मुख्यपृष्ठस्तंभसरोकार : अब खत्म होगा टीबी का टेंशन!...मनपा ने उठाया समूल खात्मे...

सरोकार : अब खत्म होगा टीबी का टेंशन!…मनपा ने उठाया समूल खात्मे का बीड़ा

• साल २०२५ तक निर्धारित किया समय
• मुंबई में ड्रग सेंसिटिव ३ प्रतिशत रोगी
• हर साल ५ हजार रोगियों का होता है निदान
• क्लिनिक को मनपा ने किया है कार्यान्वित

धीरेंद्र उपाध्याय। ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) हिंदुस्थान में पैâली प्रमुख बीमारियों में से एक है। हिंदुस्थान में विश्व के सबसे ज्यादा टीबी के मरीज हैं। २०२० में दुनिया भर में जितने भी मामले आए उनमें से भारत में टीबी के २६ प्रतिशत मामले सामने आए। ट्यूबरकुलोसिस बीमारी एक संक्रामक रोग है जो आमतौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर टीबी को पैâलानेवाला बैक्टीरिया एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। इस बीमारी का इलाज लंबे समय चलता है। वहीं मुंबई मनपा ने शहर में बढ़ते केसेस को देखते हुए टीबी का समूल खात्मा करने का बीड़ा उठाया है। मनपा प्रशासन ने लक्ष्य रखा है कि मुंबई में २०२५ तक सभी मरीजों की पहचान कर उनका ुपचारकर इस बीमारी को दूर भगाएंगे। मनपा की तरफ से कहा गया है कि देश में मिल रहे ड्रग सेंसिटिव रोगियों में से ३ फीसदी मुंबई में मिल रहे हैं। इसके साथ ही हर साल शहर में औसतन ४ से ५ हजार ड्रग सेंसिटिव रोगियों की पहचान होती है।

हराएगी वर्चुअल डिफिकल्ट टू ट्रीट क्लिनिक
मुंबई में वर्चुअल डिफिकल्ट टू ट्रीट टीबी क्लिनिक योजना ट्यूबरकुलोसिस को हराएगी। इसके तहत बीते महीने मनपा ने इको फ्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर इस क्लीनिक को कार्यान्वित किया। इको प्लेटफॉर्म मुंबई के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प है, जो मुंबई में ड्रग सेंसिटिव प्रतिरोधी टीबी रोगियों के लिए कारगर साबित होगा। मुंबई में मरीजों की संख्या को देखते हुए इस योजना को चलाया जा रहा है। राज्य क्षय रोग विभाग स्तर पर डिफिकल्ट टू टीबी क्लिनिक समिति में मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञों की सलाह से मुंबई में दवा प्रतिरोधी टीबी रोगियों के इलाज का लाभ अमूल्य होगा। देश में कुल टीबी रोगियों में से करीब १४ फीसदी ड्रग रेसिस्टेंट टीबी के मरीज मुंबई में हैं। महाराष्ट्र में कुल ड्रग सेंसिटिव टीबी रोगियों में से लगभग ५८ फीसदी मुंबई में पाए जाते हैं।
दूसरों को करते संक्रमित
मुंबई में कुछ ड्रग सेंसिटिव टीबी रोगियों के थूक की रिपोर्ट इतनी जटिल है कि उनके लिए जिला स्तर पर दवा शुरू करना मुश्किल है। ऐसे रोगियों को इलाज के लिए नोडल सेंटर रेफर करना पड़ता है। यदि ये रोगी यात्रा करते हैं, तो दूसरों को टीबी होने का खतरा हो सकता है। इसे देखते हुए ऐसे टीबी रोगियों की यात्रा को कम करने और उन्हें उनके घरों के ठीक बगल में इलाज उपलब्ध कराने की जरूरत है।
कार्यान्वित हैं २२ डीआर टीबी केंद्र
ड्रग सेंसिटिव टीबी रोगियों के इलाज के लिए मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों में २२ डीआर टीबी केंद्र कार्यरत हैं, जिनमें से ४ उपचार केंद्र मेडिकल कॉलेजों के तहत नोडल सेंटर के रूप में कार्य कर रहे हैं। अन्य दवा प्रतिरोधी टीबी उपचार केंद्र भी इस नोडल सेंटर से जुड़े हुए हैं।
अलग सुविधा भी शुरू की गई
वर्तमान में केंद्रीय और राज्य क्षय रोग विभाग स्तर पर वर्चुअल डिफिकल्ट टू ट्रीटमेंट टीबी क्लिनिक विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में ड्रग सेंसिटिव टीबी रोगियों का इलाज करने का काम कर रहा है। हालांकि यह सुविधा पूरे राज्य के लिए है। साथ ही लंबित मामलों की संख्या अधिक होने के कारण मुंबई में ऐसे टीबी रोगियों का उपचार शुरू करने और मार्गदर्शन में देरी हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए मनपा ने अब मुंबई के लिए अलग से सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।

खतरा होगा कम
`नोडल सेंटर’ में रेफर किए जाने वाले ड्रग सेंसिटिव मरीजों की संख्या में कमी आएगी। इसके साथ ही टीबी के ऐसे रोगियों को दवा शुरू करने के लिए सफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। परिणामस्वरूप दूसरों के संक्रमित होने का खतरा नहीं होगा।
-लक्ष्मी चौबे, नागरिक

जल्द संभव हो सकेगा उपचार
ड्रग सेंसिटिव रोगियों का जल्द उपचार संभव हो सकेगा। साथ ही जिला स्तर पर विशेष विशेषज्ञों और स्वास्थ्यकर्मियों के ज्ञान में भी वृद्धि होने के साथ ही उनकी कार्यक्षमता भी मजबूत होगी।
-जिलाजीत तिवारी, नागरिक

रोगियों के लिए वर्चुअल कॉन्फ्रेंस
वर्चुअल डिफिकल्ट टू ट्रीट टीबी क्लिनिक प्रौढ़ ड्रग सेंसिटिव टीबी रोगियों के इलाज के लिए महीने में एक बार और ड्रग सेंसिटिव किशोर टीबी रोगियों के लिए दो बार सभा का वर्च्युअल कॉन्प्रâेंस किया जाएगा।
-डॉ. मंगला गोमारे
कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी, मनपा

अन्य समाचार