मुख्यपृष्ठनए समाचाररोखठोक : अमित भाई, आप बोलते रहो! मराठा अवश्य उठेगा!

रोखठोक : अमित भाई, आप बोलते रहो! मराठा अवश्य उठेगा!

  • कड़कनाथ मुंबैकर

‘शिवसेना को गाड़ने की और उद्धव ठाकरे को सबक सिखाने की बात केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कही। अब मुंबई पर कब्जा हासिल करना ही है। अभी नहीं तो कभी नहीं। ऐसा भी उन्होंने कहा। शिवसेना को तोड़ा किसलिए? इसके जरिए वह जहर बाहर निकल आया। भाजपा में कोई चिंतामणराव देशमुख नहीं पैदा होगा, लेकिन शिंदे गुट ने तो सुन्नत ही करवा लिया! परंतु श्री शाह को इसी तरह से बोलते रहना चाहिए। मराठा अवश्य उठेंगे!
हमारे सार्वजनिक जीवन में सच्चाई के नाम पर भी भ्रष्टाचार चलता है। वर्तमान में शिवसेना और ठाकरे परिवार को बदनाम करने की होड़ मची है। उद्धव ठाकरे और शिवसेना के खिलाफ कोई भी माल खपाने का ये धंधा शुरू हो गया है और इसकी एजेंसी भाजपाई नेता बांट रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह गणपति दर्शन के लिए मुंबई में आए और उन्होंने शिवसेना के प्रति द्वेष का प्रदर्शन किया। जिसे संपूर्ण महाराष्ट्र ने देखा। मुंबई में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के समक्ष उन्होंने बंद कमरे में भाषण दिया, जो कि सार्वजनिक हो गया। जहर में उबाल आ जाए ऐसा उनका बयान है। मुख्यत: उनका भाषण यह कृतघ्नता की पराकाष्ठा है। उन्होंने अपने भाषण में कहा, शिवसेना को गाड़ कर मुंबई पर कब्जा पाने का यही मौका है। उनका कहना है कि ‘उद्धव ठाकरे ने भाजपा को धोखा दिया और उसकी सजा उन्हें मिलनी चाहिए। भाजपा शिंदे गुट के साथ है और रहेगी। उद्धव ठाकरे को अब समाप्त करना ही चाहिए।’ श्री अमित शाह को उनकी राजनीति करने का पूरा अधिकार है। लोकतंत्र ने यह अधिकार सभी को दिया है, लेकिन भाजपा और उनके नेता लोकतंत्र की राह पर चल रहे हैं क्या? यह सवाल है। लोकतंत्र के चारों स्तंभों को अस्थिर करके देश का नियंत्रण कुछ लोगों ने हाथ में ले लिया है। उन्होंने एक ओर ‘मिशन मुंबई’ तो दूसरी ओर ‘मिशन बारामाती’ की ताल ठोंकी है। महाराष्ट्र का नेतृत्व पूरी तरह खत्म करना और फरेबियों के हाथ में इस राज्य को सौंप देने, मुंबई को आसानी से निगलने का ये षड्यंत्र रचा गया है। अमित शाह ने यह स्पष्ट रूप से कहकर दर्शा दिया है!
यह है मिशन!
अमित शाह और भाजपा का ‘मिशन मुंबई’ क्या है, इसका भयानक चेहरा खुलकर सामने आ गया। अमित शाह और उनके लोगों को इस तरह के भाषण बार-बार देते रहना चाहिए। इसी से जनता के मन में विद्रोह निर्माण होगा। शिंदे गुट के कंधे पर बंदूक रखकर और राज ठाकरे का दुलार करके उन्होंने मुंबई पर नियंत्रण हासिल करने का निर्णय लिया है। वर्ष २०१४ में दो सीटों को लेकर भाजपा के साथ की युति शिवसेना ने तोड़ दी, ऐसा आरोप शाह लगाते हैं। फिर २५ सालों की दोस्ती को बचाए रखने के लिए भाजपा दो कदम (सीट) पीछे क्यों नहीं हटी? ठीक है, आगे शिवसेना के साथ ही सरकार बनी। शिवसेना लोकसभा में साथ आए इसके लिए अमित शाह ‘मातोश्री’ पर आए थे और उनके सामने सत्ता का एक समान बंटवारा होने की घोषणा देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया के समक्ष की थी। उसी समय अमित शाह ने श्री फडणवीस को रोका होता तो अच्छा ही हुआ होता। मतलब धोखा किसने किसे दिया आज इस पर सच-झूठ प्रमाणित करने की नौबत ही नहीं आई होती।
लाचारों की मानसिकता!
अब इस प्रकरण में लाचार शिंदे गुट की मानसिकता समझने की जरूरत है। २०१४ के बाद श्री अमित शाह ने शिवसेना और ठाकरे पर कई तीखे हमले किए। ‘शिवसेना को पटक देंगे’ ऐसी बातें कहीं, लेकिन एकनाथ शिंदे ने उन बयानों पर साधारण निषेध भी व्यक्त नहीं किया। शिवसेना के कई नेता और प्रवक्ता ‘पटक देंगे’ पर टूट पड़े थे, उस समय श्री शिंदे का स्वाभिमान, अभिमान, हिंदुत्व बर्फ के गोले की तरह पिघल गया। उस समय भी अमित शाह, शिवसेना को गाड़ने के लिए निकले थे और आज भी उनका वही सपना है। दोनों बार शिंदे, अमित भाई के गुर्गे के रूप में ही काम कर रहे थे और खुद की चमड़ी बचा रहे थे, ऐसा ही प्रतीत होता है। अब तो वे खुद खुलेआम ‘पटक देंगे’ नीति के पैरोकार हैं। क्योंकि अन्यथा भाजपा उन्हें ‘ईडी’ नामक हाथी की सूंड़ में लपेटकर पटक देगी! अमित शाह, शिवसेना को जमीन में गाड़ने की बात कहते हैं और शिंदे और उनके ‘स्वाभिमानी’ लोग तालियां बजाते हैं। महाराष्ट्र पर मुगलों ने जब चढ़ाई की थी, उस समय यहां के कुछ लोग शिवराय का साथ देने की बजाय मुगलों को रसद की आपूर्ति कर रहे थे। शिंदे गुट के रूप में वही अब हो रहा है, ऐसा दिख रहा है।
शिवसेना का वंश
शिंदे गुट की मदद से मुंबई जीतेंगे, मुंबई पर से महाराष्ट्र और मराठी अस्मिता की छाप नष्ट कर देंगे, इसी मिशन के लिए अमित शाह मुंबई आए। शिवसेना के कुछ लोगों को उन्होंने खरीद लिया, लेकिन जनमत कैसे खरीदेंगे? शिंदे के लोग भी बालासाहेब को मानते हैं। संसार में कोई अमर नहीं। कल ‘ऊपर’ जाने पर बालासाहेब से क्या कहेंगे? मुंबई का सौदा करके भाजपा के ‘मिशन मुंबई’ के लिए रसद की आपूर्ति कर हमने बड़ी मर्दानगी दिखाई, ऐसा कहोगे क्या? अमित शाह के बयान पूरे महाराष्ट्र को गंभीरता से लेने की जरूरत है। मुंबई के खिलाफ एक बड़ी साजिश होने की वजह से शिंदे गुट पर फूल बरसाए जा रहे हैं। यह महाराष्ट्र के साथ खतरा है। किसी समय रजनी पटेल ने भी शिवसेना को गाड़ने का बीड़ा उठाया ही था, लेकिन उसके बाद शिवसेना कई योजनाओं से आगे बढ़ी, यह इतिहास है। शिवसेना को खत्म कर देंगे ऐसी बातें करने वाले पटेल की ‘अर्थी’ ही सजाएंगे, ऐसा आह्वान उस समय बालासाहेब ठाकरे ने दिया। उसी शिवसेना का वंश आज सभी जगह है। शिंदे गुट होने का दावा करने वाले इस सार को क्या समझेंगे? अमित शाह के इस महाराष्ट्र द्रोही वक्तव्य पर शिंदे गुट में बगावत होनी चाहिए, लेकिन लाचार और बेईमानों से स्वाभिमान की अपेक्षा कैसे करें?
सत्ता के समान बंटवारे का क्या?
श्री अमित शाह कहते हैं, महाराष्ट्र में शिवसेना को मुख्यमंत्री पद देने का वचन नहीं दिया था। यह खुलासा उन्होंने ढाई साल के बाद किया, लेकिन समान सत्ता का बंटवारा तय हुआ ही था। वह वचन किसने तोड़ा? अर्थात हाथ में ईडी, सीबीआई और अन्य एजेंसियां हैं इसलिए सत्य बोलने वालों के मामले में ‘पटक देंगे’ की भाषा सहजता से इस्तेमाल की जाती है। ‘शिंदे गुट मतलब शिवसेना’ यह कहने तक दुस्साहस किया जा रहा है, लेकिन नियति हर रोज नए-नए दांव खेलती रहती है और राजनीति का चक्र नीचे-ऊपर होता ही रहता है। आज फिर से महाराष्ट्र की राजनीति ऐसी सीमा पर खड़ी है कि इस राज्य की राजनीति की वजह से देश की राजनीति बदल सकेगी। शिंदे गुट साबुन की झाग है। अंतत: जहां ठाकरे, वहां शिवसेना लोग यही स्वीकार करेंगे। आज सत्ता पद, मुख्यमंत्री का पद है इसलिए चींटियां और मक्खियां गुड़ के चारों ओर हैं। महाराष्ट्र के स्वाभिमान का, दिल्ली के आक्रमण के खिलाफ एक साथ आकर लड़ने का ‘मिशन’ रखें तो महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा में बड़ा चमत्कार होगा। नीतिश कुमार और यादव उत्तर की राजनीति को सफल करें, महाराष्ट्र में ठाकरे-पवार ध्यान दें। वे सफल हुए तो बहुत कुछ हासिल होगा। भाजपा का ‘मिशन बारामती’ का प्रयोग कई वर्षों से चल ही रहा है। ठाकरे-पवार का नेतृत्व न रहे इसीलिए यह संघर्ष शुरू है। यह कृतघ्नता ही है।
महाराष्ट्र के प्रति द्वेष
अमित शाह बार-बार शिवसेना के संदर्भ में इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। यह उनके मन में महाराष्ट्र के प्रति द्वेष है। वास्तव में तो उन्हें महाराष्ट्र और मराठी लोगों के प्रति सदैव कृतज्ञ रहना चाहिए। केंद्र की ‘यूपीए’ सरकार के मोदी और अमित शाह के पीछे हाथ धोकर पड़े होने के दौरान मोदी और पवार के बीच सुसंवाद के चलते ही अमित शाह को गोधरा हत्याकांड के एक मामले में जमानत पर रिहा होने में मदद मिली थी। यह कोई सनसनीखेज खुलासा नहीं, बल्कि सत्य है। एक और मामले में हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे ने ‘सरकार’ शैली में भूमिका निभा कर उस समय अमित शाह को मदद मिले, ऐसीr व्यवस्था की थी। इन दोनों प्रसंगों पर अलग से लेख केवल संजय राऊत ही लिख सकेंगे। शरद पवार और उद्धव ठाकरे बोल सकेंगे , लेकिन उन्हीं ठाकरे-पवारों के खिलाफ मिशन की पराकाष्ठा आज अमित शाह और उनके लोग कर रहे हैं। राजनीति और लोकतंत्र में मतभेद का स्थान है। चुनाव के जरिए परास्त करना और ऐसा कहना गलत नहीं है, लेकिन शिवसेना में फूट से भाजपा में आनंद हिलोरें मार रहा है। शिंदे गुट को गैरकानूनी ढंग से सिंहासन पर बैठाकर उन्होंने लक्ष्य हासिल किया है। उनकी हंसी भयंकर है। उद्धव ठाकरे और शिवसेना को गाड़ने की बात महाराष्ट्र विरोधी है। बालासाहेब ठाकरे और उनके विचारों से बेईमानी है। अमित शाह, मुंबई में आकर ऐसा जहर बोते हैं और भाजपा में मराठा इस पर तालियां बजाते हैं। भाजपा में कोई चिंतामणराव देशमुख निर्माण होने की संभावना नहीं है। परंतु अमित शाह ने शिवसेना को गाड़ने और ठाकरे को सबक सिखाने की बात लगातार करते रहना चाहिए।
इससे ही नए जोश वाले वीर, योद्धा तैयार होंगे।
खुद को शिंदे गुट कहनेवालों ने तो स्वाभिमान का सुन्नत करा लिया है! वे नींद में हैं।
लेकिन ‘मराठा’ जरूर उठेगा!

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