मुख्यपृष्ठधर्म विशेषप्रतिदिन सूर्य को नमस्कार करें स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों रहेगी ठीक

प्रतिदिन सूर्य को नमस्कार करें स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों रहेगी ठीक

गुरु जी, मेरे स्वास्थ्य और शिक्षा के बारे में कृपया कुछ बताएं?
– तृषा पांडे
(जन्म- २४ अक्टूबर २०१९, समय- रात्रि ९.५५, स्थान- अंधेरी, मुंबई)
तृषा जी, आपकी कुंडली को अगर हम देखें तो आपका जन्म गुरुवार को मिथुन लग्न में हुआ है और आपकी राशि सिंह बन रही है। यदि आपके स्वास्थ्य के बारे में हम देखें तो स्वास्थ्य का विचार छठे भाव से किया जाता है। छठे भाव का स्वामी मंगल है और वह मंगल आपकी कुंडली में चौथे स्थान पर बैठ करके आपकी कुंडली को मांगलिक बनाया है। आपका स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों ठीक रहेगी। लेकिन आपकी कुंडली में सूर्य ग्रह नीच राशि का है इसलिए प्रतिदिन आपको सूर्य को प्रणाम करना चाहिए। सूर्य को प्रणाम करना आपके लिए विशेष लाभदायक माना जाएगा। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।
गुरु जी, मेरा स्वास्थ्य कैसा रहेगा और शिक्षा कैसी होगी?
– राहुल पांडे
(जन्म- २ जुलाई २०१७, समय- प्रात: ८.३० स्थान- मुंबई)
राहुल जी, आपका जन्म कर्क लग्न में हुआ है और आपकी राशि कन्या है। अगर आपके स्वास्थ्य के बारे में हम बात करें तो आपका स्वास्थ्य बहुत अच्छा है और शिक्षा के बारे में बात करें तो आपकी शिक्षा बहुत अच्छी होगी। लेकिन शिक्षा के स्थान का स्वामी मंगल आपकी कुंडली में १२वें भाव पर बैठ करके आपकी कुंडली को मांगलिक बनाकर आपके मन की एकाग्रता को कमजोर कर रहा है। आपकी मां को प्रदोष व्रत करना चाहिए। जीवन के बारे में विस्तार से जानकारी के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।
गुरु जी, मेरा स्वास्थ्य और शिक्षा कैसी रहेगी?
– संजय पांडे
(जन्म- ६ नवंबर २०१९, समय- रात्रि २.१६, स्थान- मुंबई)
संजय जी, आपका जन्म बुधवार के दिन हुआ है। यदि लग्न की बात करें तो सिंह लग्न में आपका जन्म हुआ है और आपकी राशि कुंभ बन रही है। सिंह लग्न के लोग बड़े पुरुषार्थी और मेधावी होते हैं। लेकिन आपकी राशि कुंभ पर शनि की साढ़ेसाती का भी प्रभाव चल रहा है इसलिए आपको प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ सुनना चाहिए। ऐसा करने पर आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और शिक्षा भी अच्छी हो जाएगी। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए आपको संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाना चाहिए।
गुरु जी, अस्वस्थ रहता हूं, कोई उपाय बताएं?
– मोहनलाल जायसवाल
(जन्म- ८ अगस्त १९७४, समय- रात्रि १२.५५, स्थान- भदोही, उत्तर प्रदेश)
मोहनलाल जी, आपका जन्म वृष लग्न और मीन राशि में हुआ है। लग्नेश एवं षष्ठेश शुक्र द्वितीय भाव में बैठा है तथा लग्न में ही केतु बैठ करके समय-समय पर आपको डिप्रेशन में डाल देता है। आपकी कुंडली को अगर सूक्ष्मता से देखा जाए तो छठे भाव का स्वामी यदि द्वितीय स्थान पर बैठता है तो बार-बार बीमार होते हैं। आपकी कुंडली में अनंत नामक कालसर्प योग बन रहा है। इस योग के कारण जातक को व्यक्तित्व निर्माण करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। इसका प्रभाव गृहस्थ जीवन पर भी पड़ता है। मानसिक परेशानी पीछा नहीं छोड़ती और एक के बाद एक मुसीबत आती ही रहती है। व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व के निर्माण हेतु निरंतर संघर्ष करना पड़ता है। ऐसा व्यक्ति कई प्रकार के काम करके छोड़ देता है और किसी भी काम में स्थाई रुचि नहीं होती। इस समय आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती भी प्रारंभ हो गई है। कुंडली में रोगेश शुक्र की महादशा में शनि का अंतर चल रहा है। अत: आपको डिप्रेशन का होना स्वाभाविक है। वर्तमान में ग्रह शांति कराना आवश्यक है तथा अस्थाई लाभ प्राप्त करने के लिए अनंत नामक कालसर्प योग की पूजा समय-समय पर कराते रहना चाहिए। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।
गुरु जी, स्वास्थ्य खराब है। कुंडली में क्या दोष है। उसका निवारण बताएं?
– माधुरी गुप्ता
(जन्म- २१ दिसंबर २०१७, समय- सायंकाल ५.४६, स्थान- मुलुंड, मुंबई)
माधुरी जी, आपका जन्म वृष लग्न एवं मकर राशि में हुआ है। वृष लग्न का स्वामी शुक्र ग्रह है। इस लग्न में जन्म लेनेवाले जातक का चेहरा गोल एवं रंग गेंहुआ होता है। आपकी कुंडली में अष्टम भाव में बैठ करके लग्नेश एवं रोगेश ने शुक्र बालारिष्ट योग बना दिया है। इस समय आपकी कुंडली में शनि भाग्येश एवं कर्मेश शुक्र के अष्टम भाव में बैठ करके पिता के कार्य क्षेत्र एवं आपके स्वास्थ्य को भी कमजोर बना रहा है। आपकी कुंडली में कालसर्प योग और भाग्य ग्रहण दोष भी बना हुआ है। सबसे पहले स्वास्थ्य को अनुकूल बनाने के लिए बालारिष्ट योग की पूजा वैदिक विधि से कराएं। शनि की साढ़ेसाती भी चल रही है। इससे शुभ फल प्राप्त करने के लिए शनिवार को काला तिल, काली उड़द, बादाम, कोयला और नारियल शरीर से सात बार उतारा करवा करके जलाशय में बहाएं। जीवन की अन्य गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

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