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रोखठोख : विधायक-सांसदों में मनी लॉन्ड्रिंग का खौफ,हिंदुत्व बेवजह बदनाम हो रहा है!

संजय राऊत – कार्यकारी संपादक 

मनी लॉन्ड्रिंग कानून के विरोध की कोई वजह नहीं है। मुख्य रूप से यह कानून ड्रग्स, हवाला, स्मगलिंग से होनेवाले आर्थिक लेन-देन पर पाबंदी लगाने के लिए है। परंतु इसका खौफ विरोधी व विधायक-सांसदों में ही अधिक है। लेकिन इसकी वजह से महाराष्ट्र में हिंदुत्व बेवजह बदनाम हो रहा है!
हिंदुस्थान के समक्ष खड़ी सबसे बड़ी समस्या कौन-सी है? इस सवाल के लिए मेरा जवाब जनसंख्या एवं भ्रष्टाचार है। उसमें सत्ताधारियों का सिंहासन अस्थिर होगा तो और दो बातें होती हैं। हमें मिली सत्ता अल्पकाल के लिए है, इस वजह से शासक तेजी से पैसा खाने लगते हैं तथा शासक बदलनेवाला है, ऐसी भावना नौकरशाहों में आ जाए तो वे भी भ्रष्टाचार करते समय किसी तरह की कानूनी पाबंदियों की परवाह नहीं करते हैं। तीसरा महत्वपूर्ण भ्रष्टाचार मतलब जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाया जाता है, ऐसा आरोप लगानेवाले ही उन भ्रष्टाचारियों को शुद्धिकरण करके देव घर में बैठाते हैं। यह भ्रष्टाचार सबसे ज्यादा घातक है। हमारे देश में फिलहाल यही हो रहा है। महाराष्ट्र में तो इस पर शोध होना चाहिए। श्रीमती सोनिया गांधी मंगलवार को सुबह ईडी कार्यालय में पूछताछ के लिए गईं। उस समय राहुल गांधी सहित ५५ सांसद तथा असंख्य नेता आंदोलन के लिए सड़क पर उतर आए। राहुल गांधी को गिरफ्तार करके पुलिस थाने ले गई उस समय मैं संसद में था। राहुल गांधी कांग्रेस के नेता हैं, परंतु आज वे सड़क पर उतरे तो अपनी मां के लिए। उनकी ७५ वर्षीय मां जिनका शरीर गंभीर बीमारियों से खोखला हो गया है। दो बार कोविड का हमला होने के कारण शरीर कमजोर हो गया है। केंद्रीय जांच एजेंसियों के अधिकारी घर जाकर भी बयान दर्ज कर सकते थे। लेकिन दिल्ली में फिलहाल मानवता शून्य राजनीति का दर्शन कदम-कदम पर होता है।
पर्दा कौन डालता है?
भ्रष्टाचार की जड़ किसमें है, इसका जवाब सहज दिया जा सकता है। पसंद के लोगों के भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने में ही भ्रष्टाचार का मूल है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित विपक्ष के कई नेता केंद्रीय  जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता श्री प्रफुल्ल  पटेल को भी प्रताड़ित किया जा रहा है। निवासी मकान सहित उनकी संपत्ति जप्त कर ली गई। कल वे सत्ताधारी पार्टी में जाते हैं तथा सत्ताधारियों को जो चाहिए वह किया तो श्री पटेल भी ‘पुण्यवान’ बन जाएंगे। जिस तरह से महाराष्ट्र के १६ विधायक और १२ सांसद अचानक ‘परोपकारियों’ की सूची में झलकने लगे।
शिवसेना छोड़कर भाजपा समर्थक गुट में पहुंचे विधायक व सांसदों के खिलाफ कल तक ईडी एवं इन्कम टैक्स की तलवार लटक रही थी। किरीट सोमैया ने तो विधायक-सांसदों को जेल भेजने का ही तय कर लिया था। अब इन सभी की जांच बंद करके प्रकरण ठंडे बस्ते में डाल दिए गए हैं। यह वास्तविक भ्रष्टाचार है। श्री सोमैया ने अब तक महाराष्ट्र के कितने राजनीतिज्ञों के खिलाफ भ्रष्टाचार की मुहिम चलाई तथा भाजपा में प्रवेश करने के बाद उनकी जांच का आगे क्या हुआ, इसकी सूची ही अब प्रकाशित करनी चाहिए। श्री नारायण राणे तो आज केंद्रीय  मंत्री ही हैं। भावना गवली के निर्वाचन क्षेत्र में जाकर श्री सोमैया ने आंदोलन ही किया। सोमैया की गाड़ी पर भावना गवली समर्थकों ने हमला किया। श्रीमती गवली के एक सहयोगी रईस खान को ईडी ने गिरफ्तार किया, परंतु भावना गवली द्वारा शिवसेना का साथ छोड़ते ही तुरंत रईस खान को रिहा कर दिया गया व उनकी जप्त की गई संपत्ति भी छोड़ दी गई। इसके दो अर्थ निकलते हैं। पहला अर्थ मतलब भावना गवली पर व उनके जैसे अन्य राजनीतिज्ञ लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई गलत अथवा गैरकानूनी थी। दूसरा अर्थ मतलब गवली द्वारा भाजपा की राह पकड़ने की वजह से खुद-ब-खुद उनका शुद्धिकरण हो गया। श्री प्रताप सरनाईक, यशवंत जाधव से लेकर कई विधायकों के संदर्भ में भाजपा ने आरोप लगाए और उनके लिए जेल जाने की व्यवस्था की। जान बचाने के लिए ये लोग भाजपा समर्थित झुंड में शामिल हो गए। अर्जुन खोतकर ने सभी की ओर से यह वेदना व्यक्त की। खोतकर निष्ठावान शिवसैनिक हैं। मरने तक शिवसेना के साथ रहूंगा, ऐसा दृढ़ संकल्प उन्होंने दो दिन पहले लिया और तुरंत दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में जाकर मुख्यमंत्री शिंदे से मिले। इस दौरान मुझे श्री अर्जुन खोतकर ही एकमात्र ईमानदार व्यक्ति नजर आए। दिल्ली में पत्रकारों ने उनसे पूछा, ‘आप शिंदे गुट में मिल गए हैं क्या?’ इस पर खोतकर ने कहा, ‘अभी नहीं। मैं शिवसेना में हूं, लेकिन मेरे चेहरे पर तनाव है। आप इसे देख रहे हो। पारिवारिक तनाव है। संकट में पंâसा व्यक्ति किसी भी तरह से बाहर निकलने का मार्ग ढूंढ़ता ही है!’ श्री खोतकर ने ईमानदारी से कहा कि उन पर ईडी की कार्रवाई का दबाव है और वे संकट में हैं। खोतकर का शक्कर कारखाना ईडी ने जप्त कर लिया और खोतकर के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। अब भाजपा समर्थक गुट में जाकर वे रिहाई का मार्ग ढूंढ़ रहे हैं। इसलिए इतना स्पष्ट हो गया कि कई विधायक, सांसद शिंदे के झुंड में क्यों भाग रहे हैं। इसका खुलासा खोतकर की वजह से हुआ। लेकिन खोतकर के शिंदे के झुंड में जाने के बाद उनके खिलाफ ईडी की कार्रवाई रुकेगी। उनका जप्त किया गया कारखाना मिलेगा, यह उन पर विशेष मेहरबानी होगी। लेकिन खोतकर की तरह ही राज्य के ५४ शक्कर कारखाने राजनीतिक नेताओं को कम कीमत पर मिले। इसमें आर्थिक गड़बड़ी का आरोप ईडी ने लगाया है। इसलिए खोतकर के कारखाने के साथ-साथ इन ५४ कारखानों के खिलाफ कार्रवाई रुकेगी क्या? यह सवाल है। अथवा इन ५४ कारखानों के मालिकों को भी रिहाई के लिए श्री शिंदे के गुट में शामिल होना पड़ेगा। इसका उत्तर महाराष्ट्र की जनता को मिलना ही चाहिए।
झुंड में भागमभाग
भ्रष्टाचार की जड़ भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने में है, ऐसा कई प्रकरणों में नजर आ रहा है। ईडी जैसे तंत्र का विरोध होने की वजह नहीं है। परंतु ऐसी संस्थाओं का राजनीतिक सुविधा के लिए दुरुपयोग हो रहा होगा तो यह अनुचित है। बीते ५ वर्षों में सैकड़ों उद्योगपतियों ने देश छोड़ दिया। विदेश में जाकर उन्होंने निवेश किया। आर्थिक कदाचार पर कानूनी पाबंदी होनी चाहिए। लेकिन विपक्ष से संबंध रखनेवालों का व्यापार, उद्योग बर्बाद करना और जेल में डालना ऐसा प्रयास चल रहा है। भारतीय जनता पार्टी में जिस तरह से अच्छे लोग हैं, वैसे ही व्यापारी प्रवृत्ति वाले भी हैं। सभी राजनीतिक दलों में वे हैं, परंतु केंद्र का छापा और कार्रवाई सिर्फ  विरोधियों के खिलाफ ही चल रही है। यह लोकतंत्र के लिए मारक है। खोतकर की तरह चीनी का सस्ता कारखाना लेनेवालों में सत्ताधारी पार्टी के लोग भी हैं। उनके चेहरे पर खोतकर की तरह तनाव के चिह्न नहीं हैं। मनी लॉन्ड्रिंग कानून गलत रास्ते से जुटाए गए पैसे व उसके मालिकों पर पाबंदी लगाने के लिए है। ड्रग्स, स्मगलिंग, हवाला का आर्थिक लेन-देन रोकने के लिए है, परंतु देश की तस्वीर ठीक उलटी है।
मनी लॉन्ड्रिंग कानून का खौफ राजनीतिज्ञों में अधिक है। उस भय की वजह से विधायक, सांसद समूह छोड़कर भाग रहे हैं। लेकिन हिंदुत्व बेवजह बदनाम हो रहा है।
शिवसेना ने हिंदुत्व छोड़ा इसलिए हम पार्टी से दूर गए, ऐसा कहना बागी गुट को बंद करना चाहिए। ‘ईडी’ से रिहाई हो इसलिए हम सब भाग गए, यह कहने की ईमानदारी ये लोग दिखाएं। बेवजह हिंदुत्व को बदनाम क्यों करते हो?

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