मुख्यपृष्ठखबरेंइंसान नहीं रोबोट करेंगे इलाज!

इंसान नहीं रोबोट करेंगे इलाज!

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
प्रदेश के शासकीय वैद्यकीय अस्पताल में अब इंसान की बजाय रोबोट आर्म सर्जरी करेंगे। राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा बताया गया है कि जल्द ही अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी को शुरू कर दिया जाएगा। विभाग की तरफ से यह भी बताया गया है कि इसके लिए न केवल १८ करोड़ रुपए की निधि मुहैया कराई गई है, बल्कि टेंडरिंग प्रक्रिया भी अब अंतिम चरण में पहुंच गई है।
तीन सालों से थी योजना
पिछले तीन साल से मेडिकल में रोबोटिक सर्जरी शुरू करने की योजना चल रही थी। अब इसके लिए हाफकिन महामंडल को १६ करोड़ रुपए की निधि दी गई है। हालांकि अन्य कारणों के चलते मेडिकल को रोबोटिक सर्जरी के लिए आवश्यक उपकरण नहीं मिल पाए हैं। यह सुविधा नागपुर शासकीय मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में उपलब्ध कराई जाएगी।
क्या है रोबोटिक सर्जरी?
रोबोटिक सर्जरी से तात्पर्य ऐसी सर्जरी से है, जिसे रोबोट आर्म या मैनूअल तरीके से किया जाता है। इसकी प्रक्रिया काफी हद तक लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की तरह ही होती है लेकिन इसमें केवल यह अंतर होता है कि इस सर्जरी में कंप्यूटर की सहायता ली जाती है। रोबोटिक सर्जरी वर्तमान दौर की अत्याधुनिक सर्जरी पद्धति है। इसके माध्यम से शरीर में एक छोटा-सा चीरा लगाया जाता है। वहां से शरीर के भीतरी अंगों का थ्री डायमेंशनल का पता लगाने के लिए एक वैâमरा व अन्य उपकरण छोड़े जाते हैं। वैâमरा द्वारा शरीर का ३६० डिग्री से सूक्ष्म चित्रीकरण किया जाता है। इस तरह जहां जरूरी हो, वहां शल्यक्रिया आसानी से की जाती है।
अचूक है शल्यक्रिया
विशेषज्ञों का मानना है कि यह शल्यक्रिया अचूक है। रोबोटिक सर्जरी के बाद घाव जल्द भर जाता है। मरीज जल्द ठीक होता है। शल्यक्रिया के दौरान मरीज को रक्तस्त्राव कम होता है। उसे अस्पताल में अधिक दिनों तक रुकने की आवश्यकता नहीं होती है। इसके लिए मनुष्यबल और समय कम लगता है। यह शल्यक्रिया इतनी सूक्ष्म होती है कि शरीर की अन्य पेशियों को हानि नहीं पहुंचती है।

चौथी बार आयोजित की गई टेंडरिंग प्रक्रिया
स्वास्थ्य शिक्षा मंत्री अमित देशमुख की तरफ से कहा गया है कि राज्य सरकार के निर्धारित नियमों के अनुसार हाफकिन महामंडल द्वारा तीन बार निविदा प्रक्रिया आयोजित करने के बावजूद तकनीकी कारणों से खरीद प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद टेंडर को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया उस निविदाकार द्वारा शुरू की गई है, जिसने चौथी बार पुन: निविदा प्रक्रिया में भागीदारी लेते हुए न्यूनतम दर दी। ऐसे में यह सवाल ही नहीं उठता है कि विलंब तकनीकी कारणों से हुआ है।

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