सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता रोहित पवार ने संजय शिरसाट पर सिडको अध्यक्ष पद पर रहते हुए ५,००० करोड़ रुपए का बड़ा घोटाला करने का आरोप लगाया है। रोहित पवार ने दावा किया है कि उनके पास इस घोटाले से संबंधित पुख्ता दस्तावेज हैं, जो इस बात को साबित करते हैं। इस आरोप ने राज्य सरकार को मुश्किल में डाल दिया है और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
रोहित पवार के अनुसार, जिस जमीन को दान में दिया गया है, वह ब्रिटिश शासनकाल में बिवलकर परिवार को दी गई थी, जिसने कथित तौर पर मराठा साम्राज्य के खिलाफ अंग्रेजों की मदद की थी। यह जमीन बाद में विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से सरकार के पास वापस आ गई थी। बिवलकर परिवार ने इस जमीन को वापस पाने के लिए कई बार प्रयास किए, लेकिन सिडको ने १९९४, १९९५, २०१० और २०२३ में चार बार उनके आवेदनों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वे न तो खाताधारक थे और न ही जमीन कृषि योग्य थी। यह जमीन दरअसल गरीबों के लिए घर बनाने और संरक्षित वन क्षेत्र के लिए थी।
नियमों को ताक पर रखकर ‘तोहफा‘
रोहित पवार ने आरोप लगाया कि २०२४ में सिडको अध्यक्ष बनते ही संजय शिरसाट ने पहली ही बैठक में लगभग १५ एकड़ जमीन बिवलकर परिवार को दे दी। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया जब पिछले अध्यक्ष ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इसके बाद उनका तबादला कर दिया गया था। पवार के अनुसार, शिरसाट ने चुनाव आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले, सिर्फ २५ दिनों के भीतर इस ‘जमीन के खेल’ को अंजाम दिया।
गरीबों और किसानों के साथ ‘धोखा’
बनाए जा सकते थे घर- रोहित पवार ने इस कदम को स्थानीय किसानों और गरीबों के साथ धोखा बताया। उनका कहना है कि इस जमीन पर लगभग १०,००० गरीबों के लिए घर बनाए जा सकते थे।
नियम दरकिनार- एक तरफ जहां स्थानीय किसान अपनी जमीन के लिए सालों से संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मराठा विरोधी इतिहास वाले परिवार को नियमों को दरकिनार कर इतनी बड़ी जमीन दे दी गई।
