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रोवर प्रज्ञान ने लैंडर विक्रम को कैमरे में कैद किया!  …बोला, स्माइल प्लीज

• इसरो ने शेयर की तस्वीर
एजेंसी / नई दिल्ली
हिंदुस्थान का चंद्रयान-३ सकुशल चांद पर लैंड कर गया। उसका रोवर प्रज्ञान चांद पर रोज नई-नई चीजें देख रहा है और इसरो को उसकी जानकारी भेज रहा है। साथ ही तस्वीरें भी खींच रहा है, जिसे इसरो देश के नागरिकों के लिए सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। अब एक बार फिर रोवर प्रज्ञान ने लैंडर विक्रम की तस्वीर ली है। इसरो ने इस तस्वीर को साझा करते हुए लिखा `स्माइल प्लीज!’ इसरो ने बताया कि रोवर पर लगे नेविगेशन वैâमरा ने यह तस्वीर ली है। इस खास कैमरे को लैबोरेट्री फॉर इलेक्ट्रो ऑप्टिक्स सिस्टम्स द्वारा विकसित किया गया है। इसरो ने बताया कि रोवर प्रज्ञान ने ३० अगस्त को भारतीय समयानुसार सुबह ७.३५ बजे यह तस्वीर खींची।
मिली जानकारी के अनुसार, इसरो का चंद्रयान-३ मिशन लगातार चांद से जुड़ी रोचक जानकारियां भेज रहा है। चांद की सतह पर घूम रहे चंद्रयान-३ मिशन के रोवर प्रज्ञान ने दक्षिणी ध्रुव पर सल्फर की मौजूदगी की पुष्टि की है। अंतरिक्ष विज्ञानी टीवी वेंकटेशवरन ने बताया कि रोवर ने चांद पर कुछ विशेष तत्वों की खोज की है। अभी यह चांद की सतह पर और जगह जाएगा और तत्वों की कंपोजिशन और कंसंट्रेशन की जानकारी हासिल करेगा।
कुछ जगहों पर उतरने की जरूरत
टीवी वेंकटेशवरन ने बताया कि पहले से ही चंद्रयान-१, चंद्रयान-२ और चंद्रयान-३ के साथ ही अमेरिका के ऑर्बिटर्स ने रिमोट सेंसिंग और मैपिंग से चांद की सतह पर खनिजों के भंडार होने की जानकारी दी है, लेकिन रिमोट सेंसिंग करीब १०० किलोमीटर दूर आसमान से की गई है, इसलिए चांद की कुछ जगहों पर उतरने की जरूरत है। इसके बाद रिमोट सेंसिंग के डाटा और रोवर के डाटा के मिलान के बाद ही हमारा रिमोट सेंसिंग डाटा पर विश्वास बढ़ेगा।’

इसरो जल्द एक और खुशखबरी देगा
चंद्रयान-३ की सफलता से खुश देशवासियों को इसरो जल्द ही एक और खुशखबरी देने की तैयारी कर रहा है। दरअसल, इसरो अपने पहले सौर मिशन आदित्य एल-१ को आगामी दो सितंबर को लॉन्च करने वाला है। आदित्य एल-१ से लैस भारत का लॉन्च व्हीकल पीएसएलवी लॉन्चिंग पैड पर पहुंच चुका है। इसरो ने इसकी तस्वीरें भी साझा की हैं। अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. आरसी कपूर ने आदित्य एल-१ मिशन को अंतरिक्ष में ले जाने वाले लॉन्च वेहीकल पीएसएलवी की तारीफ करते हुए कहा कि पीएसएलवी, इसरो की विश्वसनीय मशीन है। इसरो के अधिकतर लॉन्च में पीएसएलवी का ही इस्तेमाल किया जाता है। पीएसएलवी ३,२०० किलो पेलोड लेकर पृथ्वी की निचली कक्षा तक जा सकता है और करीब १,४०० किलो पेलोड को लेकर पृथ्वी की भूस्थैतिक कक्षा तक जा सकता है।

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