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भाजपाई विधायक से लिया पंगा, ‘मामा’ की पुलिस ने किया ‘चौथे स्तंभ’ को नंगा, टी पार्टी के बहाने बुलाकर डंडे से पीटा

 रमेश ठाकुर। खाकी और खादी की संयुक्त करतूतों ने एक बार फिर लोकतांत्रिक व्यवस्था को शर्मसार किया है, जिसका शोर दिल्ली तक सुनाई दे रहा है। मामला यू-ट्यूब पर चैनल बनाकर पत्रकारिता करनेवाले करीब दर्जन भर पत्रकारों से जुड़ा है। उक्त पत्रकारों को मध्य प्रदेश के भाजपाई विधायक से पंगा लेना भारी पड़ गया। भाजपाई विधायक की शिकायत पर ‘मामा’ यानी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुलिस ने यू-ट्यूबर पत्रकारों को तालिबानी सजा दी। थानेदार ने चाय पार्टी के बहाने उक्त पत्रकारों को बुलाया और बाद में कपड़े उतरवाकर उनकी डंडे से पिटाई कर दी।
मामला मध्य प्रदेश के सीधी शहर का है। गुरुवार को दोपहर बाद सोशल मीडिया पर एक तस्वीर दिखाई पड़ी, जिसमें सीधी कोतवाली में कई यू-ट्यूबर पत्रकार अर्धनग्न अवस्था में डरे-सहमे खड़े दिखाई पड़े। तस्वीर को देखकर प्रथमदृष्टया तो ऐसा प्रतीत हुआ कि ये किसी अंडरवियर का प्रचार कर रहे हैं। लेकिन बाद में पता चला ये सभी यू-ट्यूबर पत्रकार हैं और वर्षों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हैं। पुलिस की मानें तो उक्त पत्रकार स्थानीय भाजपा विधायक केदारनाथ शुक्ला के खिलाफ छपम-छपाई करके उनसे पैसों की डिमांड कर रहे थे, जिससे भन्नाकर रसूखदार विधायक ने सबको पुलिस से टंगवा दिया। सीधी थाने की पुलिस ने विधायक के मात्र एक शिकायती फोन पर ही जिले के दर्जनों यू-ट्यूबर पत्रकारों को सीधा कर दिया। धरपकड़ किसी के साथ नहीं हुई, बड़े प्यार से कोतवाल साहब ने सबको थाने में चाय-नाश्ते का लालच देकर बुलाया। कोतवाल के बुलावे पर सभी दौड़े चले आए, लेकिन उन्हें क्या पता था वहां उनकी खातिरदारी कुछ अलग ढंग से होनेवाली है। जैसे ही सभी थाने पहुंचे, वहां पहले से लट्ठ लिए बैठे दर्जनों सिपाही यू-ट्यूबर पत्रकारों पर पिल पड़े। चाय पार्टी पर पहुंचे पत्रकारगण कुछ समझ पाते या माजरे को भांपते उन्हें मारते-मारते अधमरा कर दिया गया।
बात यहीं तक खत्म नहीं हुई, आगे और भी बहुत कुछ होना बाकी था। अच्छी सुताई करने के बाद पुलिसवालों ने सबको अर्धनग्न करवाया, उसी अवस्था में मुर्गा बनाया, माफी मंगवाई और हर आधुनिक तरीकों से उन्हें टॉर्चर किया। कोतवाल का मन इतने से भी नहीं भरा, सबको अपने कमरे में घंटों नंगे खड़ा रहने को कहा। यू-ट्यूबर पत्रकारों की जान फंसी थी इसलिए जैसा उनसे कहा गया वे करते गए। लेकिन जैसे ही उनकी अर्द्धनग्न तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुर्इं, बवाल मच गया। बवाल मचना भी चाहिए था, उनके साथ हार्डकोर अपराधियों जैसा सलूक जो किया गया। इस कृत्य की जितनी निंदा की जाए कम है। घटना की मूल सच्चाई का जब पता लगाया तो पता चला कि यू-ट्यूबर पत्रकार मिलकर स्थानीय भाजपा विधायक केदारनाथ शुक्ला के खिलाफ अपने-अपने यू-ट्यूब चैनलों पर कुछ खबरें चला रहे थे, जो विधायक साहब को रास नहीं आर्इं। तभी उन्होंने पुलिस से मिलकर यू-ट्यूबरों को सबक सिखाने का नायाब तरीका खोजा। तरीका भी ऐसा, जो पूरी तरह से अलोकतांत्रिक और पूर्णत: तालिबानी था। सीधी पुलिस द्वारा मुकर्रर सजा की न सिर्फ मध्य प्रदेश में आलोचना हो रही है, बल्कि पूरे देश में थू-थू हो रही है। बात दिल्ली तक पहुंची है, कई मंत्री भी नाराज दिखे हैं।

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