मुख्यपृष्ठनए समाचारबदहाली में जी रहे बदलापुर के रिक्शावाले!

बदहाली में जी रहे बदलापुर के रिक्शावाले!

  • मुख्यमंत्री नहीं सुन रहे फरियाद

कड़ी धूप हो या तेज बारिश, या फिर कड़ाके की ठंड ही क्यों न हो इन सभी परिस्थितियों से जूझते हुए पैसेंजर को उनके गंतव्य तक पहुंचाना हर रिक्शा-वाला अपना फर्ज समझता है और इस फर्ज को वो बखूबी निभाता भी है। लेकिन अफसोस उनके दर्द को कोई क्यों नहीं समझता? महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे रिक्शा-चालक थे। उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद रिक्शा-चालकों में सबसे अधिक खुशी थी कि शायद उनकी समस्या अब खत्म हो जाएगी। लेकिन अफसोस कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रिक्शा-चालकों के दु:ख-दर्द से, उनकी तकलीफों से अनजान हैं। आज बदलापुर के रिक्शा चालक बदहाली में जीने के लिए मजबूर हो गए हैं। उनकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है। यहां तक कि मुख्यमंत्री भी नहीं। यह जानकारी सिटीजन रिपोर्टर गजानन कदम ने दी।
गौरतलब है कि बदलापुर जैसे छोटे से शहर में इतने रिक्शों को परमिट दिया गया है कि रिक्शा चालकों को पैसेंजर ही नहीं मिल रहे हैं। आज पूरे महाराष्ट्र के रिक्शा-चालक परमिट ओपन करने से आर्थिक रूप से तंग हैं। रिक्शा-चालकों को कई घंटों तक यात्रियों के इंतजार में खड़ा रहना पड़ता है। उनके लिए एक दिन में ६०० रुपए कमाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में रिक्शा-चालक भुखमरी की कगार पर आ पहुंचे हैं।

रिक्शा-चालकों की स्थिति खराब
रिक्शा चालकों के सामने लोन जैसी कई समस्याएं हैं। गौरतलब है कि कोरोना महामारी के दौरान कुछ महीने तक का हफ्ता न भर पाने के चलते उनसे पठानी ब्याज लिया जा रहा है। वसूली के लिए सैक़ड़ों लठैत लोगों की नियुक्ति कर रखी है, जो रिक्शा-चालक किस्त नहीं भर पाते हैं उन पर ये लठैत डाकुओं की तरह से झपटते हैं। जगह पर किस्त नहीं भरने पर रिक्शा जप्त कर लेते हैं और १६ दिन में उसे बेच देते हैं।

महंगाई की मार से बेहाल
महंगाई के कारण अच्छे खासे व्यापारी, नौकरी पेशा लोग भी परेशान हैं। ऐसे में आम रिक्शा-वालों की आर्थिक परिस्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। उनके सामने परिवार को चलाने, बच्चों को पढ़ाने जैसी कई जिम्मेदारियां होती हैं।

परमिट देना बंद करे सरकार
बदलापुर पूर्व के रिक्शा-चालक मालिक संघ के अध्यक्ष किशोर रामचंद्र देशमुख का कहना है कि सरकार को चाहिए वह परमिट देना बंद करे। सभी समस्या की जड़ परमिट का ओपन होना है, जो केवल बदलापुर के रिक्शा-चालकों की ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र भर के रिक्शा -चालकों की बदहाली के लिए जिम्मेदार है। आज बदलापुर में पांच हजार रिक्शा हो गए हैं। कई लोगों के पास रोजगार हैं। फिर भी उन्होंने कई रिक्शा निकाल रखे हैं, जिसके कारण बेरोजगार रिक्शा-चालक परेशान हैं। कोकण विभागीय यूनियन ने मुख्यमंत्री को समस्याओं की सूची भेजी है। लेकिन कभी रिक्शा-चालक रहे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रिक्शा-चालकों की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया है।

अन्य समाचार