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रोखठोक: एक्ट ऑफ गॉड!

कड़कनाथ मुंबैकर

‘मोरबी में झूला ब्रिज दुर्घटना में करीब १४० लोगों की जान गई। यह गैर इरादतन हत्या है; लेकिन इस पुल की मरम्मत के लिए जिम्मेदार ओरेवा कंपनी के मैनेजर ने यह दुर्घटना ‘एक्ट ऑफ गॉड’ है, ऐसा कहकर अपनी जवाबदेही ईश्वर पर मढ़ दी। ईश्वर किसी को भी नहीं बचाते हैं। भगवान की मूर्ति भी चोरी हो जाती है और श्रीराम के सामने सरयू नदी साधुओं के खून से लाल हो जाती है। दुनियाभर में सर्वाधिक लोग धर्म के राज में मारे जाते हैं। आज ईरान में क्या हो रहा है?
देश में भारतीय जनता पार्टी का राज आने के बाद से ही धर्म का राज आ गया और देश पर ईश्वर की कृपा हुई है, इस तरह का प्रचार किया जाता है। भाजपाई नेताओं की टोली प्रचार करती है, तो यह सही ही होगा; लेकिन दुनियाभर में देवताओं और धर्म के राज में फिलहाल मौत का तांडव चल रहा है, यह किस भगवान को रोकना चाहिए? गुजरात के ‘मोरबी’ पुल हादसे से देश का कलेजा फट गया है। मोरबी में १४३ साल पुराना ऐतिहासिक झूलता पुल अचानक टूट गया। इस दुर्घटना में मृतकों की संख्या १४० के आसपास है। पुल जब गिरा, उस समय प्रधानमंत्री मोदी गुजरात के केवड़िया में ही भाषण दे रहे थे और वे भी मोरबी की दुर्घटना से दुखी हुए। परंतु मोरबी के दुर्घटनाग्रस्त पुल की देखभाल करनेवाली ओरेवा कंपनी के प्रबंधक दीपक पारेख ने यह दुर्घटना ‘एक्ट ऑफ गॉड’ है, ऐसा झकझोरने वाला बयान दिया है। असल में जिम्मेदारी सही ढंग से निभाई नहीं गई, उचित सावधानी नहीं बरती गई, यह उक्त कंपनी और कंपनी के अधिकारी के तौर पर उस प्रबंधक का दोष है। हालांकि दुर्घटना में १४० मृतकों की जिम्मेदारी सीधे भगवान पर मढ़ वो मुक्त हो गया। ये महाशय फिलहाल हिरासत में हैं और न्यायालय के समक्ष उसने यह झकझोरने वाला दावा बेशर्मी के साथ किया। ‘एक्ट ऑफ गॉड’ का अर्थ है ईश्वर की करनी! असल में मोरबी में झूलते पुल का हादसा यह एक तरह से गैर इरादतन हत्या है। मृतकों में महिलाएं, बच्चे, युवा, वृद्ध हैं। यह दुर्घटना गैर-भाजपा शासित राज्यों में हुई होती तो केंद्र सरकार और पूरी भाजपा ने देशभर में माहौल को गरम कर दिया होता। उस राज्य के मुख्यमंत्री पर ही गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग हो गई होती और उस पुल के निर्माण और मरम्मत में कुछ घोटाला हुआ है क्या, यह देखने के लिए सीबीआई और ईडी की टीम पहुंच गई होती। लेकिन झूलते पुल के १४० मृतक गुजरात में ‘भगवान के बलि’ बन गए। Act of God!
धर्म के नाम पर
झूलता पुल हादसे में १४० लोग मारे गए। इससे दो दिन पहले दक्षिण कोरिया के सियोल में धार्मिक उत्सव ‘हैलोवीन’ के दौरान मची भगदड़ में १५० से ज्यादा लोगों की कुचले जाने से मौत हो गई। अपने पूर्वजों की, रिश्तेदारों की आत्माओं को बुलाकर उनके साथ संवाद साधने का यह ‘श्राद्ध’ जैसा कार्यक्रम होता है, लेकिन स्वर्ग से आत्माएं बड़ी संख्या में उस कार्यक्रम में आईं और उसमें मनुष्य प्राणी भगदड़ में मारे गए। न तो ईश्वर ने बचाया, न आत्माओं ने बचाव कार्य किया। वैसे वहां भी ‘एक्ट ऑफ गॉड’ ही घटित हुआ। कुछ साल पहले हिंदी फिल्म ‘ओ माय गॉड’ में ‘एक्ट ऑफ गॉड’ का मुद्दा आया था। इस फिल्म में भगवान की नई मूर्तियों को पुरानी बताकर ऊंचे दामों पर बेचनेवाले एक नास्तिक दुकानदार की कहानी थी। भूकंप में सिर्फ उसी की दुकान क्षतिग्रस्त होती है, वह बीमा कंपनी के पास क्षतिपूर्ति का दावा दायर करता है। परंतु ‘भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है’ अर्थात ‘एक्ट ऑफ गॉड’ है और ऐसी आपदा में कोई मुआवजा नहीं दिया जाता है, यह नियम बताकर बीमा कंपनी मुआवजा देने से इनकार कर देती है। आगे मामला न्यायालय में जाता है, यहां भी बहुत कुछ घटित होता है। धर्म के स्वयंभू ठेकेदारों के वास्तविक स्वरूप, मानवीय अंधविश्वास, स्वार्थ जैसे विषयों के बारे में दर्शकों को जागरूक करने का प्रयास इस फिल्म में किया गया था। वैसे भूकंप के ‘एक्ट ऑफ गॉड’ होने के कारण फिल्म में बीमा कंपनी मुआवजे के भुगतान की जिम्मेदारी से इनकार कर देती है और अब मोरबी स्थित पुल दुर्घटना, जिसमें हुई १४० लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण मौतें यह ‘एक्ट ऑफ मैन’ होते हुए भी उसे ‘एक्ट ऑफ गॉड’ ठहराने की साजिश दुर्घटना के लिए जिम्मेदार कंपनी का प्रबंधक कर रहा है। एक और ‘एक्ट ऑफ गॉड’ से लोगों का कलेजा फट गया। विठोबा के दर्शन की ललक के साथ कार्तिकी यात्रा के लिए कोल्हापुर से पंढरपुर की तरफ पैदल जा रही दिंडी में सांगोला तालुका में एक कार घुस गई और सात वारकरियों की मौत हो गई, इसके जैसा दु:ख नहीं है। भक्त दर्शन के लिए निकले और भगवान के द्वार पर पहुंचने से पहले हमेशा के लिए भगवान के घर चले गए। मुख्यमंत्री ने शोक व्यक्त करते हुए हर मृतक के परिजनों को पांच लाख रुपए देने की घोषणा कर दी। उनका कर्तव्य समाप्त हो गया! ऐसी ‘एक्ट ऑफ गॉड’ की कहानियां साल दर साल से चल रही हैं। जिस अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन अब हो रहा है और जो श्रीराम हमारी अस्मिता का प्रतीक बनें, उस राम के मंदिर के निर्माण के लिए जोरदार युद्ध ही हुआ। अयोध्या में सरयू नदी संतों के खून से लाल हो गई। पुलिस की फायरिंग में साधु-संतों के शवों के ढेर लग गए। इनमें से कई लाशें सरयू की धारा में बहा दी गईं। ‘एक्ट ऑफ गॉड’ का इससे भयंकर और कोई उदाहरण नहीं होगा!
ईश्वर का अवतार
मोरबी के हादसे से, इसके क्रंदन से कई सवाल खड़े हुए। सब कुछ भगवान पर ही छोड़ना होगा, तो राजा सत्ता के सिंहासन पर क्यों बैठते हैं? ‘राजा कालस्य कारणम्’ का अर्थ क्या है? घटित होनेवाली सभी घटनाओं के लिए राजा जिम्मेदार है। हाल के दिनों में बार-बार कहा जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी ये सुपरमैन अथवा महाबली हैं। मोरबी का ‘एक्ट ऑफ गॉड’ होने से ठीक २४ घंटे पहले उत्तर प्रदेश की शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने घोषणा की थी, ‘प्रधानमंत्री मोदी भगवान के अवतार हैं। उन्होंने मन में ठान लिया तो वे हमेशा के लिए प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं। पूरा हिंदुस्थान उनकी बात सुनता है।’ मोदी को ईश्वर का अवतार माना जाए, तो मोरबी के ‘एक्ट ऑफ गॉड’ की जवाबदारी उनकी है, ये भाजपा को स्वीकार लेना चाहिए, लेकिन वैसा नहीं है। श्री मोदी भी एक मनुष्य ही हैं और आम मनुष्य की तरह ही मोरबी के ‘एक्ट ऑफ गॉड’ के चलते उनकी आंखें भर आईं, मन रोने लगा। अक्सर कई प्रसंगों पर मोदी फफक पड़ते हैं और वे रोने लगते हैं। यह मोदी भक्तों को समझ लेना चाहिए। लोगों की उन पर आस्था है। अंधविश्वास भी होगा, लेकिन वे भगवान नहीं हैं। जालना के जांब स्थित मंदिर से समर्थ रामदास की मूर्ति, प्रत्यक्ष देवताओं की प्राचीन मूर्तियां मंदिरों से चोरी हो गईं। इसे चुराने वाले चोरों का भगवान ने प्रतिकार भी नहीं किया। हर तरफ चोरी, लूटपाट और झूठ का बोलबाला है। भगवान के नाम पर शपथ ली जाती है और स्वार्थ के लिए उसे तोड़ दिया जाता है। शिंदे के साथ जो चालीस विधायक गए, उन्होंने भगवान पर हाथ रखकर निष्ठा की शपथ ली थी, लेकिन बाद में उन्होंने भगवान को ही बदल दिया! गोवा विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सभी उम्मीदवारों ने मंदिर और चर्च में एक साथ प्रार्थना कर कांग्रेस के प्रति निष्ठावान बने रहने की शपथ ली थी, लेकिन शपथ लेनेवाले दिगंबर कामत के नेतृत्व में वे सभी विधायक फूट गए। क्या यह भगवान के साथ बेईमानी नहीं है? उस पर दिगंबर कामत ने कहा, ‘कांग्रेस नहीं छोड़ूंगा ऐसी शपथ मैंने ली थी, लेकिन मैं फिर से भगवान के पास गया और ‘अब परिस्थिति बदल गई है, ऐसे में क्या करूं?’, ऐसा मैंने भगवान से पूछा, इस पर भगवान ने मुझसे कहा कि ‘खुद फैसला कर। मैं तेरे साथ खड़ा हूं।’ इसलिए मैंने भगवान की सलाह पर ही भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया है। अर्थात हमारे भगवान राजनीतिक सलाह भी देते हैं, दल-बदल कराते हैं। यह भी एक अलग तरह का ‘एक्ट ऑफ गॉड’ है!
अमीरों के लड्डू
लालबाग का राजा के दरबार से सोने का मोदक नीलाम हुआ और एक श्रद्धालु ने इस बार उक्त मोदक को ६० लाख रुपए में खरीदा। हैदराबाद में बालापुर गणपति को भोग स्वरूप चढ़ाया गया २१ किलो का लड्डू करीब २५ लाख रुपए में नीलाम किया गया। स्थानीय व्यवसायी वी. लक्ष्मी रेड्डी ने श्रद्धा के साथ इस लड्डू को खरीदा। यह लड्डू लेनेवाले को स्वास्थ्य, सुख और धन की प्राप्ति होती है, ऐसा स्थानीय लोगों का विश्वास है। इस लड्डू का तेज और शक्ति मोरबी के झूलते पुल तक पहुंचनी चाहिए थी। कई बच्चे, माएं, भाई, बहनों के प्राण ‘एक्ट ऑफ गॉड’ से बच जाते, लेकिन वे अमीर नहीं थे। वे लड्डू नहीं खरीद सके!
यीशु क्या कहते हैं?
लोगों ने जीसस क्राइस्ट से पूछा, ‘आपके साथ स्वर्ग प्राप्ति का सुख किसे मिलनेवाला है?’ तब जीसस क्राइस्ट ने कहा, ‘पूरा जीवन बिताने के बाद क्रोध, मोह, लोभ, काम इन सीढ़ियों पर चढ़-उतरकर जिनकी वृत्ति किसी बालक की तरह शांत हो गई है, ऐसे वृद्धों को मिलेगा।’
आपके पास ऐसा कोई दिख रहा है क्या? मोदी के कारण सत्ता मिलती है, इसलिए उनके भक्त उन्हें आज देवता मानते हैं। यह स्वार्थ है। कारण खुद मोदी एक इंसान हैं। उनमें क्रोध, लोभ, ईर्ष्या, द्वेष सब है। ये सब देवताओं के पास भी था। ईरान यह धर्म का राज है, लेकिन ‘हिजाब’ को  लेकर वहां जंग छिड़ी है और हिजाब का विरोध करनेवाली लड़कियों को धर्मराज वाले गोली मारकर मौत के घाट उतार रहे हैं। यह एक अलग तरह का ‘एक्ट ऑफ गॉड’ दिख रहा है। अंतत: सच्चाई यही है कि इंसानी समस्याओं का समाधान इंसानों को ही करना होता है। कई बार जब महान-महान नेताओं का भी ‘हैम्लेट’ होता है अथवा उनके आस-पास के लोग श्रद्धा का दिखावा करके उनका ‘हैम्लेट’ करते हैं, तो विश्वासघात के भूत विश्वास से घूमने लगते हैं और एक बड़ी त्रासदी जन्म लेती है। त्रासदी दुनिया में हर जगह पैदा हुई है। हर धर्म, जाति में यह त्रासदी आज देखने को मिल रही है। पहले नेताओं का ‘हैम्लेट’ हुआ करता था। अब नेता देवताओं का भी ‘हैम्लेट’ करने की कोशिश कर रहे हैं। ‘एक्ट ऑफ गॉड’ उसी  ‘हैम्लेट’ का रूप है! गुजरात के मोरबी में वह दिखा। ईश्वर का अवतार ठहराए गए श्री मोदी भी क्या करेंगे?
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर कहते हैं कि ‘इस देश में पत्थर पर सिंदूर लगाना आसान है, लेकिन फिर उसे कुरेद कर निकालना मुश्किल है।’ ऐसे सभी ‘एक्ट ऑफ गॉड’ वालों के लिए संत गाडगे महाराज ने कहा है, मराठी भाषा में लिखित उक्त पंक्तियां प्रस्तुत करता हूं और विषय को विराम देता हूं-

।। म्हसोबा ।।
शेंदूर माखोनिया धोंडा
पाया पडती पोरे रांडा।
देव दगडाचा केला
गवंडी त्याचा बाप झाला
देव सोन्याचा घडविला
सोनार त्याचा बाप झाला
सोडोनिया खर्या देवा
करी म्हसोबाची सेवा!
– गाडगे महाराज

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