मुख्यपृष्ठनए समाचारआरक्षण का मुद्दा रास्ते पर नहीं होगा हल! -पृथ्वीराज चव्हाण

आरक्षण का मुद्दा रास्ते पर नहीं होगा हल! -पृथ्वीराज चव्हाण

अगर कोई हल करने की कोशिश कर रहा है तो दुर्भाग्यपूर्ण

सामना संवाददाता / मुंबई

बारामती स्थित उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के निवास स्थान पर धनगर समाज का आंदोलन शुरू है। वास्तव में लोकतंत्र कहां जा रहा है, यह गंभीर मुद्दा है। दल-बदल विरोधी अधिनियम के साथ क्या हो रहा है? वैâबिनेट की बैठक में क्या चल रहा है, ये गंभीर सवाल है, लेकिन आरक्षण को लेकर मेरा मानना ​​है कि यह गंभीर मुद्दा रास्ते पर हल नहीं होगा। अगर कोई इसे सड़क पर सुलझाने की कोशिश कर रहा है तो ये महाराष्ट्र के नजरिए से दुर्भाग्यपूर्ण है। इस मुद्दे को कानूनी तरीके से ही सुलझाया जाना चाहिए। इस गंभीर समस्या को हल करने के लिए सरकार को समय देना चाहिए और सरकार को इस समस्या का समाधान करना चाहिए, यह बात पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कही। उन्होंने आगे कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को बताना चाहिए कि उन्होंने २०१४ से पहले धनगर समाज को किस आधार पर आरक्षण देने का आश्वासन दिया था। अन्य आरक्षण के संदर्भ में भी मुख्यमंत्री ने समय मांगा है। मुख्यमंत्री ने अन्य आरक्षण के मुद्दे पर शपथपूर्वक आश्वासन दिया है, तो उनका सम्मान किया जाना चाहिए और उन्हें समय दिया जाना चाहिए। एक तरफ मराठा आरक्षण और दूसरी तरफ ओबीसी आरक्षण को लेकर दोनों समुदाय में तीव्र भावनाएं व्यक्त की जा रही हैं। इस बारे में बात करते हुए चव्हाण ने कहा कि मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा, लेकिन हमारे राज्य का सामाजिक वातावरण नहीं बिगड़ना चाहिए। कोई भी राजनीतिक नेता जो सामाजिक वातावरण को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है, तो वह निंदनीय है। यह गंभीर मुद्दा है। इस मुद्दे को कानूनी तरीकों से हल किया जाना चाहिए।’ जब मैं मुख्यमंत्री था तो मराठा समुदाय को १६ प्रतिशत आरक्षण दिया गया था, लेकिन हमारी सरकार के चले जाने से यह आरक्षण कायम नहीं रह सका।

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