मुख्यपृष्ठस्तंभसामना शोध: `सर्दी' में बढ़ा वायु प्रदूषण तो वॉर्न करेगा नया...

सामना शोध: `सर्दी’ में बढ़ा वायु प्रदूषण तो वॉर्न करेगा नया सिस्टम!

मौसम विभाग ने ईजााद की नई तकनीक

धीरेंद्र उपाध्याय

मुंबई शहर समेत पूरे एमएमआर क्षेत्र में सर्दी के मौसम में भी वायु गुणवत्ता बहुत ही खराब दर्ज की गई थी, जिसने नागरिकों को बुरी तरह से प्रभावित किया था। इतना ही नहीं बड़ी संख्या में लोग सांस से संबंधित बीमारियों के शिकार भी हुए थे। हालांकि, इस साल मौसम विज्ञान विभाग ने एक ऐसे तकनीक को ईजाद किया है, जिसकी मदद से लोग पहले ही वायु गुणवत्ता के बारे में न केवल जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, बल्कि सर्दी में यह वॉर्निंग सिस्टम आपको वॉर्न करने का काम भी करेगा।
बता दें कि शहर में प्रदूषण के स्तर पर वास्तविक समय और पूर्वानुमानित डेटा को समझने के लिए नागरिक अब भारतीय उष्णकटीबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के पोर्टल पर वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली का उपयोग कर सकते हैं, जिसका प्रेजेंटेशन सेंटर फॉर स्टडी ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी द्वारा आयोजित इंडिया क्लीन एयर समिट २०२३ में दिया गया था। इस वेबसाइट पर विस्तृत जानकारी, वास्तविक समय डेटा के साथ-साथ २४ स्थानों पर पीएम २.५ और पीएम १० उत्सर्जन के योगदान पर पूर्वानुमान प्राप्त करने के लिए बनाई गई है। मुंबई महानगर क्षेत्र में २० वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन हैं। इसमें से कुछ मुंबई के नेवी नगर, मालाड पश्चिम, बोरीवली पूर्व, देवनार, पवई, मुलुंड पश्चिम, बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स और चकाला में हैं। इसके अलावा शेष चार महापे, वसई, नेरुल और कल्याण में हैं। पोर्टल के बारे में जानकारी साझा करते हुए आईआईटीएम के वैज्ञानिक डॉ. सचिन घुडे का कहना है कि इस तरह के अभूतपूर्व परिमाण वाले पीएम २.५ स्तर को कैप्चर करना एक वैश्विक दुर्लभता है। इसके लिए शहर से इस तरह के असाधारण डेटा को इकट्ठा करने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। एक्यूईडब्ल्यूएस पिनपॉइंट सटीकता पर निर्भर करता है, जिसकी शुरुआत सटीक मौसम पूर्वानुमान से होती है।
सीएसटीईपी में वायु गुणवत्ता की वरिष्ठ अनुसंधाकर्ता डॉ. प्रतिमा सिंह का कहना है कि सभी की निगरानी के लिए अधिक सेंसर की आवश्यकता होती है। कम लागत वाले सेंसर स्थापित करने की पहल करनेवाली हाउसिंग सोसाइटियों में नागरिक विज्ञान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसकी विश्वसनीयता को देखते हुए नागरिक स्वयं उत्सर्जन को कम करके वायु प्रदूषण को रोक सकते हैं। इसके साथ ही अपने स्वास्थ्य में सुधार के प्रति जिम्मेदार बनकर भाग ले सकते हैं।
आईआईटीएम ने ऐसी प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के लिए हिंदुस्थान भर में ४२० वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों के व्यापक नेटवर्क से एयरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ (वायु को प्रदूषित करनेवाले एयरोसोल के प्रभाव का माप) पर उपग्रह डेटा को एकसाथ किया है, जो वर्तमान में बंगलुरु, कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, पुणे और अमदाबाद में मौजूद हैं।

अन्य समाचार

लालमलाल!