडर दे रही है। ऐसे में मोदी सरकार का यह दांव वहां कितना सफल होगा, यह कहना मुश्किल है।
गौरतलब है कि उज्जवला योजना में ९.५८ करोड़ परिवारों को मोदी सरकार ने गैस सिलिंडर दिए हैं। यह सही है कि गरीब महिलाओं को गैस सिलिंडर मिलने से धुएं से निजात मिली है, लेकिन सब्सिडी न मिलने के कारण १.१८ करोड़ परिवारों ने कोई सिलिंडर खरीदा ही नहीं था। इस मामले में विपक्ष ने लगातार इसका मुद्दा बनाकर मोदी सरकार पर हमले भी किए। ऐसे में अब इस बात की चर्चा हो रही है कि मोदी सरकार ने आम आदमी को गैस सिलिंडर पर मिलनेवाली सब्सिडी तो चुपके से बंद कर दी थी और बार-बार उसे शुरू करने के आश्वासन के बाद भी अभी तक शुरू नहीं किया है। हो सकता है कि एक-दो ओपिनियन पोल और आने के बाद केंद्र सरकार को अक्ल आ जाए और आम आदमी को लुभाने के लिए बंद सब्सिडी को फिर से शुरू करने की घोषणा करनी पड़े।

 

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