मुख्यपृष्ठस्तंभरौबीलो राजस्थान : पीळियै रा रोगी

रौबीलो राजस्थान : पीळियै रा रोगी

बुलाकी शर्मा राजस्थान

हिंदी रा अ‍ेक चावा कहाणीकार खुद रै लिख्योड़ै री बडाई कांई कर दीवी, दूजां रो हाजमो खराब हुयग्यो अर बे बांरी आलोचना करण लाग्या है। कहाणीकारजी ओ ई तो वैâयो है वैâ खुद री कहाणियां टाळ’र दूजां री कहाणियां कमती दाय आवै। खुद री कहाणियां बांच-बांचनै बै मोदीजता रैवै क्यूंवैâ बै अद्‌भुत लिखै।
म्हनै आलोचकां री समझ माथै बैम हुय रैयो है। आखै मुलक में कोई इसी मां मिलैला कांई जिकी नै आपरी औलाद दूजां री औलादां सूं सोवणी नै सांतरी नीं लागती हुवै। दूजा जिकी नै बिगड़ैळ वैâ नालायक बतावै, बीं औलाद नै बा नादान अर भोळो-ढाळो मान’र इतरावती रैवै। आपरा जलमदाता मां-बाप नै जिका सरवण कुमार ओल्ड अ‍ेज होम में राखता कोनी लाजै, बां औलाद सारू ई मोह-ममता में रत्ती भर ई कमी कोनी आवै। आलोचक स्यात् इण साच नै जाणबूझनै अणदेख्यो कर रैया है वैâ साहित्यकार ई सिरजक हुया करै। बीं री रच्योड़ी रचनावां बीं री औलाद है अर आपरी औलाद रूपी रचनावां छोड’र दूजां री रचनावां री सरावणा बो कियां कर सवैâ!
म्हैं तो कहाणीकारजी री ईमानदारी री साचै मन सूं तारीफ करूं। हरेक कहाणीकार वैâ कलमकार खुद नै दूजां सूं सिरै मानतो आयो है। सोधतां-खोजतां थांरी टांग्यां दुखण लाग जावैला पण इसो कोई कलमकार कोनी लाधैला जिको दूजां रै लेखन नै महान बतावतो थकां खुद रै लेखन नै खारिज करतो हुवै। खुलनै खुद री तारीफ करण रो हौसलो नीं हुवण सूं मनोमन ओ मान’ र हरखीतो रैवै वैâ बीं सूं सांतरो लिखणियो दूजो कोई कोनी। गुटबाजी अर मठाधीशां री दादागीरी रै कारणै खरो मूल्यांकन नीं हुवण सूं उपेक्षा झेल रैयो है अर मोटा पुरस्कारां सूं झोळी खाली पड़ी है।
आलोचना करणिया री खास पीड़ ई आ है वैâ अद्‌भुत अर सांतरो तो बे लिखै, फेर कोई दूजो खुद रै लिख्योड़ै नै अद्भुत कियां बता सवैâ। खुद रै लिख्योड़ै नै अद्भुत मानणिया दूजां रै लिख्योड़ै नै बांचबा री गलती कोनी करै। बे खुद लिखै, खुद रो लिख्योड़ो बांचै अर बांच्यां बो अद्भुत लागणो ई है। आत्म मुग्धता सूं तो संत-महात्मा ई मुगत कोनी हुय सवैâ, जणै गिरस्तियां नै दोस देवणो गलत है। सगळां सूं गोरा म्हे। दूजो गोरो गोरो नीं, पीळियै रो रोगी। पीळियै रा रोगी आपां सगळा हां, पण कहाणीकार जी जियां वैâवण रो हौसलो कोनी। फरक इत्तो ई है।

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