मुख्यपृष्ठसंपादकीयगुंडों का राज!... मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करो!

गुंडों का राज!… मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करो!

अगर महाराष्ट्र में पुलिस स्टेशन ही सुरक्षित नहीं हैं तो कुछ भी सुरक्षित नहीं है। कानून एवं व्यवस्था गैंगस्टरों के अड्डों पर पानी भर रही है। उत्तर प्रदेश, बिहार में पुलिस स्टेशनों पर हमले, पुलिस प्रमुख, जिला कलेक्टरों की हत्या जैसी मिर्जापुरी राजनीति अक्सर होती रहती है। अब इस तरह की बात महाराष्ट्र में होने लगी है और इस भयानक आपराधिक संघर्ष के सूत्रधार खुद राज्य के मुख्यमंत्री शिंदे हैं। अगर शिंदे मुख्यमंत्री बने रहे तो राज्य में सिर्फ अपराधी ही पैदा होंगे, ऐसा आरोप लगाकर भाजपा के वरिष्ठ विधायक गणपत गायकवाड जेल जा चुके हैं। विधायक गायकवाड ने उल्हासनगर के पुलिस स्टेशन में शिंदे गैंग के सदस्य महेश गायकवाड पर गोलियां चलार्इं। इस गोलीबारी में शिंदे गैंग के दो सदस्य घायल हो गए। मुख्यमंत्री स्वयं अपने गिरोह के घायलों को देखने अस्पताल गए और चिंता व्यक्त की। मुख्यमंत्री के जिले में हुए इस गैंगवॉर को पूरे देश ने देखा। ऐसे में गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी ने भी इसे देखा ही होगा। इतनी भयानक घटना पर अभी तक उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। गैर-भाजपा शासित राज्यों में पत्ता भी खड़क जाए तो यह मंडली प्रतिक्रिया देती है, लेकिन महाराष्ट्र में शाह-मोदी द्वारा नियुक्त मुख्यमंत्री के नाम पर गुंडागर्दी और खून-खराबा चल रहा है। उस पर ये ‘संस्कार भारती’ अपना मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं। विधायक गायकवाड ने कहा, ‘‘हमारे जैसे अच्छे लोगों को एकनाथ शिंदे ने अपराधी बना दिया है।” पुलिस को गायकवाड के कबूलनामे को गंभीरता से लेना चाहिए। मुख्यमंत्री शिंदे और उनके बालराजा ने ठाणे-कल्याण सहित पूरे राज्य में गुंडागर्दी मचा रखी है। ठेकेदारी, अपहरण, फिरौती, धमकी, हत्या, जमीनों पर कब्जा जैसे अपराध सरकार के आशीर्वाद से हो रहे हैं और उनके गिरोहों के इस काम में कोई बाधा न आए, इसके लिए मुख्यमंत्री कार्यालय में सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों को विशेष रूप से नियुक्त किया गया है। महाराष्ट्र में अपराधियों का राज्य अपराधियों के लिए चलाया जा रहा है और उसे दिल्ली का खुला आशीर्वाद है। जिले-जिले में संघर्ष और खून-खराबे का खेल चल रहा है। राहुरी में एडवोकेट राजाराम आढाव एवं एडवोकेट मनीषा राजाराम आढाव नामक वकील दंपति का अपहरण कर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। आढाव की हत्या के विरोध में जब राज्यभर से वकील मुंबई पहुंचे तो सरकार ने उनकी आवाज दबाने की कोशिश की। नगर जिले में विधायक संग्राम जगताप का भीड़तंत्र चरम पर पहुंच गया है। जगताप के गिरोह के लोग हत्या, अपहरण, संपत्ति पर अवैध कब्जा आदि मामलों में शामिल हैं। आम नागरिक, व्यापारी, उद्यमियों का वहां रहना मुश्किल हो गया है। जगताप अजीत पवार गैंग का सदस्य है। शिंदे गैंग का प्रकाश सुर्वे खुलेआम लोगों के हाथ-पैर काटने की बात करता है, उनके पुत्र बिल्डरों के दफ्तर में घुसकर धमकाते हैं। गिरोह का एक अन्य सदस्य सदामामा सरवणकर, सार्वजनिक रूप से पिस्तौल चलाता है और उसे शिंदे सरकार की पुलिस का समर्थन प्राप्त है। पुण्यनगरी में तो अजीतदादा की कृपा से जो कुछ हो रहा है, वह कानून और सुव्यवस्था के मामले में बेशर्मी का प्रतीक है। पार्थ पवार ने कुख्यात गजा मारणे से उनके आवास पर सद्भावना मुलाकात की और ‘विचारों का आदान-प्रदान’ किया। पिछले चार महीनों में पुणे के कई खतरनाक अपराधियों को जमानत पर छुड़ाने के लिए राजनीतिक हस्तक्षेप हुआ। कुछ लोगों के मामलों में जानबूझकर आरोप पत्र दाखिल करने में देरी की गई। इससे जमानत का रास्ता साफ हो गया‌। यह तस्वीर महाराष्ट्र के इस कोने से उस कोने तक की है। इसलिए महाराष्ट्र में गुंडों का ही राज है और सत्ताधारी पक्ष के ही विधायक खुलेआम कहते हैं कि ‘सागर’ और ‘वर्षा’ बंगलों में उनके बॉस हैं। ऐसे में कानून का राज आएगा कहां से? जिस राज्य का निर्माण गुंडों व भीड़ तंत्र से हुआ है, उस राज्य में इसके अलावा और क्या होगा? शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे कोकण दौरे पर हैं। उनके कोकण की सभाओं को बाधित करने की धमकियां भाजपा के फुस्स हो चुके पटाखे दे रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि गुंडों का बॉस ‘सागर’ बंगले में बैठा है। ये लोग बात करते हैं कि हमारा कौन क्या बिगाड़ लेगा और ‘सागर’ बंगले का ‘बॉस’ उस पर मुंह में दही जमाकर चुप बैठ जाता है। गणपत गायकवाड को मुख्यमंत्री द्वारा पोषित गुंडों के खिलाफ पुलिस स्टेशन में ही हथियार उठाना पड़ा और उन्हें गुंडों पर गोली चलाने का कोई अफसोस नहीं है, ऐसा विधायक गायकवाड ने कहा। गायकवाड के बेटे पर थाने में ही हमला किया गया। चूंकि हमलावरों को मुख्यमंत्री के बालराजा का संरक्षण प्राप्त था, इसलिए पुलिस भी मिंधे बन गई। अगर वे मेरे सामने मेरे बेटे को मार रहे हैं, तो मेरे जीने का क्या फायदा? इसलिए मैंने आत्मरक्षा के लिए हथियार उठाए, ऐसा गायकवाड का कहना है। गृहमंत्री फडणवीस ने इन सभी मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराने का पैâसला किया। यह दिखावा है। उनमें महाराष्ट्र में गुंडो के राज को खत्म करने की हिम्मत नहीं है। क्योंकि मुख्यमंत्री शिंदे ही गुंडों का राज चला रहे हैं।’ भाजपा के विधायक गणपत गायकवाड ने एक अहम कबूलनामा किया है। एकनाथ शिंदे के पास मेरे करोड़ों रुपए हैं। गायकवाड के कबूलनामे को एफआईआर मानकर इसे ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ का मामला मानते हुए इसी दिशा में जांच की जानी चाहिए। ‘ईडी’ को गायकवाड का जवाब लेना चाहिए और शिंदे के खिलाफ भी हेमंत सोरेन की तरह तुरंत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। गायकवाड ने शिंदे को करोड़ों रुपए क्यों दिए? ये करोड़ों रुपए सीधे तरीके से नहीं आए। अपराध से आए पैसों को मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया। यह सीधा ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ का मामला है और उन्हें ‘पीएमएलए’ अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। ‘ईडी’वालों, आप सुन रहे हैं न? सुन लिया हो तो ‘वर्षा’ बंगले को समन भेजें। तभी कानून का राज है, अन्यथा महाराष्ट्र में चोरों का राज है और चोर ही इसे चला रहे हैं!

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