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रौबीलो राजस्थान : मिनख अर जिनावर

बुलाकी शर्मा राजस्थान

चीतां री मौतां सूं वनां रा जीव बेजा दुखी है। मिनखां में ई नीं, जिनावरां में ई विदेसी जीवां सारू खास आकर्षण हुया करै। नामीबिया अर दक्षिण अफ्रीका सूं लाया विदेसी चीतां नै ई जंगळ रा सगळा जीव वीआईपी ट्रीटमेंट देवै।
चीतां रै पधारण रो आखै देस में लाडां-कोडां स्वागत-अभिनंदन करीज्यो जणै वन-जीवां में अ‍ेकर इंफीरियर्टी कॉम्पलेक्स रा भाव जरूर आया कै म्हांरी तो ढंग सूं साळ-संभाळ ई कोनी करीजै अर विदेसी जीवां रो इत्तो मान करीज रैयो है। उदय, दक्ष आद कित्ता फूटरा-फूटरा नांवकरण करीज्या है। फेर ई बे इण बात नै लेय’र गुडफीलिंग करी कै विदेसी चीतां नै देखण रो चांस तो मिलियो।
चीतां रै स्पेशल ब्रेक फास्ट, लंच, डिनर आद नै लेय’र ई बे ईसको कोनी करियो, ना विरोध करियो। हिरण अर दूजा जीव चीतां नै कलैवै रूप पुरसीज्या, बीं नै ई विधाता रो विधान मान’र सहन करियो। क्यूँकै बे जाणै कै विदेसियां साथै स्पेशल ट्रीटमेंट करण री आपांरी जूनी आदत है।
बां नै आयां नै ओजूं एक बरस ई कोनी हुयो अर ९ री मौत हुयगी, कित्ती अजोगती बात है। स्याळियै (सियार) रो बच्चो दुखी हुयनै आपरी मम्मी सूं इणरी वजै पूछी। बा बोली, ‘अ‍े हारी-बेमारी सूं नीं, हर (याद) सूं मर रैया है, बेटा। अ‍े आपरी जलम भोम नै याद करता मन सूं कळप रैया है।’
‘पण मम्मी’, बच्चे सवाल करियो, ‘आं नै इत्तै मान-सनमान सूं राखै, फेर ई आं रो मन कियां कोनी लागै?’
बीं री मां बोली, ‘जलम भोम रो मोह छूटै कोनी बेटा। जठै जलम्या, पळ्या, मोटा हुया बा भोम कदैई भूलीज्या करै। आं नै अठै री आबो-हवा रास नीं आय रैयी है अर ना मन लाग रैयो है जणै बेमौत मर रैया है।’
बीं फेर सवाल करियो, ‘पण मम्मी, मिनखां में तो आपरी जलम भोम सारू इसी मोह-ममता कोनी हुवै। लारलै दिनां म्हैं सुणी कै घणाई मिनख आपरै जलम भोम भारत री नागरिकता छोड़’र विदेसां री नागरिकता लैय रैया है। आपरो देस छोड़तां बां रो काळजो कोनी कळपै?’
बा उदास हुय’र बोली, ‘मिनख अर जिनावरां में ओ ई फरक है बेटा। जिनावर आपरी जलम भोम री याद में जान दे देवै अर मिनख आपरै सवारथ रै बसु जलम भोम छोड़तो कोनी संवैâ। मिनखां सूं बच’र रैयै बेटा।’

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