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इनसाइड स्टोरी : डाटा पर डाका, साइबर अपराधियों के लिए माल कमाने का जरिया बना डाटा लीक, केवल ढाई लाख में बिक रहा है ७५ करोड़ भारतीयों का डाटा

एसपी यादव
आए दिन डाटा लीक की खबरें हमें सुनने को मिलती हैं। देखने में आ रहा है कि डाटा लीक का काला धंधा दुनिया की कुल जीडीपी के ०.४ प्रतिशत के बराबर पहुंच गया है। हैकर्स जैसे-तैसे लोगों का डाटा चुराते हैं फिर उसे डार्क वेब पर बेच देते हैं। कंपनियों का डाटा लीक होने पर कंपनियों से फिरौती वसूलते हैं। एक तरह से डाटा पर डाका तेजी से माल कमाने का धंधा बनता जा रहा है।
प्रभावित कंपनियों को मोटी चपत
आईबीएम और पोनेमॉन इंस्टीट्यूट की ‘डाटा ब्रीच रिपोर्ट २०२३’ में कहा गया है कि साल २०२३ में डाटा लीक के प्रत्येक मामले पर औसतन लागत ४.४५ मिलियन डॉलर की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई। साल २०२२ की तुलना में यह २.३ प्रतिशत ज्यादा है। मतलब यह है कि डाटा लीक के मामले से निपटने के लिए प्रत्येक प्रभावित कंपनियों को लगभग ३९ करोड़ रुपए खर्च करने पड़े।
खंगाला गया १७ देशों का डाटा लीक
आईबीएम और पोनेमॉन इंस्टीट्यूट की ‘डाटा ब्रीच रिपोर्ट २०२३’ को तैयार करने के लिए १७ देशों के १७ विभिन्न उद्योगों से जुड़े ५५० डाटा लीक के मामलों का अध्ययन किया गया। ३६०० से अधिक प्रभावित लोगों के इंटरव्यू लिए गए। जिससे साफ हुआ कि डाटा लीक बड़ी समस्या बनता जा रहा है।
कंपनियों के शेयर पर पड़ता है बुरा असर
दरअसल, डाटा लीक होने पर कंपनियों के शेयर प्रभावित होते हैं। वहीं कंपनियों को प्रभावित ग्राहकों को मुआवजा देना पड़ता है। लीक डाटा को फिर से स्थापित करना पड़ता है। कंपनियों को अपने डाटा सुरक्षा इंतजाम को पुख्ता बनाना पड़ता है। इस पर भारी भरकम रकम खर्च होती है।
सबसे बड़े डाटा लीक में ७५ करोड़ हिंदुस्थानियों का भी डाटा
हाल ही में दुनिया में सबसे बड़े डाटा लीक की खबर सामने आई है, जिसमें २६०० करोड़ रिकॉर्ड साइबर अपराधियों के हाथ लग गए हैं। एक्स, लिंक्डइन, टेलीग्राम, एडोबी सहित कई कंपनियों के यूजर्स को इस डाटा लीक से खतरा है। इसे मदर ऑफ ऑल ब्रीचेस (एमओएबी) कहा जा रहा है। चिंताजनक बात यह है कि दुनिया के इस सबसे बड़े डाटा लीक में करीब ७५ करोड़ भारतीयों का डाटा भी शामिल है।
इस डाटा लीक (एमओबी) में ७५ करोड़ भारतीयों के मोबाइल नंबर, घर का पता और आधार शामिल हैं। डार्कवेब पर भारतीय डाटा को बेचने का दावा करने वाले साइबोडेविल का कहना है कि कंप्रेस करने के बाद ६०० जीबी में यह डाटा उपलब्ध कराया जा सकता है। साइबोडेविल ने पूरे डाटा सेट के लिए तीन हजार डॉलर यानी करीब ढाई लाख रुपए की मांग की है।
मोबाइल नेटवर्क प्रदाता कंपनियों का डाटा!
साइबर सुरक्षा फर्म क्लाउडसेक के मुताबिक, दुनिया के इस सबसे बड़े डाटा लीक को अंजाम देने वाले साइबो क्रू के सहयोगी साइबोडेविल ने डार्कनेट बाजार में भारतीयों का जो डाटा बेचने के लिए पेश किया है, वह भारतीय मोबाइल नेटवर्क प्रदाता कंपनियों से जुड़ा है। अगर साइबर अपराधियों का दावा सच है, तो देश की ८५ प्रतिशत आबादी का डाटा महज २.५ लाख रुपए में बिकाऊ होना साइबर सुरक्षा के साथ ही संपूर्ण सुरक्षा के लिहाज से भी जोखिम पैदा करता है।
डाटा सुरक्षा पर उठे सवाल
क्लाउडसेक के मुताबिक, यह डाटा लीक देश के सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं की डाटा सुरक्षा पर सवालिया निशान भी खड़ा करता है। हालांकि अभी इस संबंध में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी कि डाटा कहां से लीक हुआ है, लेकिन क्लाउडसेक के शोधकर्ताओं के मुताबिक डाटा लीक का स्रोत सेवा प्रदाता कंपनियों की तरफ से किए जाने वाला केवाईसी डाटा हो सकता है।
खतरे में पड़ सकती है लोगों की सुरक्षा
क्लाउडसेक का कहना है कि व्यक्तिगत रूप से पहचान योग्य जानकारी (पीआईआई) के लीक होने से बहुत से लोगों और संगठनों के लिए एक खतरे पैदा होते हैं, जिससे संभावित रूप से वित्तीय नुकसान, पहचान की चोरी, प्रतिष्ठा की क्षति और साइबर हमलों की संभावना बढ़ जाती है।

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