मुख्यपृष्ठस्तंभरौबीलो राजस्थान: राजस्थानमजो कोनी आयो

रौबीलो राजस्थान: राजस्थानमजो कोनी आयो

बुलाकी शर्मा
म्हारा भायला अचूकानंद जी पक्का आलोचक है। खुसी रो मौको हुवै वैâ गमी रो, चूक काढ्यां बिना बां सूं रैइजै ई कोनी।
अ‍ेकर म्हें भायला स्हैर रै अ‍ेक नामी सेठ री हवेली जीमण नै गया। बां आपरै बेटे रै ब्यांव री खुसी में पार्टी राखी ही। जायवैâदार मिठायां। नमकीन। अचूकानंदजी दही बड़ां माथै धावो बोलता तीन-च्यार प्लेटां सलटायां पछै मूंडो बिगाड़‌ता बोल्या, `मजो कोनी आयो भगवन। दही तो तिरछो चाल रैयो है।’
बे आपरी टीप व्यंजना में करिया करै। `तिरछो चालै’ मतलब दही खाटो है। गुवार पाठै री सब्जी साथै पूडी रो कवो मूंडै में धरियो अर साथै ई बां रै सिरी मुख सूं अ‍े बोल निकळ्या, `गुवार पाठै रो साग बणावणियो कोई डोफो दीखै म्हनै। ई मांय तो घूघरा नाच रैया है।’
घूघरा नाचण सूं मतलब हो वैâ साग में कांकरा है। म्हांनै ना दही तिरछो चालण रो अ‍ैसास हुयो अर ना गुवार पाठै रै साग में घूघरा नाचता दीख्या पण बांरी पाक-कला समालोचना साम्हीं दूजै री राय धराशाही हुय जावै। सेठां बिदाम-पिस्ता घला’र भोत टेस्टी दाळ रो सीरो (हलवो) बणवायो हो। म्हे भायला स्वाद लेय’र चेप रैया हा। अचूकानंदजी ई खावण में म्हासूं आगै हा पण जियां ई म्हैं तारीफ करी, बां नाक में सळ घालता फरमायो, `मजो कोनी आयो भगवन। सेठ इसो क्या सीरो बणवायो है। म्हां म्हारी गळी री कुतड़ी रै कुकरिया जलमै जणै गुड़ रो सीरो बणाया करां, बो इणसूं घणो स्वादिष्ट हुया करै।’
आ तो भली रैया सेठजी वैâ बांरो कोई गुमास्तो बां री आ महताऊ आलोचकीय टीप कोनी सुणी। जे बे सुण लेवता तो बांरै साथै म्हां भायलां नै ई जूत मार `र बारै काढता।
कसर निकाळण में बे किणनै ई बखसै कोनी। दूजां री ई नीं, आपरै घरआळां री कसर निकाळण में ई बे पाछ कोनी राखै। बां रै पैलो पोतो हुयो। सवा महीनै पछै बीनणी लाडा-कोडां आपरै पीहर सूं घरै आयी। पोतै रो मूंडो देख’र सगळा हरखीज्या पण बां री तारीफ रो अंदाज निराळो। फरमायो, `मजो कोनी आयो भगवन। छोरै रो माथो तो जाणै लालटेन रो गोळो है। किण माथै गयो है ओ। आपांरै तो इसो कोई कोनी।’ बो दिन है अर आज रो दिन, बेटो अर बीनणी बां सूं बात ई कोनी करै। बे बात करो वैâ ना करो, अचूकानंदजी री कसर निकाळण री आदत बियां री बियां है।
इसा अचूकानंदजी सूं आपरा ई जरूर भेंटा हुया हुवैला।

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