मुख्यपृष्ठखबरेंसरोकार: राज्य सरकार ने दिया चीकू किसानों को ‘बूस्टर डोज’!

सरोकार: राज्य सरकार ने दिया चीकू किसानों को ‘बूस्टर डोज’!

 सिर्फ १० रुपए में मिलेगा जीआई टैग का प्रमाण पत्र
 ५,००० से ज्यादा किसानों को मिलेगा इसका लाभ
 पहले जीआई टैग के देने पड़ते थे `४,४००
 १२,००० एकड़ में होती है चीकू की खेती
योगेंद्र सिहं ठाकुर।
पालघर में चीकू की खेती करनेवाले किसानों को राज्य सरकार ने बड़ी राहत दी है। यहां चीकू की खेती करनेवाले करीब ५ हजार किसानों को सरकार मात्र १० रुपए में जीआई टैग का प्रमाण पत्र देगी। जीआई टैग देने की शुरुआत २०१६ में हुई थी। लेकिन इसके प्रमाण पत्र के लिए पहले किसानों को ४,४०० रुपए देने होते थे। पालघर के डहाणू, वानगांव, घोलवड, बोर्डी सहित अन्य तटीय क्षेत्रों में करीब साढ़े १२ हजार एकड़ में इस समय चीकू की खेती होती है और अब यहां से चीकू का एक्सपोर्ट भी शुरू कर दिया गया है। इसका सीधा लाभ चीकू की खेती करनेवाले किसानों को मिलना शुरू हो गया है। मीठे और अनोखे स्वादवाले यहां के चीकू की दिल्ली सहित देश के अन्य भागों में हमेशा मांग बनी रहती है और अब जीआई टैग का प्रमाण पत्र मिलने से चीकू के किसान लाभान्वित होंगे।

पालघर जिले में इन दिनों १२ हजार एकड़ से ज्यादा भूमि पर चीकू की खेती हो रही है। चीकू की खेती करनेवाले ५,००० किसानों में से मात्र १४७ किसान ही अधिकृत जीआई उपयोगकर्ता हैं। लेकिन अब जीआई नामांकन प्रमाण पत्र के लिए १० रुपए फीस तय होने पर माना जा रहा कि ज्यादातर किसानों को अब इस प्रमाण पत्र को लेने में मदद मिलेगी। जीआई टैग का प्रमाण पत्र मिलने के बाद उस क्षेत्र के फल को विशेष पहचान मिलने के साथ बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। अब तक जीआई प्रमाणीकरण महाराष्ट्र राज्य चीकू उत्पादक संघ देता आया  है। पालघर का चीकू अपने मीठे और अनोखे स्वाद के लिए जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि घोलवाड गांव की वैâल्शियम युक्त मिट्टी से यहां के चीकू को अद्वितीय स्वाद प्राप्त होता है।
चीकू आलू की तरह दिखनेवाला फल है, जो हर मौसम में आसानी से मिल जाता है। चीकू को सपोटा भी कहते हैं। चीकू को कई गुणों की खान माना जाता है। चीकू पेट की समस्याओं को दूर करने के साथ हेल्दी तरीके से वजन कम करने में मदद करता है। चीकू में मौजूद एंटी ऑक्सिडेंट्स और एंटी इंफ्लेमेट्री एजेंट होने की वजह से यह कब्ज, दस्त जैसी कई समस्याओं को दूर करने में मददगार होता है।
बनते हैं दर्जनों प्रोडक्ट्स
चीकू से तरह-तरह के प्रोडक्ट्स भी बनाए जाते हैं। जैसे कि चीकू के चिप्स, अचार, मिठाई, फूड बीयर आदि। डहाणू के बोर्डी इलाके में हर साल चीकू के फेस्टिवल का आयोजन भी होता है, जो काफी प्रसिद्ध है। इसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।
ये है जीआई टैग का महत्व
जीआई का मतलब होता है भौगोलिक संकेत। जीआई टैग एक प्रतीक है, जो मुख्य रूप से किसी उत्पाद को उसके मूल क्षेत्र से जोड़ने के लिए दिया जाता है। जिस वस्तु को यह टैग मिलता है, वह उसकी विशेषता बताता है। आसान शब्दों में कहें तो जीआई टैग बताता है कि कोई उत्पाद विशेष कहां पैदा होता है या कहां बनाया जाता है?
२५,००० लोगों को रोजगार
चीकू उत्पादन से यहां के करीब २५,००० लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। चीकू स्थानीय किसानों की कमाई का मुख्य जरिया है। जीआई टैग का प्रमाण पत्र १० रुपए में मिलने से अब बड़ी संख्या में किसानों को इसका लाभ मिलेगा।
-संजय तिवारी, व्यापारी डहाणू
बेहतर बाजार मूल्य
जीआई टैग मिलने से चीकू किसानों को चीकू का बेहतर बाजार मूल्य मिलेगा। जीआई टैग किसानों को अपने सामान की ब्रांडिंग करने की अनुमति देता है। इससे बड़े व्यापारी, निर्यातक और उपभोक्ता चीकू और इसके प्रोडक्ट को खरीदने के लिए आकर्षित होंगे।
-अमित बोथरा, किसान डहाणू
किसानों को प्रोत्साहित करना है
जीआई टैग के प्रमाण पत्र के लिए अब किसानों को मात्र १० रुपए का भुगतान करना होगा। किसानों को इसके लिए खेती का सातबारा और अन्य कागजात जोड़ने होंगे। ज्यादा-से-ज्यादा चीकू के किसानों को इसका लाभ देने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों को किसानों को चिह्नित कर उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित करने के आदेश दिए गए हैं।
-संतोष पवार,
तालुका कृषि अधिकारी डहाणू

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