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रोखठोख : एथेंस नगरी, चौपट दिल्ली!

  • कड़कनाथ मुंबैकर

‘प्रधानमंत्री मोदी से लोगों को आज भी उम्मीदें हैं, लेकिन असमंजस यह है कि असली मोदी कौन है? लाल किले से भ्रष्टाचार को पूरी तरह से खत्म करने का एलान करनेवाले मोदी असली हैं या कल तक जिनके खिलाफ ‘ईडी’ की कार्रवाई का भय था और उस भय के कारण भूमिगत हुईं सांसद भावनाताई से राखी बंधवाने वाले मोदी असली हैं? भाजपा को इस पर प्रकाश डालना चाहिए।
देश की सियासत में इस समय मजाक-मस्ती चल रही है। अपनी-अपनी डफली, अपना-अपना राग वाली कहावत निरर्थक लगे, ऐसा प्रतिदिन कुछ-न-कुछ घट रहा है। रक्षाबंधन के दूसरे दिन अखबारों में छपी एक तस्वीर से सभी की भौंहें चढ़ गईं। शिवसेना की बागी सांसद भावना गवली ने हमारे प्रधानमंत्री मोदी को दिल्ली स्थित उनके निवास स्थान पर जाकर स्नेह पूर्वक राखी बांधी। भावना गवली बेहद गदगद हो गईं  हैं और प्रधानमंत्री मोदी नई बहन के प्रेम में भावविभोर हो गए, ऐसी वह मनमोहक तस्वीर! भावना गवली जब प्रधानमंत्री के आवास पर पहुंचीं, उस समय बंधुराज श्री मोदी ने मुस्कुराते हुए उनका स्वागत किया। ‘आओ-आओ, भावनाताई’, ऐसा उन्होंने कहा। श्रीमती गवली कई वर्षों से सांसद हैं। बीते तीन वर्षों से ‘ईडी’ ने उन्हें प्रताड़ित कर रखा था। उनके आवास और दफ्तरों पर ईडी का छापा पड़ा। ईडी उनके शैक्षणिक संस्थानों में हुए आर्थिक व्यवहार के पीछे पड़ गई। भ्रष्टाचार के मामलों की खोज में ‘महात्मा’ किरीट सोमैया, गवली ताई के निर्वाचन क्षेत्र वाशिम पहुंच गए। भावनाताई के लोगों ने हमला किया। फिर भी सोमैया नहीं डगमगाए। उन्होंने वाशिम की भूमि पर एलान किया कि ‘भावना गवली को भ्रष्टाचार का हिसाब देना ही होगा। भावनाताई जेल में जाएंगी ही?’ आगे क्या हुआ? भावना गवली को ईडी के समन के बाद समन्स मिलते रहे। भावना गवली अपने निर्वाचन क्षेत्र से भूमिगत हो गईं । ईडी को भी उनकी कोई खोज-खबर नहीं मिल रही थी, लेकिन गवली ताई के कुछ खास लोगों को गिरफ्तार करके ईडी ने भ्रष्टाचार पर प्रहार किया। आगे क्या हुआ? तो भावना गवली ने सीधे शिवसेना छोड़ दी और शिंदे गुट की नाव में सवार हो गर्इं। दिल्ली में समुद्र नहीं होने के बाद भी उनकी नाव किनारे पर पहुंच गई। रक्षाबंधन के दिन तो भावनाताई सीधे प्रधानमंत्री के निवास स्थान पर पहुंच गईं। हमारे प्रधानमंत्री ने उनका स्वागत किया। ‘आओ ताई बैठो! यहां तक पहुंचने में किसी तरह की समस्या तो नहीं हुई न?’
भावना गवली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राखी बांधी इस पर कोई आपत्ति जताई जाए ऐसा कुछ भी नहीं है। श्री मोदी ने इस पवित्र दिन पर कई स्कूली छात्राओं से प्रेमभाव से राखी बंधवाई। पंडित नेहरू भी ऐसे ही रक्षाबंधन मनाते थे। प्रधानमंत्री देश की बहनों के रक्षक ही होते हैं, लेकिन भावना गवली जब संकट में थीं, उस समय भाजपा का एक भी ‘भाई’ उनकी मदद के लिए नहीं दौड़ा। मतलब या तो भावना गवली और उनके लोगों को झूठे मामलों में फंसाया गया व अब ‘वॉशिंग मशीन’ में जाते ही उनके सारे मामले साफ हो गए और उन्हें प्रधानमंत्री से मुलाकात करने का लाभ मिला! ये आश्चर्यजनक है।
अब भावनाताई एकदम मस्त हैं। भावनाताई द्वारा श्री मोदी को राखी बांधते हुए फोटो को किरीट सोमैया ने लॉकेट बनाकर अपने गले में ही बांध लिया है। उन्होंने यशवंत जाधव, प्रताप सरनाईक, राहुल शेवाले की तस्वीर वाले लॉकेट बनाने के लिए सुनार को दिए हैं। सवाल इतना ही है कि वास्तव में कौन से मोदी असली हैं? भ्रष्टाचार सहन नहीं करूंगा, ऐसा देश के लाल किले से वचन देनेवाले मोदी असली हैं अथवा भावनाताई से आदरपूर्वक राखी बंधवाकर ‘रक्षा’ की गारंटी देनेवाले मोदी असली हैं? भाजपा वालों, कुछ तो गड़बड़ है!
फौजें कैसे चलती हैं?
नेपोलियन कहा करता था, सेना पेट पर चलती है। अब विधायक-सांसदों की फौजें खोखों पर चलती हैं। महाराष्ट्र की विधानसभा में खोखेवाले विधायकों के नाम से नया शोर शुरू हुआ है। उस समय उन बेशर्म लोगों का सिर क्षणभर के लिए नीचे ही झुका होगा! राजनीति में सज्जन किसे कहें, यह सवाल ही है। धर्मराज को महाभारत काल में भी एक सज्जन व्यक्ति को खोज कर लाने के लिए कहा गया था। दिन भर भटकने के बाद भी धर्मराज को कोई सज्जन नहीं मिल सका। ईसा पूर्व चौथी शताब्दी में डायोजिनीस नामक एक ग्रीक दार्शनिक हुआ करता था। एक बार भरी दोपहरी में वह कड़ी धूप में हाथ में दीपक लेकर सड़क पर आने-जाने वालों का चेहरा ध्यान से देखने लगा। वृद्ध डायोजिनीस अपने पागलपन के लिए एथेंस शहर में प्रसिद्ध था। इसलिए दोपहर की गर्मी में दीपक के प्रकाश में मार्ग से गुजरने वाले हर व्यक्ति का चेहरा निहारते डायोजिनीस को देख कर एथेंस के नागरिकों को हैरानी नहीं हुई। लेकिन हर व्यक्ति का चेहरा देखने के बाद वह गर्दन हिलाकर निराशा का प्रदर्शन कर रहा है, ये देखकर कई लोगों ने उससे उत्सुकता के साथ पूछा, ‘आप भरी दोपहरी में ऐसे क्या ढूंढ़ रहे हैं? आपका कुछ खो गया है क्या?
‘हां बाबा। एथेंस में एक भी ईमानदार व्यक्ति रहता है क्या? यह मैं कब से खोज रहा हूं, लेकिन एक भी ईमानदार व्यक्ति मुझे नहीं दिखा। आपने भी कोई देखा है क्या?’ इस पर एथेंस के नागरिक कोई भी जवाब दिए बिना ही सिर झुकाए चले जाते थे।
हिंदुस्थान की वर्तमान अवस्था एथेंस के नागरिकों जैसी ही नहीं लग रही क्या?
दागी कौन?
बिहार में नीतीश कुमार ने भाजपा को दूर करके राष्ट्रीय जनता दल के साथ सरकार बना ली। इसी के साथ ही भाजपा में सत्य और ईमानदारी का अंश जाग गया तथा नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में कैसे अपराधी स्वरूप के लोग हैं, इस पर वे रोशनी डालने लगे। भारतीय जनता पार्टी के १५२ सांसद इस या उस अपराध के कारण ‘दागी’ हैं, वे यह भूल गए। बिहार के कानून मंत्री पर ‘वारंट’ है, इस पर पटका-पटकी चल रही है। इस कानून मंत्री ने पलटी मारकर भाजपा की कलाई में राखी बांधी, तो उस ‘वारंट’ के कागज का रूपांतरण गुलाबी प्रेमपत्र में हो जाएगा। भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष श्री चंद्रशेखर बावनकुले बेहद नेक गृहस्थ हैं। उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया, लेकिन अब महाराष्ट्र का अध्यक्ष बना दिया गया। हालांकि साल २०१९ के विधानसभा चुनाव में बावनकुले के ऊर्जा मंत्री होने के बावजूद भी उनका टिकट काट दिया गया था! इस पर कोई प्रकाश डालेगा क्या? आज के कुशल, मेहनती, निष्ठावान बावनकुले को उस समय आनन-फानन में दूर क्यों पेंâक दिया गया था, यह भी भावनाताई के रक्षाबंधन की तरह एक बड़ा गूढ़ है। ऐसे कई जादू और रक्षाबंधन के निकट भविष्य में होते रहेंगे, लेकिन आम जनता के मन में सवाल बरकरार रहेंगे। कौन से मोदी असली हैं? लाल किले पर तिरंगा साफा बांधकर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देनेवाले अथवा ‘आओ भावनाताई’ ऐसे बंधुप्रेम से बुलाने वाले? प्रधानमंत्री मोदी से कोई तो छल कर रहा है।
करेक्ट कार्यक्रम
महाराष्ट्र में खोखेबाज विधायकों का भविष्य न्यायालय के हाथ में है। सच कहें तो महाराष्ट्र की अवैध सरकार और दलबदलू विधायकों पर तत्काल फैसला अपेक्षित था और फैसला  आते ही लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी को दलबदलुओं के राजनीतिक भ्रष्टाचार पर प्रहार करना चाहिए था। लेकिन वैसा होता दिख नहीं रहा है। भारतीय राजनीति और सामाजिक जीवन में स्वच्छ राजनीतिज्ञ के तौर पर, एक श्रेष्ठ पुरुष की हैसियत से मोदी की छवि इतिहास में बनी रहे, ऐसा लगता है। लेकिन राजनीतिक विरोधियों पर केंद्रीय जांच एजेंसियों का झाड़ू और भावनाताई, यशवंत दादा के मुंह में शुद्ध देशी घी का लड्डू, ऐसा कुल मिलाकर करेक्ट कार्यक्रम चल रहा है। बिहार सरकार को घेरने की रणनीति भी स्पष्ट दिख रही है।
वहां की ताई-भाऊ दिल्ली के तट पर कब पहुंचते हैं, ये देखेंगे।
ईमानदारी की लहर इस देश में कभी भी नहीं आई थी, लेकिन तूफान में आशाओं के कुछ दीपक टिमटिमा रहे थे।
वे भी अब बुझते दिख रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी से वर्ष २०१४ से अपेक्षाएं थीं। आज भी उम्मीदों का कमल मुरझाया नहीं है, यह कर्म से दिखने दो।

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