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मराठा आरक्षण मामले में सरकार के गले की फांस बन रहे हैं जरांगे! … शिंदे-फडणवीस की चिंता बढ़ी

सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे की पदयात्रा मुंबई की तरफ जैसे-जैसे बढ़ रही है, वैसे-वैसे भीड़ भी बढ़ती जा रही है। जरांगे अपनी मांग पर अड़े हुए हैं और मराठाओं को ओबीसी के तहत आरक्षण दिए जाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। मनोज जरांगे आज २६ जनवरी को मुंबई के आजाद मैदान में एक विशाल रैली को संबोधित करेंगे। जरांगे कह चुके हैं कि अगर महाराष्ट्र सरकार आंदोलन को नजरअंदाज करेगी तो वो मुंबई में ही भूख हड़ताल कर देंगे। ऐसे में सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली ईडी सरकार की चिंता बढ़ती जा रही है।
मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे के साथ जिस तरह से भीड़ जुट रही है, अगर वो मुंबई में दाखिल होती है तो एकनाथ शिंदे सरकार के लिए भीड़ को संभालना एक चुनौती हो सकती है। मुंबई हाई कोर्ट ने भी शिंदे सरकार को यह सुनिश्चित करने को कहा कि शहर की सड़कों पर जाम न हो। शिंदे सरकार के लिए यह राजनीतिक रूप से विस्फोटक स्थिति बन गई है, क्योंकि २०२४ का लोकसभा चुनाव सिर पर है, ऐसी स्थिति में कोई अप्रिय घटना न घट जाए, इसको लेकर शिंदे सरकार की नींद उड़ गई है।। मनोज जरांगे ने २५ अक्टूबर २०२३ को जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में भूख हड़ताल शुरू की थी। उस समय आंदोलन से जुड़े २९ लोगों ने सुसाइड कर लिया था, जिससे शिंदे सरकार पर दबाव बढ़ गया था।
आरक्षण का फॉर्मूला नहीं तलाश सकी सरकार
महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार २० जनवरी २०२४ तक मराठा समुदाय के आरक्षण का फॉर्मूला तलाश नहीं सकी। इसकी वजह यह थी कि महाराष्ट्र सरकार के लिए कशमकश की स्थिति बनी है, क्योंकि ओबीसी समुदाय अपने आरक्षण में से कुछ भी प्रमुख मराठों को नहीं देना चाहते हैं। भाजपा सहित सभी पार्टियों के ओबीसी नेता खुलकर विरोध में उतर गए थे और साफ कर दिया था कि वे अपना कोटा घटना बर्दाश्त नहीं करेंगे। ऐसे में शिंदे सरकार बैकफुट पर आ गई है।

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