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दिवाली पर फिर सनके सलमान के फैंस … टाइगर ३ के शो में धमाकेबाजी!

उपद्रवी दर्शकों ने सिनेमा हॉल में की आतिशबाजी

सामना संवाददाता / नासिक
दिल्ली का ‘उपहार सिनेमा अग्निकांड’ देश के लोग शायद भूल गए हैं। २६ साल पहले घटी उस घटना में ५९ लोगों की आग में झुलसने से दर्दनाक मौत हो गई थी जबकि करीब १०० लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए थे। १३ जून १९९७ को दिल्ली के उपहार सिनेमा हॉल में फिल्म बॉर्डर के शो के दौरान घटी उक्त घटना से खासकर सिनेमा हॉल के मालिकों ने शायद कोई सबक नहीं सीखा होगा। ऐसा रविवार को दीपावली के दिन नासिक के सिनेमा हॉल में अभिनेता सलमान खान पैंâस द्वारा दिखाई गई दबंगई से साफ हो गया है। दिवाली के मौके पर रीलीज हुई सलमान खान की फिल्म ‘टाइगर-३’ के शो के दौरान बॉलीवुड के ‘दबंग’ सलमान खान के पैंâस ने जिस तरह से आतिशबाजी की उससे देश के सिनेमा हॉलों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि दर्शकों ने दो महीने में दूसरी बार (रविवार शाम को) एक ही सिनेमा हॉल के अंदर पटाखे फोड़कर और रॉकेट दागकर सभी को सकते में डाल दिया। ‘टाइगर ३’ के शो के दौरान हुई इस घटना की जानकारी अधिकारियों ने सोमवार को दी।
रविवार को मोहन सिनेमा हॉल में देर रात तक रिलीज हुई सलमान खान, वैâटरीना वैâफ और इमरान हाशमी की मुख्य भूमिकावाली इस फिल्म के शो में जमकर हंगामा देखने को मिला। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, फिल्म के बीच में जिसका स्वागत शोर-शराबे, सीटियों, तालियों और जयकारों से किया जा रहा था। उसी दौरान वहां पहुंचे कुछ अज्ञात लोग बैगों से विस्फोटक सामग्री (पटाखे, सुतली बम और रॉकेट निकालकर जलाने लगे। बंद सिनेमा हॉल के अंदर अचानक गगनभेदी आवाजों से लोग घबरा गए। आगे की पंक्तियों में बैठे कई लोग पटाखे की आग से बचने के लिए भागते देखे गए। दर्शकों के जोरदार विरोध, आतिशबाजी के कारण हुए धुएं और बदबू से बावजूद फिल्म अनवरत चलती रही। इस पर दर्शक सिनेमा हॉल के संचालक की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। छावनी थाना प्रमुख पुलिस इंस्पेक्टर रघुनाथ शेगर ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने घटना पर संज्ञान लिया है और मामले में केस दर्ज कर रहे हैं। शेगर ने बताया, ‘हम मामला दर्ज करने की प्रक्रिया में हैं, किसी के घायल होने की सूचना नहीं है, न ही किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है, लेकिन हम जांच के बाद आवश्यक कदम उठाएंगे।’

मालेगांव धमाकों को याद कर सहमे लोग
इस घटना ने २००६ और २००८ में अल्पसंख्यक बहुल मालेगांव में हुए वास्तविक आतंकी बमों की डरावनी यादें ताजा कर दीं, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी।

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