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ये हरकतें अब बहुत हुईं! राज्यपाल का सैंपल कहीं भी भेजो… वृद्धाश्रम में भेजो!! : कोश्यारी को हटाओ, नहीं तो महाराष्ट्र का दिखाएंगे दम! …उद्धव ठाकरे की केंद्र सरकार को जोरदार चेतावनी

• महाराष्ट्र बंद का विराट मोर्चा…
• चार दिनों में होगा तय
• महाराष्ट्रद्रोहियों के खिलाफ एक साथ आने का महाराष्ट्रप्रेमियों से आह्वान
सामना संवाददाता / मुंबई
‘छत्रपति शिवाजी महाराज का बार-बार अपमान करनेवाले राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को हटाना ही होगा। ये चालें अब बहुत हुर्इं। इस सैंपल को वापस लो और कहीं भी भेज दो। वृद्धाश्रम भेजा तो भी चलेगा।’ महाराष्ट्र का आदर्श मिटानेवाली चाल चलनेवाले महाराष्ट्रद्रोहियों को उनकी औकात दिखानी ही होगी। इसलिए अपनी ही पार्टी को न देखते हुए जो-जो महाराष्ट्रप्रेमी हैं, उन सभी को एकजुट होकर आना होगा’, ऐसा आह्वान शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने कल किया। इस मुद्दे पर महाराष्ट्र बंद करना है, विराट मोर्चा निकालना है या कुछ और करना है, इस पर एक से दो दिन में निर्णय लिया जाएगा। कोश्यारी को नहीं हटाया गया तो हम शांत नहीं बैठेंगे। केंद्र सरकार को पता चलना ही चाहिए कि महाराष्ट्र ऐरे-गैरों का प्रदेश नहीं। ऐसी स्पष्ट चेतावनी उद्धव ठाकरे ने दी। महाराष्ट्र के आराध्य दैवत छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान करनेवाले भाजपा के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और उनका संरक्षण करनेवाले ‘मिंधे’ सरकार पर कल उद्धव ठाकरे ने ‘मातोश्री’ निवासस्थान पर आयोजित पत्रकार परिषद में जमकर हमला बोला।

शिवाजी महाराज हमारे लिए सिर्फ आदर्श ही नहीं, वे हमारे देवता हैं। शिवराय का आदर्श मिटाकर अपने प्रभावहीन नेताओं की प्रतिमा जनमानस पर मढ़ने की चाल कोई चल रहा है तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह पार्सल अमेजॉन से आया था, उसे अमेजॉन से ही वापस भेजना होगा, और किसी लायक व्यक्ति को महाराष्ट्र के राज्यपाल के तौर पर लाना होगा। महाराष्ट्र बंद करना है, मोर्चा निकालना है या कोई अन्य विकल्प अपनाना है, यह सभी महाराष्ट्रप्रेमियों को तय करना होगा। मैं पक्ष को बगल में रखकर आह्वान कर रहा हूं। यदि भाजपा के महाराष्ट्र प्रेमी साथ आना चाहते हैं तो उन्हें भी आमंत्रित करता हूं। आप भी आओ क्योंकि दलीय राजनीति में यदि अपनी अस्मिता और राज्य को आघात पहुंच रहा है तो हम छत्रपति का नाम लेने के भी लायक नहीं हैं। कल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने मीडिया को संबोधित करते हुए इन शब्दों में राज्यपाल व केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केंद्र से भी मेरा कहना है कि ये चालें अब बहुत हुर्इं। आपने जो यहां नमूना भेजा है, उस नमूने को फिर से उसके घर भेजो। कहीं किसी अच्छे वृद्धाश्रम में भेजो। कहीं भी भेजो लेकिन महाराष्ट्र में यह सैंपल नहीं चाहिए। इसे ले जाओ नहीं तो हमें कुछ-न-कुछ करना होगा। छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में अपमानजनक बातें कहनेवाले राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर उद्धव ठाकरे ने जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र में जिसकी सरकार होती है, उनके लोगों या उनके विचारोंवाले लोगों को ही राज्यपाल बनाकर भेजा जाता है।
राज्यपाल के बयानों को केंद्र गंभीरता से ले
राज्यपाल हमारे महामहिम राष्ट्रपति का दूत होता है। राष्ट्रपति को निष्पक्ष होना चाहिए। राष्ट्रपति की ही तरह राज्यपाल को भी निष्पक्ष होना चाहिए। राज्य में कोई भी उलझन पैदा हुई तो राष्ट्रपति के माध्यम से उसे सुलझाने का दायित्व राज्यपाल का होता है, लेकिन जिनकी सरकार केंद्र में होती है, उनकी विचारधारा के लोग बतौर राज्यपाल भेजने के बाद वो क्या बोलते हैं, उसे केंद्र को गंभीरता से लेना चाहिए। राज्यपाल पद का मैं सम्मान करता हूं लेकिन कोश्यारी को राज्यपाल कहना मैंने छोड़ दिया है। राज्यपाल का पद मिल गया तो कोई भी व्यक्ति अनाप-शनाप कुछ भी बोलेगा तो मैं और मेरा महाराष्ट्र कदापि सहन नहीं करेगा, ऐसी जोरदार चेतावनी उद्धव ठाकरे ने दी। इससे पहले कोश्यारी ने मुंबई, ठाणे के मराठी लोगों का अपमान किया था। सावित्रीबाई फुले को लेकर अनाप-शनाप कहा था। अब हमारे देवता छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान किया है। महाराष्ट्र के आदर्शों का अपमान करने की बुद्धि कोश्यारी की काली टोपी से नहीं आई है, इस बद्दिमाग के पीछे किसका दिमाग है, उसका पता लगाना होगा’, ऐसा भी उद्धव ठाकरे ने कहा।
‘मिंधों’ को महाराष्ट्र की चिंता नहीं
उद्धव ठाकरे ने इस दौरान ‘मिंधे’ सरकार की भी आलोचना करते हुए कहा कि ‘मिंधे सरकार महाराष्ट्र की अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर रही है। महाराष्ट्र के उद्योगों को गुजरात ले जाया गया। वैâबिनेट मीटिंग भी अपवादात्मक स्थिति में आगे बढ़ा दी गई, लेकिन मंत्रिमंडल के अधिकांश लोग वैâबिनेट बैठक को रद्द करके प्रचार के लिए गुजरात चले गए। उन्हें महाराष्ट्र की अवमानना दिखाई नहीं दे रही है, महाराष्ट्र के देवता का अपमान हो रहा है, इसकी चिंता नहीं’, ऐसा भी उद्धव ठाकरे ने कहा।

सुरक्षा अभाव में राऊत को कुछ हुआ तो सरकार होगी जिम्मेदार
शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत की सुरक्षा राज्य सरकार ने हटा दी है। सत्ता आई तो विरोधियों की सुरक्षा हटाना, ऐसी प्रथा महाराष्ट्र में शुरू हो रही है क्या? ऐसा सवाल इस मौके पर मीडिया ने उद्धव ठाकरे से किया। इसका उत्तर देते हुए उन्होंने कहा, ‘हमारी सत्ता थी, तब सुरक्षा व्यवस्था हमने पुलिस के गुप्तचर विभाग को सौंपी थी। जिन्हें सुरक्षा की आवश्यकता है, उन्हें जरूरी सुरक्षा दी ही जानी चाहिए। संजय राऊत को अनावश्यक सुरक्षा नहीं दी गई थी। परंतु संजय राऊत का बुरा करने पर ही कुछ लोग आतुर हैं। उन्होंने उनकी सुरक्षा हटाई इसलिए सुरक्षा के अभाव में संजय राऊत को कुछ हुआ तो सरकार उसकी जिम्मेदार होगी।

लाचार मुख्यमंत्री में कोश्यारी के खिलाफ बोलने का साहस नहीं
उद्धव ठाकरे ने इस दौरान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की भी खबर ली। ‘विद्यमान मुख्यमंत्री दिल्लीश्वरों की कृपा से मुख्यमंत्री बने हैं इसलिए राज्यपाल के खिलाफ बोलने की उनमें हिम्मत नहीं’, ऐसा कटाक्ष उद्धव ठाकरे ने किया। मुख्यमंत्री की अवस्था ‘पैचान कौन’ जैसी है। उपमुख्यमंत्री सिर्फ लीपापोती करते हैं।

महाराष्ट्र के आदर्शों का अपमान करने की जो काली शक्ल है, वो राज्यपाल की काली टोपी से नहीं आई है। इसके पीछे कौन है, इस बद्दिमाग के पीछे किसका दिमाग है, इसे ढूंढ़ने का समय आ गया है।

ये ऐसा ही चलता रहा तो अपनी आंखों के सामने हमारे शूरवीर कहलानेवाले राज्य की आबरू को लोग सूली पर चढ़ा देंगे और हम सिर्फ देखते ही रह जाएंगे। इसलिए यही सही समय है। सभी को एक साथ आकर एक धमाकेदार और दमदार आगाज कर इन महाराष्ट्रद्रोहियों को दिखाना ही होगा।

यह केवल स्लिप ऑफ टंग नहीं। स्लिप ऑफ टंग एक बार ही हो सकता है, बार-बार नहीं होता। इसीलिए अब हमने अगर कुछ नहीं किया तो ये लोग अपने महाराष्ट्र को कहां ले जाएंगे, इसका अंदाजा भी नहीं होगा।

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