मुख्यपृष्ठनए समाचाररोखठोक : उन्होंने भी चूड़ियां नहीं पहनी हैं!

रोखठोक : उन्होंने भी चूड़ियां नहीं पहनी हैं!

संजय राऊत-कार्यकारी संपादक

आखिरकार चुनाव प्रचार में पाकिस्तान आ ही गया। पाकिस्तान को चूड़ियां पहनने को विवश कर देंगे, ऐसी हुंकार मोदी ने भरी है। मोदी ने एलान किया कि वह पाकिस्तान के परमाणु बम से नहीं डरते। मोदी और उनके लोग जीतने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। उन्होंने भी चूड़ियां नहीं पहनी हैं!
‘पाकिस्तान को चूड़ियां पहनने को विवश कर देंगे,’ ऐसी नई दहाड़ प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान लगाई है। पाकिस्तान के पास परमाणु बम है इसलिए हमें सावधान रहना चाहिए, ऐसी बात करके कांग्रेस के मणिशंकर अय्यर जैसे नेता ने मोदी की राह आसान कर दी है। इसके बाद से उन्होंने भाजपा के प्रचार में पाकिस्तान का मुद्दा जीवित कर दिया है। मोदी पाकिस्तान को चूड़ियां पहनाने वाले हैं, लेकिन कब? सवाल यह है। नवाज शरीफ को खुद के प्रधानमंत्री पद की शपथविधि के समय विशेष निमंत्रण देनेवाले मोदी ही थे और फिर शरीफ को जन्मदिन की विशेष बधाई देने के लिए पाकिस्तान पहुंचनेवाले और शरीफ के जन्मदिन का केक काटनेवाले भी मोदी ही थे। उरी से लेकर पुलवामा तक पाकिस्तान के कई हमलों के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी ने कभी पाकिस्तान के हाथ में चूड़ियां पहनाईं या स्वाभिमानी तेवर दिखाया, ऐसा कभी नजर नहीं आया। भाजपा और उसके लोगों को अपने प्रचार में पाकिस्तान का ही मुद्दा चाहिए और ऐसे मुद्दे कांग्रेसवाले ही उन्हें दे देते हैं। हम पाकअधिकृत कश्मीर (पीओके) को भारत में वापस ला सकें, इसके लिए भाजपा को वोट दें, ऐसा आह्वान अमित शाह ने महाराष्ट्र के पालघर में किया। पालघर आदिवासियों के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र है। भाजपा ने आदिवासियों के वन भूमि के अधिकार को भी नकार दिया, इस पर अमित शाह नहीं बोलते हैं। पाकअधिकृत कश्मीर को भारत में लाएंगे, ऐसा वे आदिवासियों से कहते हैं। पिछले दस वर्षों में उन्हें पाकअधिकृत कश्मीर को भारत में लाने से किसने रोक रखा था? पाकअधिकृत कश्मीर की बात चुनाव प्रचार में और वह भी पालघर के आदिवासी इलाके में करने की बजाय श्रीनगर में जाकर करना चाहिए। मोदी-शाह पाकिस्तान पर बोलते हैं तो फिर भला एकनाथ शिंदे वैâसे पीछे रहेंगे। शिंदे का कहना है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं और अब उद्धव ठाकरे उनके साथ हैं। गांधी का कहना है कि नरेंद्र मोदी देश का संविधान बदलना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने भ्रष्ट तरीकों से ४२० सीटें जीतने का पैâसला किया है, इसमें पाकिस्तान का संबंध कहां से आ गया? सच तो ये है कि मुसलमान और पाकिस्तान जैसे विषयों को उठाए बिना इस मंडली का प्रचार ही पूरा नहीं होता।
प्रिय देश!
पाकिस्तान भाजपा यानी मोदी-शाह का पसंदीदा देश है। पाकिस्तान में लोकतंत्र नहीं है। मोदी-शाह ने पाकिस्तान की ही तरह भारत में भी लोकतंत्र को नष्ट कर दिया। पाकिस्तान में चुनाव आयोग, अदालतें, चुनाव महज एक ढोंग है। भारत में भी वैसे कोई अलग तस्वीर नहीं है। पाकिस्तान में राजनीतिक विरोधियों की हत्या करना, उन्हें वैâद करना और शरण में लाना एक नियमित अभ्यास है। इमरान खान, नवाज शरीफ जैसे नेता एक ही जेल में हैं या फरार हैं। मोदी के भारत में वही पाकिस्तानी फॉर्मूला इस्तेमाल किया जा रहा है। पाकिस्तान में सैन्य शासकों द्वारा सभी संवैधानिक संस्थाओं का गला घोंट दिया गया है। भारत में वह स्थान संघ परिवार, मोदी-शाह जैसे लोगों ने ले लिया है। पाकिस्तान हर घटना के लिए भारत को दोष देता है। भारतीय नेता पाकिस्तान पर ठीकरा फोड़ते हैं। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था मुट्ठीभर जमींदारों के हाथों में आ गई। भारत में मोदी-शाह के दोस्तों ने अर्थव्यवस्था पर कब्जा कर लिया। मोदी-शाह के पास मुसलमानों और पाकिस्तान के अलावा कोई चुनावी मुद्दा नहीं है। देश के प्रधानमंत्री सिर्फ चुनावी सभाएं कर रहे हैं और जब भी समय मिलता है तो ‘रोड शो’ भी करते हैं। क्या पंडित नेहरू की वजह से उन्हें ये सब करना पड़ रहा है? नेहरू ने विज्ञान का अनुसरण किया। पाकिस्तान ने वैसा नहीं किया। विज्ञान और विचार का सहारा लेकर नेहरू आगे बढ़े, लेकिन पाकिस्तान नहीं बढ़ पाया। उसी पाकिस्तान का राग मौजूदा भाजपा हर दिन अलापती है।
२०२९ में भी वही
पाकिस्तान को चूड़ियां पहनने को मजबूर कर देंगे, ऐसा मोदी कहते हैं। २०२९ के चुनाव में भी वे इन्हीं चूड़ियों की खनखनाहट करेंगे। पाकिस्तान की तरह भारत के पास भी परमाणु बम है। भारत ने इसका इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ नहीं किया। अगर पाकिस्तान कल परमाणु बम गिराने का पैâसला करता है तो जाहिर है कि वह इसे भारत पर ही गिराएगा। अगर इसे दिल्ली पर गिराया गया तो क्या होगा, इस बारे में एक विशेषज्ञ ने जानकारी दी थी। ब्लास्ट, हीट और न्यूक्लियर रेडिएशन, ये तीन परिणाम परमाणु बम के होते हैं। अगर तीन हजार मीटर की दूरी पर २० केटी का परमाणु बम विस्फोट किया जाए तो दो किलोमीटर के दायरे में स्थित दिल्ली के सभी दो मंजिला मकान नष्ट हो जाएंगे। साढ़े तीन किलोमीटर के भीतर मौजूद सभी इंसान मर जाएंगे या घायल हो जाएंगे। आग लग जाएगी। अनगिनत लोग अंधे और दिव्यांग हो जाएंगे। वह राख उड़कर अंतरिक्ष में जाएगी और जहां गिरेगी, वहां के लोगों को जीवनभर तकलीफ पहुंचाएगी। बीमारियां होंगी। यदि जमीन पर ही २० केटी का परमाणु बम विस्फोट किया जाए तो २५० किमी तक के क्षेत्र में छह लाख लोग मारे जाएंगे। १० लाख लोग दिव्यांग हो जाएंगे। अगर भारत ने पाकिस्तान पर परमाणु बम गिराने का पैâसला किया तो इससे भी ज्यादा हानि होगी, क्योंकि उनका देश छोटा है। इसलिए चुनाव प्रचार में परमाणु बम आदि का मुद्दा जो लोग उठाते हैं, वो निरर्थक है। मणिपुर अशांत है। मोदी वहां शांति नहीं ला पाए हैं। वहां लद्दाख में चीनी सेना घुस आई है। मोदी उन्हें बाहर नहीं धकेल पाए हैं, क्योंकि चूड़ियों की खनखनाहट हमारे ही देश में हो रही है। पाकिस्तान में चुनाव एकतरफा होते हैं। मोदी अपने देश में भी यही करना चाहते हैं। पाकिस्तान में संविधान वैसा नहीं है। मोदी भारत के संविधान को नष्ट कर अपना नया संविधान लाना चाहते हैं। ये सब करने के लिए उन्हें भारत में बड़ा बहुमत हासिल करना है। मोदी जो कर सकते हैं, वह कल्पना से परे है। चुनाव जीतने के लिए मोदी पाकअधिकृत कश्मीर में सेना उतारेंगे। वे पाकिस्तान के कंगाल राजनेताओं को पांच सौ-हजार करोड़ रुपए की सौगात देंगे और पाकअधिकृत कश्मीर में दिखावटी लड़ाई करके भारत के मतदाताओं को प्रभावित करेंगे, ऐसा देश की जनता को लगता है। क्योंकि अगर पाकिस्तान और मुसलमान नहीं होगा तो मौजूदा भाजपा भी नहीं होगी। मोदी-शाह तो बिल्कुल नहीं।
वे जीतने के लिए कुछ भी कर सकते हैं।

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