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जज्बे को सलाम : दुपहिया से एशिया और यूरोप के २४ देशों की यात्रा करेंगे योगेश!

मनमोहन सिंह
५ अगस्त को वसुधैव कुटुंबकम का संदेश लेकर निकले नई मुंबई के योगेश आलेकर ग्रीस पहुंच गए हैं। योगेश अपने दुपहिया से एशिया और यूरोप के २४ देशों की यात्रा करेंगे। लगभग ६००० किलोमीटर की यात्रा कर जब योगेश ग्रीस पहुंचे तो उनका अभिभूत होना लाजिमी था। योगेश बताते हैं कि जब वे ग्रीस के ऐतिहासिक शहर एथेंस पहुंचे तो उनके दिमाग में, उन दिनों की एथेंस की छवियां मूर्त हो गईं, जब उन्होंने स्कूल की किताबों में एथेंस के बारे में पढ़ा था। ऐतिहासिक शहर एथेंस की कला संस्कृति को देखकर वे मोहित हो रहे हैं।
ग्रीस पहुंचने से पहले योगेश ईरान और तुर्की की यात्रा कर चुके हैं। वे बताते हैं कि जब वे तुर्की के ऐतिहासिक शहर इस्तांबुल पहुंचे तो वहां के स्थानीय रोटरी क्लब ने उनका भव्य स्वागत किया। तुर्की की राजधानी अंकारा में हिंदुस्थान के राजदूत
डॉ. एस. पॉल से उनकी मुलाकात भी यादगार रही। योगेश बताते हैं कि जब उन्होंने डॉ. पॉल से अपनी यात्रा के उद्देश्य वसुधैव कुटुंबकम को विश्व भर में पहुंचाने की बात बताई तो वह भाव-विभोर हो गए। डॉ. पॉल ने उन्हें शुभकामना पत्र देते हुए उनकी यात्रा की सफलता की कामना की।
योगेश बताते हैं कि हिंदुस्थान का ब्रिद वाक्य वसुधैव कुटुंबकम दरअसल हम सभी को दुनिया भर से जोड़कर रखता है। योगेश गर्व से कहते हैं, `हिंदुस्थान विश्व को एक कुटुंब समझता है और जब वह यह बात अलग-अलग देश में पहुंचकर वहां के लोगों से शेयर करते हैं तो उनकी नजर में हिंदुस्थान और हिंदुस्थान की संस्कृति के प्रति श्रद्धा बढ़ जाती है और योगेश का सम्मान भी उनकी नजरों में बढ़ जाता है। योगेश का मानना है कि वसुधैव कुटुंबकम का प्रत्यक्ष प्रमाण उन्हें हर जगह दिखाई देता है। वे बताते हैं कि किस तरह ईरान में इरफान फिरदौस नाम के एक व्यक्ति ने उन्हें एक बड़े भाई की तरह अपनापन दिया। फिरदौस एक दुभाषिये की तरह ही नहीं, बल्कि एक जहीन इंसान की तरह योगेश के साथ रहे। योगेश बताते हैं कि जब ईरान में एक जगह उनके पास स्थानीय ईरानी करेंसी खत्म हो गई और उन लोगों ने डॉलर लेने से मना कर दिया तो उनके सामने बड़ी विकट स्थिति खड़ी हो गई। उन्होंने इसकी जानकारी फिरदौस से शेयर की, फिरदौस ने सामनेवाले के अकाउंट में ईरानी करेंसी ट्रांसफर कर दी और योगेश की मदद की। योगेश ईरान, जॉर्जिया, तुर्की, ग्रीस, बुल्गारिया, सर्बिया मॉटेनेग्रो, बोस्निया, क्रोशिया, हंगरी, ऑस्ट्रिया, लिचेस्नट, हेज, जर्मनी, स्वीटजरलैंड, इटली, फ्रांस, लक्जमबर्ग, बेल्जियम, इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, नीदरलैंड, नेपाल यात्रा करते हुए भारत लौटेंगे। शुभकामनाएं योगेश।
वसुधैव कुटुंबकम, इसका अर्थ है- धरती ही परिवार है। यह सनातन धर्म का मूल संस्कार एंव विचारधारा है। यह वाक्य भारतीय संसद के प्रवेश कक्ष में भी अंकित है।

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