मुख्यपृष्ठसंपादकीयरोखठोकरोखठोक : चमचे, अंधभक्त और भिंडी की सब्जी!

रोखठोक : चमचे, अंधभक्त और भिंडी की सब्जी!

संजय राऊत / कार्यकारी संपादक।  कांग्रेस के दौर में दिल्ली से मुंबई तक चमचों का बोलबाला था। मोदी के युग में चमचों की जगह अंधभक्तों ने ले ली है। परंतु काम वही है। चंद्रकांत पाटील कहते हैं, ‘मोदी २२ घंटे काम करते हैं। शेष दो घंटे भी नींद न आए इसके लिए शोध चल रहा है।’ चमचों की ऐसी बातें सुनकर मोदी की दो घंटे की नींद भी उड़ गई होगी!

मालिक तो महान है,
बस चमचों से परेशान है
आज हमारे देश में ऐसा ही माहौल दिख रहा है। देश की राजनीति में सीधे-सीधे दो समूह बन गए हैं। भक्तों की फौज, उस पर फिर से अंधभक्तों का एक प्रखर उपसमूह है, तो वहीं दूसरी तरफ एक औरों का चमचा महामंडल है। ये दोनों ही देश के लिए खतरनाक हैं। भांड़, भाट और चमचों को जिन राज्यों की निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल किया जाता है, तो वो राज्य रसातल में चला जाता है और राजा विश्वास खो देता है। वर्तमान में हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी इसी तरह की चमचागिरी बढ़ने से परेशान हो गए हैं। कांग्रेस के दौर में चमचे थे। मोदी के दौर में अंधभक्त हैं। सिर्फ नाम बदल गया है। काम वही है। देवकांत बरुआ ने ‘इंदिरा इज इंडिया’ ऐसी घोषणा की थी। आज मोदी भक्तों ने ‘मोदी इज इंडिया’ घोषित कर दिया है। जो मोदी के साथ नहीं हैं वो देश के साथ नहीं हैं, इस हद तक भक्त पहुंच गए हैं। लेकिन अब जो अति की है वो महाराष्ट्र के चंद्रकांत पाटील ने। पाटील ने अंधभक्ति का ढोल बजाते हुए कहा, ‘श्री नरेंद्र मोदी अनवरत परिश्रम करते हैं। वे बाईस घंटे काम करते हैं और सिर्फ दो घंटे सोते हैं। अब ये दो घंटे भी नींद न आए, ऐसा प्रयास किया जा रहा है।’ पाटील की ऐसी बातें सुनने के बाद दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी की दो घंटे की नींद भी उड़ गई होगी। भक्तों और चमचों के अंदर ये इतनी मानसिक शक्ति आती कहां से है, यह शोध का विषय है।
नवाब का खाना
भक्ति, अंधभक्ति अथवा चमचागिरी का अर्थ क्या है, इस बारे में एक अच्छी कहानी आचार्य रजनीश ने कही थी। श्री हर्ष गोयनका ने इसे अपने सोशल मीडिया पर फिर से पोस्ट किया। मुल्ला नसरुद्दीन नवाब के अजीज थे। अर्थात, सबसे बड़ा चमचा था। चमचों से कौन प्यार नहीं करता? सभी करते हैं। एक बार नवाब और नसरुद्दीन दोनों खाना खा रहे थे। भिंडी की सब्जी बनाई गई थी। भिंडी की ताजी-ताजी फसल बाजार में आई थी। नवाब को भिंडी की सब्जी पसंद आई। नवाब ने कहा, ‘भिंडी की सब्जी वास्तव में स्वादिष्ट बनी है। स्वाद जीभ पर बस गया है।’ फिर नसरुद्दीन वैâसे पीछे रह सकता था? चमचे तो ऐसे मौकों की तलाश में रहते हैं। नसरुद्दीन ने पूछा, ‘बस सुंदर और स्वादिष्ट? वनस्पति विज्ञान के अनुसार तो अमृत है। जो भिंडी की सब्जी खाते हैं, वे एक हजार साल तक जीते हैं और उनका एक-एक दिन हजार साल का होता है। भिंडी कोई मामूली चीज नहीं है। जैसे आप बादशाहों के बादशाह हो, उसी तरह भिंडी भी सब्जियों का बादशाह है।’ अंदर बावर्ची ने यह सुन लिया। वह प्रेरित हो गया। यदि भिंडी में अमृत जैसे गुण हैं तो उसने दूसरे दिन भी भिंडी बना डाली। तीसरे दिन भी भिंडी ही बनाई। इसके बाद वह भिंडी रूपी अमृत रोज ही नवाब की थाली में परोसने लगा। आठवें दिन नवाब ने भोजन की थाली फेंक दी। नवाब संतप्त हो गया, ‘भिंडी, भिंडी, भिंडी!’ क्या चल रहा है? क्या तुम मुझे मारनेवाले हो?’ उसके ऊपर, नसरुद्दीन ने अपनी थाली और भी जोर से फेंकी! और उठकर उस बावर्ची को जोरदार थप्पड़ मार दिया। ‘क्या तुम नवाब को मारने का प्रयास कर रहे हो? दुष्ट कहीं का! भिंडी जैसी सड़ी हुई स्वादहीन सब्जी नवाब को खिलाने में तुम्हें शर्म नहीं आती? भिखारी भी भिंडी नहीं खाते हैं। नाम सिर्फ भिंडी है। यह विष है विष! तुम दुश्मनों के हाथ की कठपुतली बन गए हो। आप साजिश में शामिल हो। आप देश विरोधी साजिश के कर्ताधर्ता हो। नवाब को भिंडी खिलाकर आप नवाब और देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।’ नसरुद्दीन का यह रूप देखकर नवाब भी हैरान रह गया। उसने कहा, ‘नसरुद्दीन ये क्या है? आठ दिन पहले तुमने ही तो कहा था कि भिंडी का मतलब अमृत है। तुम भूल गए?’ नसरुद्दीन ने कहा, ‘मालिक, मैं वैâसे भूल सकता हूं? मुझे सब कुछ याद है।’
नवाब ने कहा, ‘आज अमृत जहर में वैâसे बदल गया? भिंडी तो वही है। तुम क्यों बदल गए? और उस बेचारे रसोइए को तुमने मार भी दिया तथा तुमने भोजन की थाली मुझसे भी जोर से फेंकी।’
नसरुद्दीन ने शालीनतापूर्वक कहा, ‘मालिक, हम कोई उस भिंडी के गुलाम नहीं हैं। हम तो आपके दास हैं। भिंडी की ऐसी की तैसी। भिंडी जाए भाड़ में। आपको भिंडी पसंद नहीं आई, इसलिए हमें भी पसंद नहीं आई। आपने अपनी थाली फेंकी, फिर हमने भी अपनी थाली जोर से फेंक दी। जब आपको भिंडी पसंद आई, तब हमें भी अच्छी लगी। हम आपके सेवक हैं, मालिक! समझने का प्रयास करें!’
देखिए चमचे और भक्तों का कितना सटीक वर्णन किया है। मोदी को खिचड़ी पसंद है, इसलिए भक्तों को भी खिचड़ी पसंद आने लगी। मोदी ने चाय बेची, इसलिए भक्तों ने भी चाय बेचना शुरू कर दिया। इस भक्ति का कोई तोड़ नहीं है। अब कोथरुड के पाटील, मोदी की नींद पर शोध करने जा रहे हैं। मोदी अब से २४ घंटे जागेंगे, यानी उनके भक्त भी नहीं सोएंगे।
उथल-पुथल
दुनिया का इतिहास चमचागिरी की असंख्य दंत कथाओं से भरा पड़ा है। ‘दुनिया में उथल-पुथल के लिए महापुरुष नहीं, बल्कि चमचे जिम्मेदार हैं’, ऐसा एक महान लेखक ने लिखा है। हरिशंकर परसाई एक महान व्यंग्य लेखक हैं। उन्होंने ‘चमचों की दिल्ली यात्रा’ शीर्षक से एक शानदार व्यंग्य लेख लिखा था। उन्होंने उस दौर की दिल्ली यात्रा का सटीक वर्णन किया था। उन्होंने कहा, ‘मेरा अनुमान है कि इस समय देश के राजनीतिक क्षेत्र में करीब पांच हजार चमचे काम कर रहे हैं। ये मुख्य चमचे हैं। फिर स्थानीय चमचे, सहायक चमचे, अतिरिक्त चमचे, विशेष चमचे जैसे पदों पर ये लोग कार्यरत हैं। ये सभी चमचे अपने नेता के इर्द-गिर्द हताश नजरों से लाभार्थी बने मौजूद रहते हैं। अपनी निष्ठा दिखाने के लिए ये चमचे किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं।’ परसाई द्वारा वर्णित वो दौर दिल्ली में कांग्रेस का सुनहरा दौर था। आज दिल्ली वही है। चमचों की जगह भक्तों ने ले ली है और उसमें ‘मीडिया’ नामक नया बड़ा चमचा भी जुड़ गया है।
युद्ध के मैदान के मोदी
हर बड़े आदमी का कम-से-कम एक चमचा होना ही चाहिए। भट, भांड़, माउथपीस इसी से तैयार होते हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ पसंद आने की घोषणा करते ही, देशभर के भक्तों ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ को सिर्फ ‘ऑस्कर’ पुरस्कार देना ही बाकी रखा। मोदी द्वारा ‘द कश्मीर फाइल्स’ का प्रचार शुरू करते ही देशभर में उनके भक्तों ने फिल्म के पोस्टर चिपकाने शुरू कर दिए। यह चमचागिरी की पराकाष्ठा है, ऐसा दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा। एंथनी ईडन, चर्चिल का चमचा था। बोसवेल, डॉ. जॉनसन का चमचा था। गांधी और नेहरू के भी चमचे थे। राजेश खन्ना के अपने करियर के शिखर पर रहने के दौरान चमचागिरी का एक किस्सा है। पेट दर्द की वजह से वो मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती हो गए। राजेश खन्ना का कुशलक्षेम पूछनेवालों की तब अस्पताल में कतार लगी थी। उनके कई निर्माता अस्पताल के वॉर्ड में घुसने का प्रयास कर रहे थे। एक बड़ा निर्माता राजेश खन्ना के कमरे में घुसा और छत की ओर देखते हुए कहा, ‘ऊपर आका (ईश्वर), नीचे काका!’ राजेश खन्ना को उस दौर में ‘काका’ के उपनाम से जाना जाता था। चमचागिरी का इतिहास रामायण और महाभारत के काल से मिलता है। रूस-यूक्रेन युद्ध में हमारे प्रधानमंत्री मोदी को वैâसे घसीटना है, इसे लेकर भक्तों के बीच भारी हंगामा हुआ होगा। अंतत: एक दिन भक्तों के न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया पर खबरें आ ही गर्इं। मोदी ने पुतिन और बाइडेन से करीब एक घंटे तक चर्चा की। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने फोन करके मोदी से मदद मांगी। कहा गया कि मोदी ने पुतिन और बाइडेन को संयम बरतने की सलाह दी। मोदी की सलाह दोनों ने मान ली, ऐसा भी प्रसारित किया गया, परंतु सच्चाई ये है कि रूस ने यूक्रेन को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। पुतिन और बाइडेन, मोदी की बात सुननेवाले थे, तो दोनों के बीच युद्ध क्यों छिड़ा? इस पर भक्तों और चमचों का कहना है कि ‘जब युद्ध छिड़ा, उस समय मोदी उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार में व्यस्त थे। इसलिए उन दोनों का मोदी से संपर्क नहीं हो पाया!’ यह सीधे-सीधे चमचागिरी है। चमचे भगवान के दरबार में भी थे। हरिशंकर परसाई कहते हैं, ‘सभी देवदूत भगवान के चमचे हैं, शैतान ने भगवान का चमचा बनने से इनकार कर दिया, इसलिए उन्हें स्वर्ग से निकाल दिया गया!’
जो राज चमचों का निर्माण करता है, वह राज चमचों का ही बन जाता है। उससे अंधभक्तों की एक सेना बनती है।
चंद्रकांत पाटील ने प्रधानमंत्री मोदी की नींद का मुद्दा उठाया। मोदी उनके भगवान ही हैं। देवताओं के भी चमचे थे। लेकिन भगवान सोते नहीं हैं, ऐसा चमचों ने कभी नहीं कहा। साधु, संत, योगी, सिद्धपुरुष इंसानी शरीर की जरूरत के अनुसार सोते थे, लेकिन मोदी हमेशा जागेंगे, ऐसी घोषणा की गई। इसलिए स्वर्ग में देवताओं की नींद भी उड़ गई होगी। ईश्वर की नींद उड़ाने की शक्ति चमचों और भक्तों में है।

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