" /> गौमूत्र, यज्ञ और गंगा का प्रवाह…और जर्मनी की चांसलर

गौमूत्र, यज्ञ और गंगा का प्रवाह…और जर्मनी की चांसलर

‘कोरोना संकट के कारण देश की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। हिंदुस्थान एक अंतरराष्ट्रीय दर्जे का ‘याचक’ देश बन गया है। अयोध्या में राममंदिर का भूमिपूजन हुआ परंतु ऑक्सीजन के अभाव में अयोध्या में हाहाकार मच गया है। इस पर भाजपा के एक मंत्री ‘यज्ञ करो, कोरोना नष्ट होगा’, ऐसा कहते हैं। ये हैरानीभरा है।

प्रधानमंत्री मोदी बीते करीब पांच वर्षों तक लोकप्रियता के चरम पर थे, परंतु बीते लगभग दो महीनों से चहुंओर से उनकी आलोचना होने लगी है। हमेशा अपने प्रति अच्छा ही सुनने की शासकों की आदत अच्छी नहीं होती है। इसलिए आलोचना हो रही है तो इसे अच्छे संकेत मानने चाहिए। आलोचना करनेवाले अधिकतर विरोधी पक्ष के लोग हैं। उसी तरह विदेशी मीडिया के लोग भी हैं। भाजपा में मोदी अथवा शाह के आलोचक बहुत ज्यादा नहीं बोलते हैं, परंतु उनके आलोचक नहीं हैं, ऐसा भी नहीं है। महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, लोकमान्य तिलक, सरदार पटेल, मोहम्मद अली जिन्ना, पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी की भी लगातार आलोचना होती रही। इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाकर अखबारों पर पाबंदी लगाई, फिर भी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करके लोग उनकी आलोचना करते रहे। अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी की क्या कम आलोचना हुई? आलोचना लोकतंत्र में महत्वपूर्ण तत्व है व जब तक आलोचना स्वीकार की जाती है, तब तक किसी भी देश में लोकतंत्र जीवित है, ऐसा समझना चाहिए।
आलोचना क्यों की जाए?
लोग केंद्र सरकार की आलोचना क्यों कर रहे हैं? कोरोना संकट में सरकार की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। वाराणसी में गंगा तट पर चिताएं जल रही हैं, परंतु लाशों को जलाने के लिए जगह ही शेष नहीं बची है इसलिए लोगों ने अपने परिजनों के शव गंगा में बहा दिए। गंगा के जल में फेंके गए सौ से अधिक शव पटना में गंगा के तट पर मिले। अयोध्या में प्रधानमंत्री की उपस्थिति में राम मंदिर का भूमिपूजन हुआ, परंतु पूरी अयोध्या नगरी में कोरोना से हाहाकार मचा है। अयोध्या में ऑक्सीजन के अभाव में लोगों का दम घुट रहा है, तड़प रहे हैं। लोगों के लिए अस्पताल नहीं हैं। दवाइयां नहीं हैं। वैक्सीन नहीं है। प्राणवायु नहीं है। सिर्फ श्रीराम का नारा है। उससे बहुत ज्यादा तो राजनीतिक पार्टियों को ऑक्सीजन मिलती रहेगी। उस ऑक्सीजन पर इसके आगे मनुष्य नहीं जिएगा। अयोध्या से वाराणसी तक, मक्का से मदीना तक सिर्फ हाहाकार मचा है। इसकी आलोचना नहीं की जाए तो क्या करें?
अंतरराष्ट्रीय याचक
कोरोना के कारण देश में अभूतपूर्व चिंता का माहौल तैयार हुआ ही है। ‘आत्मनिर्भर’ होने की दिशा में कदम पड़ने के दौरान हम एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय ‘याचक’ बन गए हैं। ऑक्सीजन के टैंकर विदेश से आ रहे हैं। अमेरिका जैसे देश हमें मदद के रूप में चंदा दे रहे हैं। उस विदेशी मदद का बंटवारा भी सही से नहीं हो रहा है। गांव-गांव में जनता बेहाल अवस्था में सड़कों पर प्राण त्याग रही है। इसके बावजूद क्या केंद्र सरकार को मजाक करना चाहिए? पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के ७७ विधायक निर्वाचित हुए। उन सभी को केंद्रीय सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। मतलब राजनीति का अंत ही नहीं। ममता बनर्जी कितनी निर्दयी हैं, वो भाजपा के नवनिर्वाचित विधायकों को मार ही डालेंगी इसलिए केंद्र ने सुरक्षा दी, ऐसा एक माहौल तैयार किया। पश्चिम बंगाल में भाजपा के सभी ७७ विधायकों को अब ‘एक्स’ दर्जे की सुरक्षा दी जाएगी। इन विधायकों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा दल एवं केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कमांडो २४ घंटे तैनात रहेंगे। असल में राज्य के विधायकों की रक्षा करना किसी भी राज्य की सरकार का ही काम होता है। प. बंगाल में मुख्यमंत्री को कम-से-कम यह मौका तो देना ही चाहिए था। परंतु उससे पहले ही भाजपा ने अपने विधायकों को केंद्रीय सुरक्षा बलों के कब्जे में दे दिया है। उन पर हमला होगा इस डर से विधायक भाजपा से टूटकर वापस ममता बनर्जी के पाले में शामिल हो जाएंगे, इस भय से उन पर केंद्रीय गृह विभाग ने अपना चौकी-पहरा बैठा दिया है, यही सत्य है। केंद्रीय सुरक्षा बल की फौजों से अधिक आज प. बंगाल को ऑक्सीजन एवं तेज टीकाकरण की सर्वाधिक जरूरत है।
जर्मन चांसलर
आज पूरे देश की स्थिति कैसी है? गोवा में २६ और आंध्र में ११ लोग सिर्फ ऑक्सीजन के अभाव में तड़पकर मर गए। उत्तर प्रदेश में कोरोना मृतकों के शव गंगा नदी में फेंके जा रहे हैं। वो बहते हुए बिहार पहुंच रहे हैं। गंगा में बहकर आए ७१ शवों की खबर ताजी ही थी, तभी बलिया और गाजीपुर जिलों में नदी में १०० लाशें बहकर आईं। मृतकों के नसीब में परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार भी शेष नहीं बचा है। यह दूसरी लहर का प्रकोप है, परंतु तीसरी लहर न आए इसके लिए मध्य प्रदश की भाजपाई मंत्री उषा ठाकुर ने यज्ञ करने व यज्ञ में हर एक को दो-दो आहुति देने का सुझाव दिया है। कोई शरीर पर गोबर मलकर स्नान कर रहा है। कोई गौमूत्र पीकर कोरोना से लड़ रहा है। थाली और ताली बजाकर कोरोना से लड़ो। ऐसा कहनेवाले प्रधानमंत्री देश में दूसरे क्या होंगे?
यज्ञ, गोबर से स्नान, गौमूत्र पीना, थाली बजाना यही हिंदुत्व और विज्ञान है, ऐसा समझनेवालों को जर्मनी की एक कहानी बताता हूं और विषय को समाप्त करता हूं। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में जर्मन चांसलर एंजेला मार्केल  ने चिकित्सा वैज्ञानिकों के आगे चलने से इनकार कर दिया। उस प्रसंग की एक तस्वीर आज दुनियाभर में प्रकाशित हुई है। उसमें चांसलर एंजेला मार्केल, डॉक्टर ऊगुर साहिन व उनकी पत्नी ओझलेम तुरेसी के पीछे चल रही हैं। इस जर्मन वैज्ञानिक दंपति ने जर्मनी में ‘कोविड-१९’ की वैक्सीन तैयार की है। इन वैज्ञानिकों के सम्मान के रूप में वे आदर सहित वैज्ञानिकों के पीछे चलती रहीं। राजनीतिज्ञ सत्ताधीश नहीं, बल्कि डॉक्टर्स और वैज्ञानिक वर्तमान समय में देश बचा रहे हैं। यह शिष्टाचार जर्मन चांसलर ने दिखा दिया।
जर्मन चांसलर एंजेला से पत्रकारों ने पूछा, आप आज शिष्टाचार क्यों तोड़ रही हैं? इस पर उन्होंने एक वाक्य में उत्तर दिया,‘Scholar should lead the nation’
हमारे राजनीतिज्ञों के दिमाग में यह कभी नहीं आएगा। इसलिए चिता जल रही है। कोरोनाग्रस्त लाशों का कोई मालिक ना होने के कारण गंगा के प्रवाह में शव बहकर आ रहे हैं और कोरोना का टीका बनानेवाले डॉक्टर अदर पूनावाला राजनीतिज्ञों के डर से फिलहाल देश छोड़कर चले गए हैं। इसलिए गोबर, गोमूत्र और यज्ञ से काम चलाना होगा क्या?