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बदहाल बनारस! मणिकर्णिका घाट पर लगी शवों की कतारें

मरने के बाद भी इंसान का शांति से नहीं होने पा रहा दाह संस्कार

सामना संवाददाता / नई  दिल्ली 

देश के कई राज्यों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। उत्तर भारत में कुछ राहत मिलने के बाद मौसम में बदलाव से गर्मी बढ़ गई है। इस बीच उत्तर प्रदेश के बनारस में मणिकर्णिका घाट शवों से पटा पड़ा है। घटिया प्रबंधन के चलते शवों का दाह संस्कार करते समय तपती धूप में घाट की सीढ़ियों पर घंटों खड़ा होना पड़ रहा है। घाटों पर छाया और पीने के पानी का प्रबंध न होना जिला प्रशासन के व्यवस्था की कलई खोल रहा है। चिलचिलाती धूप में लोगों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। इस बीच यह भी चर्चाएं हो रही हैं कि इंसान के मरने के बाद भी शांति से उसका दाह संस्कार नहीं हो पा रहा है।

दाह संस्कार के लिए चार घंटे की करनी पड़ रही है प्रतीक्षा

कहते हैं कि काशी में मृत्यु सीधे मोक्ष का द्वार खोलती है। इस कारण यहां बड़ी संख्या में शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है। यहां पूरे दिन यानि 24 घंटे दाह संस्कार होता है। कोरोना के मामलों की बढ़ती संख्या और भीषण गर्मी में शवों को यहां लाने के मामले इतने बढ़ गए हैं कि लोग अंतिम संस्कार के लिए शवों को लेकर गंगा घाट की सीढ़ियों पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दाह संस्कार के लिए उन्हें चार-चार घंटे तक इंतजार करना पड़ा रहा है। सामान्य दिनों की तुलना में 10-20 शव और लाए जा रहे हैं। हालांकि, भले ही दाह संस्कार के लिए 30-35 शव लाए जा रहे हो लेकिन गर्मी में 40-50 शव लाए जा रहे हैं।

गर्मी से घटा गंगा का जलस्तर

भीषण गर्मी के कारण गंगा का जलस्तर कम हो गया है। पानी और घाटों के बीच की दूरी बढ़ गई है। इसलिए चिता को बुझाने में ज्यादा समय लगता है। साथ ही बताया गया कि नगर निगम की ओर से न तो बैठने और न ही पेयजल की सुविधा मुहैया कराई गई है।

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