मुख्यपृष्ठनए समाचाररोखठोक : महाराष्ट्र को नामर्द बनाने की साजिश ...राजियों की जीवनी!

रोखठोक : महाराष्ट्र को नामर्द बनाने की साजिश …राजियों की जीवनी!

संजय राऊत – कार्यकारी संपादक

वीर सावरकर के अपमान के मामले में भाजपा ने जो जोश और जोर दिखाया वह छत्रपति शिवाजी महाराज के अपमान मामले में नहीं दिखाया, बल्कि छत्रपति का अपमान करनेवालों का समर्थन किया। इस मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र बंद का आह्वान करके जनता का विरोध प्रदर्शित करने का मौका विरोधियों ने गवां दिया। शिवराय के चरित्र को भुलाया जा रहा है। महाराष्ट्र को नामर्द बनाने की साजिश सफल हो रही है क्या?

वर्तमान में बहुत ही कठिन समय आया है। यदि ऐसा नहीं होता तो भाजपा के नेता और उनके राज्यपाल महाराष्ट्र की ही भूमि पर छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान करने का दुस्साहस नहीं करते। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शिवाजी महाराज को ‘कालातीत’ अर्थात जूना-पुराना बताकर तूफान को न्यौता दे दिया है। यहां राज्यपाल शिवराय को जूना-पुराना कहते हैं तो वहां भाजपाई नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा है कि शिवाजी राजा ने औरंगजेब से समझौता करने लिए पांच पत्र भेजे थे, अर्थात माफी मांगी थी, ऐसा धमाका करके महाराष्ट्र के मन को ठेस पहुंचाई है। इन दोनों लोगों द्वारा शिवाजी राजा का अपमान किए जाने के बावजूद भी महाराष्ट्र सरकार मुंह सीकर चुप्पी साधे बैठी है। मुख्यमंत्री शिंदे और उपमुख्यमंत्री फडणवीस ने अपमान का साधारण निषेध तक नहीं किया। उन्होंने विरोध तो किया नहीं, बल्कि उन्होंने राज्यपाल कोश्यारी और त्रिवेदी का बचाव किया। इस तरह का आक्रमण अंग्रेजों के दौर में भी नहीं हुआ था। इसी वजह से समय बहुत ही कठिन आ गया है, ऐसा कहना पड़ रहा है। शिवराय का अपमान राज्यपाल ने पहली बार नहीं किया है, इससे पहले भी वो कई बार कर चुके हैं। राज्यपाल कोश्यारी और सुधांशु त्रिवेदी महाराष्ट्र से माफी मांगें, इस मांग को मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री ने खारिज कर दिया। ऐसे राज्यपालों और शिवराय के अपमान करनेवालों का समर्थन करना देशद्रोह जैसा अपराध ही है। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की निंदा को यदि देशद्रोह जैसा अपराध माना जाता है, तो फिर महाराष्ट्र के आराध्य देव शिवराय के अपमान को भी देशद्रोह कहा जाना चाहिए। भाजपाई नेताओं ने दो मुद्दे व्यक्त किए हैं, जो कि शिवाजी महाराज पुराने हो गए हैं और छत्रपति नए युग के ‘नायक’ नहीं हैं। जो राज्य चार सौ वर्षों के बाद भी शिवाजी राजा के विचारों से चला, उसे कालातीत बताकर भाजपा और उसके लोग क्या कहना चाहते हैं?
ऐसा राजा नहीं होगा
छत्रपति शिवाजी राजे नई सृष्टि के निर्माता ही थे। सन् १६१६ या १६१९ कृष्णाजी अनंत सभासद द्वारा रचित, शिवाजी महाराज की मृत्यु के १४-१५ साल बाद तैयार हुई ये जीवनी है। सभासद अपनी पुस्तक में ‘राजिया की चरित्र कथा’ में ये कहते हैं, ‘राजा ने केवल साक्षात अवतार के रूप में ही जन्म लेकर पराक्रम दिखाया था। नर्मदा से लेकर रामेश्वर तक मुनादी की, देशों को जीता। आदिलशाही, कुतुबशाही, निजामशाही और मुगलशाही इन चारों रियासतों और समुद्र के बाइस पातशाहों को कब्जे में लेने के बाद नया राज्य बनाया और मराठा पातशाह सिंहासनाधीश छत्रपति प्राप्त हुआ। बदले में इच्छामृत्यु पाकर स्वर्ग सिधारे। इस श्रेणी का कोई पहले नहीं हुआ, आगे भी नहीं होगा।
ऐसा है यह राज दरबार
‘शिवाजी’ का मतलब जनता के मन का राजा। उनके राज्य की संरचना, व्यवस्था, उनका मंत्रिमंडल कालातीत वैâसे माना जा सकता है? राज्याभिषेक के समय सवारी रायगढ़ गई। चारों ओर पहाड़, चट्टानें, किले, आसपास दुर्गम स्थान हैं। शत्रु के लिए पहुंचना कठिन। गागा भट्ट से बात करके छत्रपति ने इसी जगह को राजधानी के लिए चुना। भट्टजी ने मुहूर्त निकाला। राज दरबार वैâसा होना चाहिए, यह तय किया। वह ऐसा था।
• राजसभा- वहीं कचहरी होनी चाहिए।
• विवेक सभा- यहां पंडित पहले शास्त्र विचार करते रहे होंगे। विभिन्न पुराणों की कथा सुनें।
• न्याय सभा- यहां न्याय-निर्णय होना चाहिए। (मुख्य न्यायालय)
• प्रकट सभा- वहां दीन-गरीबों की फरियाद सुनी जाए।
• प्रबोधन सभा- वहां कीर्तन आदि शास्त्रपुराण का सारांश श्रवण किया जाए।
• रत्नागर- सभा की जगह विभिन्न प्रकार के आभूषण, विभिन्न वस्तुएं, नाना द्रव्य, वस्त्र सहित अनमोल जिंस आदि सामग्री लाई जानी चाहिए और परीक्षण किया जाना चाहिए।
• नाता- सभा स्थल पर यदि कोई अपना या गैर दूर-देश से आया है, तो उससे मिलकर देश-विदेश के बारे में चर्चा की जाए। न्यायोचित आदेश दिया जाना चाहिए, अधर्मी भाषण नहीं दिया जाना चाहिए। इसका नाम नीति सभा है, जैसे मयासुर ने धर्मराज को मय सभा बनाकर दी थी, वैसा ही महाराज ने किला प्रशासन और दरबार बनाया, वह ‘कालातीत’ वैâसे हो सकता है?
मस्तक पर पांव रखकर
शिवाजी राजे ने औरंगजेब के सिर पर पैर रखकर स्वराज्य की स्थापना की। साथ ही ‘खुद औरंगशाह को ही दिल्ली में समेट दूंगा’ ऐसा कहे जाने का रिकॉर्ड अंग्रेजों के दस्तावेजों में है। आज जैसे पाकिस्तान को ‘धमकाते’ समय हमारे आज के शासक उसी तरह की नीति अपनाते हैं। इसलिए परचक्र से लड़ने के लिए शिवराय का विचार पुराना नहीं है। संतों को परचक्र के खिलाफ लड़ने के लिए जो ‘अवतार’ चाहिए था, वही शिव छत्रपति ने प्रदान किया। यदि शिव चरित्र का वास्तविक सार निकाला जाए तो उसमें से दो मुख्य सूत्र बाहर निकलते हैं। एक था परचक्र का हरसंभव विरोध करके स्वराज्य की स्थापना करना और दूसरा मुख्य रूप से मेहनतकश जनता पर आधारित स्वराज्य की नींव के अनुरूप सुधार करके स्वराज्य की स्थापना करना। भारत के जमींदार-जागीरदारों ने परचक्र का समर्थन किया और लोगों को प्रताड़ित किया। इसलिए शिवराय ने मराठी राज्य की स्थापना करते ही मोकासेस और जागीरदारी को रद्द कर दिया और सेना को भी गांवों से कुछ लेने पर उसकी कीमत देनी चाहिए, ऐसा आदेश जारी कर दिया। फसलों पर ‘मक्ता’ (आदते-एकाधिकार) वसूलने की प्रथा बंद कर दी गई। खानाबदोश आदिम और बावरिया जनजातियों को किलों पर रक्षक नियुक्त किया गया और उन्हें खेत देकर उनकी बस्ती बसाई। इसलिए उन्हें ईमानदारी से जीवन व्यतीत करने का अवसर और साधन मिल गया। बेरोजगारी दूर हुई। बेरोजगारी दूर करने और इसके लिए उस दौर में योजना को अमल में लाने का विचार जूना-पुराना वैâसे हो सकता है? प्रधानमंत्री के रूप में मोदी बेरोजगारों को नौकरी दे रहे हैं और शिवराय ने जमींदारी को नष्ट कर दिया, उसी सरदार वल्लभभाई पटेल ने संस्थानों को नष्ट कर दिया, क्या इस वजह से शिवराय के विचार कालातीत हो गए?
आज मराठी भाषा और अस्मिता की बात की जाती है। मराठी भाषा बची रहनी चाहिए इसके लिए लड़ाइयां लड़ी जाती हैं, लेकिन राज्याभिषेक होते ही जैसे ही छत्रपति शिवराय ने तुरंत मराठी भाषा का राज्य शब्दकोश बनाकर विदेशी भाषा की महाराष्ट्र से हकालपट्टी की थी। उसे याद रखना चाहिए।
फारसी भाषा पढ़कर मेरी कचहरी-कानून नहीं चलेगा, ऐसी बाधा उन्हें महसूस हुई। मराठी भाषा और संस्कृति का विकास तब शिवाजी महाराज का लक्ष्य था, वही आज हम सभी का है।
दुश्मनों से लड़ने के लिए ‘अर्मार’ अर्थात नौसेना की स्थापना करनेवाले शिवाजी महाराज पहले व्यक्ति हैं। उन्होंने समुद्र में किलों का निर्माण किया और नौसेना बनाई। इसी नौसेना की संकल्पना आगे बढ़ी। अत: शिवाजी महाराज कालातीत नहीं हैं। नौसेना का नया झंडा प्रधानमंत्री मोदी ने छत्रपति शिवराय को समर्पित किया। भारतीय नौसेना के झंडे पर अब तक गुलामी का निशान था, लेकिन अब हमने इतिहास को बदलनेवाला काम किया है। अब भारत ने अपने झंडे से गुलामी के कलंक को मिटा दिया है। आज (२ सितंबर, २०२२) से भारतीय नौसेना को एक नया झंडा मिल गया है। हम उस ध्वज को नौसेना के प्रणेता छत्रपति शिवराय को समर्पित कर रहे हैं।’ प्रधानमंत्री मोदी ने यह घोषणा की, क्या इसलिए कि शिवाजी महाराज कालातीत अर्थात जूने-पुराने हो गए हैं?
वह आज के नायक हैं
देश के स्वतंत्रता संग्राम को प्रेरणा मिले इसके लिए लोकमान्य तिलक सार्वजनिक शिव जयंती उत्सव की योजना ही नहीं बनाते, यदि शिवाजी महाराज ‘नायक’ नहीं होते। तिलक, गणपति और शिवराय को घरों से पंडाल में ले आए। शिवाजी-भवानी के नाम से ही संयुक्त महाराष्ट्र का संघर्ष भी भड़काया और जीता गया। मुंबई महाराष्ट्र को मिली।
शिवसेना जैसा ज्वलंत, राष्ट्रीय स्वाभिमान वाला संगठन तो शिवाजी राजा की प्रेरणा से ही तैयार हुआ। शिवराय कालातीत हो गए होते तो कोई उनका नाम क्यों लेता?
शिवाजी महाराज ने किसानों को सुरक्षा प्रदान की। इसलिए वे स्वराज के लिए राजा के इर्द-गिर्द एकत्रित हुए। किसानों की सुरक्षा और अधिकारों की ही बात आज भी की जाती है।
महाराष्ट्र में शिवराय का पूजनीय स्थान है और वे दुनिया के लिए एक आदर्श वीर पुरुष हैं। शिवराय द्वारा स्थापित स्वराज्य केवल लोक कल्याण के लिए था। उसी लोक कल्याण के विचार को सभी शासकों ने आगे बढ़ाया। पंड़ित नेहरू से मोरारजी देसाई तक ने शिवाजी राजा के संबंध में आपत्तिजनक बयान दिया था। तब आक्रोशित हुए महाराष्ट्र ने उन्हें माफी मांगने को मजबूर कर दिया था। वही महाराष्ट्र आज ठंडा होकर निस्तेज पड़ा है। पिछली बार एक प्रकरण में छत्रपति शिवराय के वंशजों का अपमान किया गया था, इस वजह से संभाजी भिडे ने मुख्यमंत्री के दौरे पर होने के दौरान ‘सांगली बंद’ किया था, लेकिन आज छत्रपति शिवराय का भाजपाकृत अपमान होने के बाद भी वे चुप क्यों हैं? इस मुद्दे पर सभी शिवप्रेमी संस्थाओं और संगठनों को एक साथ आकर ‘महाराष्ट्र बंद’ का आह्वान करना चाहिए। दूसरी महत्वपूर्ण बात ये है कि पैगंबर मुहम्मद के बारे में विवादित बयान दिए जाने के बाद इस्लामिक एवं अरब देशों द्वारा विरोध किए जाने पर भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा को उनके पद और पार्टी से निष्कासित कर दिया गया, लेकिन छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान करनेवालों का समर्थन किया जाता है। निंदा करनेवालों का बाल भी बांका नहीं हुआ। वे अपनी पार्टी और पद पर बने हैं।
महाराष्ट्र को नपुंसक बनाने की साजिश वाले जहरीले प्रयोग को अंजाम तक पहुंचाया जा रहा है! उफान के साथ उठने की महाराष्ट्र की क्षमता नष्ट हो रही है!

@rautsanjay61
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