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एमपी के खरगोन में दंगे के हालात… घरों पर लटक रहे हैं ताले, घर छोड़कर जा चुके हैं लोग

सूने घरों की टूटी खिड़कियां
बरामदों में पड़े हैं पेट्रोल बम
सामना संवाददाता / इंदौर। खरगोन में रामनवमी के दिन भड़के दंगे पर भले ही कुछ घंटों बाद काबू पा लिया गया हो, लेकिन उसके निशान आज भी शहर में दिखाई दे रहे हैं। भट्टवाड़ी की गली भी उन्हीं में शामिल है, जहां ये निशान दिख रहे हैं। यहां से महज ५० कदम की दूरी पर सर्राफा बाजार है। जहां रोजाना लाखों रुपए का कारोबार होता है। दंगाई उस दिन मकान-दुकान जलाते हुए सर्राफा बाजार की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन लोगों के प्रतिरोध की वजह से वे अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके। जब सुबह हुई तो क्षेत्र की हर गली सूनी थी। ५० से ज्यादा परिवार घरों में ताला लगाकर जा चुके हैं।
घर छोड़कर जा चुके हैं लोग
रहवासी उपेंद्र महाजन ने बताया कि दो महिलाओं को घेरकर पिछली गली में मारा। वे जान बचाकर भागीं तो करीब १० लोग उनके पीछे दौड़े। महिलाओं की चीख-पुकार सुन जैसे-तैसे सब लोग जमा हुए और उन्हें रोका। कुछ देर बाद सैकड़ों लोग तलवार, भाले, फरसे लेकर आगे बढ़े। इसके बाद उपद्रव शुरू हुआ। तलवार और फरसा मारकर घरों के दरवाजे तोड़कर दंगाई अंदर घुसे। मारपीट कर सामान लूट लिया। हाल ही में खरीदी गई टीवी, लैपटॉप, नकदी और ज्वेलरी भी लूट ले गए।
१९९२ में भी हुई थी लूट की कोशिश
६० साल के दिनेश सोनी का कहना है कि यह गली १५० साल पुरानी है। दंगाई सर्राफा दुकानों में भी लूटपाट करना चाहते थे। १९९२ के दंगे के दौरान भी यहां लूट की कोशिश हुई थी।

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