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साजन तेरी तन्हाई

साजन तेरी तन्हाई
एक घूंट सिसक कर पी लूं
जैसा कहे तू वैसा जी लूं
रख दूं यादें कहीं पे यूं ही,
दिल को यूं ही फिर से सी लूं
सुन आंख नहीं ये नदियां हैं
हर पल में जो दूरियां हैं
कैसे मिलूं, है बेचैनी-सा बादल,
जो गहरी सांसें, दिल है दल-दल,
कैसे रहूं मैं, अब तेरे बिन सजना
जो सूनी बिंदिया, सूना कंगना
ये रात का आलम खामोश जरा
अब डर लगता है, मुझे भी रहना
– मनोज कुमार
गोंडा, उत्तर प्रदेश

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