मुख्यपृष्ठसंपादकीयरोखठोकरोखठोक: हमारा देश ‘खुशहाल' क्यों नहीं है?

रोखठोक: हमारा देश ‘खुशहाल’ क्यों नहीं है?

संजय राऊत-कार्यकारी संपादक। खुशहाल देशों के मामले में हिंदुस्थान १३६वें क्रमांक पर है। पाकिस्तान, बांग्लादेश हमसे ज्यादा खुशहाल हैं। प्रधानमंत्री मोदी लगातार चुनाव जीतते हैं, उनकी पार्टी जीत का उत्सव मनाती है, परंतु फिर भी देश खुशहाल क्यों नहीं है? ‘फिनलैंड’ पहले स्थान पर खुशहाल सिद्ध हुआ है। उनके शासक जनता के प्रति ईमानदार रहते हैं, झूठ नहीं बोलते हैं। इसलिए राजा व प्रजा, दोनों खुशहाल हैं।

देश की महानता असल में किसमें होती है और देश की खुशहाली किसमें होती है, इस पर एक बार संसद में चर्चा होनी चाहिए। संसद में सभी चर्चाएं अब उबानेवाली होती हैं। संसद भवन में मोदी भक्तों की संख्या बढ़ गई है। उनमें से कई का विनोद एवं खुशमिजाजी से बैर होता है। इसलिए संसद में ‘खुशहाली’ खत्म हो गई है। चार राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी विजयी हुई। उसका आनंदोत्सव मनाया गया, परंतु दुनिया के खुशहाल देशों की सूची में हिंदुस्थान फिसलकर १३६वें स्थान पर आ गया। पाकिस्तान हमसे ऊपर यानी १२१वें स्थान पर है। भाजपा जीती मतलब देश जीत गया, मोदी जीते मतलब देश खुशहाल हो गया, देश यह स्वीकार करने को तैयार नहीं है। संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक ‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ में फिनलैंड नामक देश लगातार पांचवें वर्ष में सर्वाधिक खुशहाल देश साबित हुआ है। डेनमार्क, आइसलैंड, स्विट्जरलैंड और नीदरलैंड खुशहाल देशों की सूची में ‘टॉप ५’ में शामिल हैं। अमेरिका १६वें और ब्रिटेन १७वें स्थान पर है। हमारे देश में खुशहाली के नाम पर सिर्फ शोर है। दुनिया में सबसे ज्यादा खुश कौन है, इसकी खोज कोई भी नहीं कर सका है। दुनिया में कई अमीर देश हैं। वे खुशहाल देशों की सूची में नजर नहीं आते हैं। खुशहाल राजनीतिक दल और नेताओं की सूची बनाई जाती है, तो क्या उसमें भाजपा और उनके लोग भी शामिल होंगे? क्योंकि सिर्फ सत्ता और आकांक्षाओं के आधार पर ही सुख व आनंद की परिभाषा तय नहीं होती है।
सुखी इंसान कौन है?
दुनिया का सबसे सुखी इंसान कौन है? एक शिष्य ने गुरु से सवाल पूछा। गुरु ने कहा, ‘चिंतन करना होगा, शोध करना होगा, भटकना पड़ेगा। लोगों के मन में क्या है, ये समझना होगा। देखो, क्या आप इसे ढूंढ़ सकते हैं?’
शिष्य सुखी व्यक्ति की तलाश में निकल गया, लेकिन उसे दुखी और व्यथित लोग ही मिलते गए। सुख के मामले में वे एक-दूसरे पर उंगली उठाने लगे। हम सुखी हैं, लेकिन हमसे कोई और ज्यादा सुखी है (इसलिए हम दुखी हैं)। तब शिष्य उन सभी सुखी लोगों से मिलता रहा। उस खोज में उसके १२ साल बीत गए। किसी को जिसमें सुख मिलता, उसी में दूसरे को दुख मिलता। अंत में वह एक साधु की कुटिया में पहुंच गया। एक सुखी व्यक्ति ने उन्हें इस साधु के पास भेजा था।
साधु ने कहा, ‘देखो, दूसरों की तुलना में मैं सुखी हूं, लेकिन मुझसे ज्यादा एक सुखी इंसान है, वह सामने ऊंची पहाड़ी पर रहता है। मेरा अनुमान है कि वही दुनिया का सबसे सुखी इंसान होगा।’
ऊंचे पहाड़ पर पहुंचने के लिए शिष्य ने ऊबड़-खाबड़, कांटों से भरे कच्चे रास्ते को पार किया। एक महीने बाद वह ऊंचे पहाड़ पर पहुंच गया। एक साधु वहां पृष्ठभूमि में ध्यानस्थ बैठे थे। शिष्य उनके पीछे जाकर खड़ा था। पहाड़ चढ़ने के कारण उसकी सांस फूल रही थी। उसकी आहट महसूस होते ही साधु का ध्यान भंग हो गया। उन्होंने पूछा, ‘कौन है?’ शिष्य ने कहा, ‘ऐसा पता चला है कि आप संसार के सबसे सुखी इंसान हैं, इसलिए आपसे मिलने आया हूं।’ साधु घूमे और शिष्य चकित रह गया। वह उसी के गुरु थे। उन्हीं के सुझाव पर, वह एक सुखी आदमी की खोज में निकला था। उसने गुरु से पूछा, ‘यह क्या है? आपने मुझे उसी समय क्यों नहीं बताया? मुझे इतनी खोज नहीं करनी पड़ी होती। पदयात्रा नहीं करनी पड़ती।’
गुरुदेव मुस्कुराए और बोले, ‘हां, लेकिन आपको बोध भी नहीं हुआ होता। सुख तो है ही, लेकिन इंसान अलग-अलग ढंग से दुख का निर्माण कर लेता है। दूसरों का सुख देखकर दुखी होता है। एक खुशी की तुलना दूसरी खुशी से नहीं की जा सकती है। इसलिए जो सुखी है, वही सबसे सुखी है। अब बताओ, दुनिया का सबसे सुखी इंसान कौन है?’
शिष्य ने प्रफुल्लित होकर कहा, ‘मैं!’
फिनलैंड ऐसे सुखी और खुशहाल लोगों का ही देश होना चाहिए।
अच्छे दिन कहां गए?
हिंदुस्थान की जनता को ‘अच्छे दिन’ लाने का वचन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दिया था। ‘अच्छे दिन’ मतलब लोगों को खुश रखने का वादा। भाजपा और मोदी चुनाव दर चुनाव जीतते गए, लेकिन देश खुशहाल नहीं बना। चुनाव जीतने के लिए पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक किया, लेकिन खुशहाल देशों की सूची में पाकिस्तान हमसे ऊपर है। अयोध्या में राम मंदिर बन रहा है। उत्तर प्रदेश की जनता ने आपको वोट दिया, परंतु सबसे ज्यादा बेरोजगारी, गरीबी उसी राज्य में है। कोविड काल में तो गंगा में सिर्फ लाशें ही बह रही थीं, लेकिन अब योगी के चेहरे पर आनंद है, फिर भी उनका मन दुखी है। क्योंकि मंत्रिमंडल की सूची उनकी पसंद के हिसाब से नहीं बनी। तो राज्य खुशहाल कैसे बनेगा?
आनंद खत्म हो गया!
देश की राजनीति से आनंद खत्म हो गया है। प्रतिशोध और नफरत की धाराएं बह रही हैं। एक-दूसरे को खत्म कर देना है, इस खुशी में जीनेवालों के हाथ देश की सियासत के सूत्र हैं। उन्होंने लोगों को अंधभक्त और गुलाम बना दिया। नोटबंदी के काल में लोगों को बैंकों की कतार में खड़ा कर दिया। लोग नौकरी और राशन के लिए वर्षों से कतार में ही हैं। काम करवाने के लिए रिश्वत देनी ही पड़ती है। पंजाब और दिल्ली में ‘आप’ की सरकार आई। उन्होंने तय किया, अब इसके बाद लोगों को राशन के लिए लाइन में नहीं लगना पड़ेगा, लोगों को राशन घर बैठे मिलेगा। विरोधियों ने पैâसले की खिल्ली उड़ाई। ये वैâसे संभव है? इस पर अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘क्यों संभव नहीं है? घर बैठे पिज्जा मिलता है, तो गरीबों को राशन क्यों नहीं मिल सकता?’ यह आनंद ही है। ऐसी ढेर सारी खुशियों को हम खो चुके हैं।
दुखी देश…
अफगानिस्तान, लेबनान दुखी देश हैं। कल तक सुखी, खुशहाल रहा यूक्रेन, अब दुख में डूब गया है। सब लोग ‘फिनलैंड’ की तरह सुखी नहीं हो सकते हैं। फिनलैंड में पैदा होना जैकपॉट जीतने जैसा ही है, दुनिया के सबसे खुशहाल देश फिनलैंड में यह कहावत लोकप्रिय है। यह देश खुशहाल है, क्योंकि इस देश का नेतृत्व, राज व्यवस्था ही अलग है। शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सरकार का अधिकांश बजट खर्च होता है। देश सुरक्षित है। पुलिस व्यवस्था बेहतरीन, मानवाधिकारों पर विशेष ध्यान। गरीबी रेखा आदि है ही नहीं। आमदनी बढ़ानेवाली कई योजनाएं हैं। कोई भ्रष्टाचार नहीं है। इसके लिए सख्त कानून। ९९ फीसदी लोगों का मानसिक स्वास्थ्य बेहद संतुलित है। फिनलैंड में महिला द्वारा बच्चे को जन्म देते ही उसे सरकार द्वारा एक ‘न्यू बेबी बॉक्स’ तोहफे के रूप में दिया जाता है। इसमें बच्चे के एक वर्ष के होने तक के लिए लगनेवाले सभी जरूरी ६३ उत्पाद शामिल होते हैं। इस गिफ्ट बॉक्स के बारे में स्थानीय लोग कहते हैं कि आपको आपके बच्चे के लिए ‘डायपर’ के अलावा अगले पांच महीनों के लिए और कुछ भी खरीदने जरूरत नहीं पड़ती है। इस देश में १० महीने का ‘मातृत्व’ और ‘पितृत्व’ अवकाश है। बच्चे का जन्म होते ही माता-पिता को चार सप्ताह की छुट्टी मिल जाती है। बच्चा तीन साल का होने तक ‘माता-पिता’ अपनी नौकरी गंवाए बिना ‘स्टे होम’ योजना का लाभ उठा सकते हैं। यह सामाजिक सुरक्षा योजना का हिस्सा है। जो बेरोजगार हैं, उन्हें प्रतिमाह १,५०० डॉलर्स का भत्ता मिलता है। इसलिए फिनलैंड देश और उसके लोग हमेशा सुखी ही रहते हैं। इस देश की खुशी का राज उनके नेतृत्व की सच्चाई है। यहां पूरी आजादी है। राजनीतिक विरोधियों का पूरा सम्मान किया जाता है और शासक देश और जनता से झूठ नहीं बोलते हैं! इस वजह से पूरा देश तनाव मुक्त रहता है।
महानता किसमें है?
शासकों द्वारा प्रचार पर बेशुमार पैसा खर्च करने से लोग सुखी नहीं होते हैं। वैसे फिनलैंड की तरह ब्रिटेन भी एक खुशहाल देश है, लेकिन यह आनंद और बड़प्पन किसमें है? ब्रिटेन की महानता ताज पहननेवाली उनकी महारानी में नहीं है, राजकुमार चार्ल्स में नहीं है, उनके भव्य महल में नहीं है, बल्कि उसकी स्वतंत्र स्वाभिमानवाली संसद में है, बेहद प्यार से जतन किए गए लोकतंत्र और संविधान में है। दुनियाभर से साम्राज्य गंवाने के बाद भी ब्रिटेन सुखी है और यूक्रेन को तबाह करके भी पुतिन और उनका रूस दुखी है। चार राज्यों में जीत का परचम लहराने के बाद भाजपा के चेहरे पर खुशी नहीं है और जनता व देश सुखी नहीं है। चुनाव जीते गए, लेकिन देश ‘खुश’ नहीं रहा। देश जीतकर भी राजा प्रसन्न नहीं है।
फिर प्रजा कैसे खुश हो सकती है?

 

अन्य समाचार