मुख्यपृष्ठस्तंभरौबीलो राजस्थान : भलै मिनख री कथा

रौबीलो राजस्थान : भलै मिनख री कथा

बुलाकी शर्मा राजस्थान

बे भला अर सीधा मिनख है। बे ना किण रो सामनो करै, ना गलत रो विरोध करै। सड़क टूट्योड़ी हुवै तो ई सिकायत नीं। मारग में भाठा वैâ दगड़ पड़िया हुवै, तो ई चैरै ऊपरां धीजै रा भाव। तसल्ली सूं वैâवैला- इसी टूट-भांग तो चालती ई रैवै। स्हेर रो पैâलाव हुय रैयो है नीं। सगळी सड़कां बणती-बणती बणसी। पैला अठै सड़क बणी ही, जणै ई तो बी रै टूट-फूट हुई है। मौको आयां आ टूट-फूट ई सावळ हुय जासी। जे नीं हुवै तो ई चालीजै तो है ई।
लोगड़ा पेट्रोल-डीजल-गैस सिलेंडर री रोजीना बधती कीमतां नै लेय’र रोळा-रप्पा करै। मैंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार आद नै लेय’र सरकार नै भूंडै। पण बे कदैई सरकार रो विरोध कोनी करै। ओ ई वैâवै-चालै जियां चालणो है फेर रोळा-रप्पा करण में कांई सार।
सीधै मारग चालणियो टेढ़ै मारग चालणियै सूं घणो डरै। बे पूरा संभळ’र चालै। किण सूं ई पंगो लेवणो दूर, पंगो लेवणियै सूं ई सॉरी करण में सार मानै। बिना वजै ई कोई झापड़ मार देवै तो दूजो गालड़ो साम्हीं कर देवै। तीजो वैâ चौथो गाल हुवतो तो ई झापड़ खावण खातर प्रेम सूं पुरसण रो माद्दो राखै। पाछी झापड़ मार’र बदळो लेवण री तो सोचै ई कोनी। झापड़ खाय’र बे चुपचाप फुरती सूं बठै सूं निकळण में ही सार मानै। आपरी इज्जत आपरै हाथ। आपां आपांरो सुभाव क्यों छोड़ां। आप भलो, जग भलो।
सहनशीलता री मूरत है बै। दूजा लोग बां नै बिना वजै ई परेसान करै तो ई बांरै चैरै ऊपरां मुळक दीखै। अ‍ेकर म्हैं बांरै घरै गयो जणै घर रै धुरी मोड़ै में बड़ण लाग्यो ही हो वैâ बांरो तेज सुर म्हारै कानां पूग्यो। म्हनैं भरोसो कोनी हुयो। गौर सूं सुणण लाग्यो। बांरो सुर ही हो। आपरी घरआळी अर टाबरां ऊपरां दडूक रैया हा। दडूक ई नीं रैया हा, गाळ्यां ई काढ रैया हा। अचाणचक म्हैं धुरी मोड़ो खोल’र बांरै घर में बड़्यो।
म्हनैं देखतां ई बां रो गुस्सो गायब। चैरै ऊपरां हरमेस जिसी मुळक। इयां लाग्यो जाणै रोळो करणियो कोई दूजो हुवै, बै नीं। म्हनैं देख’र बांरी घरआळी अर टाबर कमरै में गया परा। बै भला मिनख बण्योड़ा म्हारो स्वागत करण लाग्या-पधारो सा।
पण म्हनैं आज लाग्यो कै बै भलै रो खोळियो ओढ्योड़ा भोत शातिर मिनख है।

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