मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनारोग होगा छूमंतर!... ऑपरेशन थिएटर की सुविधाओं में बढ़ोतरी

रोग होगा छूमंतर!… ऑपरेशन थिएटर की सुविधाओं में बढ़ोतरी

• मेडिकल कॉलेज बनाने की हो रही है मांग

अनिल मिश्र।  कोई शहर कितना विकसित है, यह उस शहर में आम लोगों के लिए उपलब्ध तमाम सुविधाओं से लगाया जाता है। इनमें चिकित्सा सुविधा प्रमुख है। कोरोना जैसी महामारी के कारण विभिन्न अस्पताल व डॉक्टरों पर मरीजों का बोझ काफी ज्यादा बढ़ गया है। कोरोना के कारण अच्छे हुए मरीजों में भी दूसरी कई समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। इसके अलावा सामान्य रोगों के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। मुंबई से करीब ५० किलोमीटर की दूरी पर स्थित उल्हासनगर की आबादी हाल के वर्षों में काफी बढ़ चुकी है। यहां आम मरीजों के उपचार के लिए एक सरकारी मध्यवर्ती अस्पताल मौजूद है। मगर आज की जरूरत और बढ़ते मरीजों के हिसाब से इस अस्पताल को आधुनिक बनाने की मांग काफी समय से की जा रही थी। अब इसे आधुनिक बनाने का काम शुरू हो चुका है और जल्द ही यहां के नागरिकों को उपचार के लिए एक बेहतर अस्पताल उपलब्ध हो जाएगा।
गौरतलब है कि उल्हासनगर वैंâप नंबर ३ स्थित मध्यवर्ती अस्पताल में पालकमंत्री एकनाथ शिंदे व सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के प्रयास से वैद्यकीय परीक्षण के साधन के अलावा तरह-तरह की सुविधाओं में बढ़ोतरी हो रही है। अस्पताल को सुविधायुक्त बनाने के पीछे का तर्क है कि गरीब मरीजों को बेहतरीन सेवा मिल सके। मरीजों को उल्हासनगर से बाहर न जाना पड़े।
डिलिवरी वॉर्ड होगा मॉड्यूलर
तीन ऑपरेशन थिएटर को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। आंख के ऑपरेशन थिएटर को भी मॉड्यूलर बनाया जा रहा है। अस्पताल की इमारत जो बरसात में रिसती थी, उसके ऊपर शेड लगाया गया है। डिलेवरी वॉर्ड को भी मॉड्यूलर बनाया गया है। पोस्टमार्टम रूम में १२ शव रखने की क्षमता है। उसे बढ़ाकर १६ किया जा रहा है। पोस्टमार्टम रूम की मरम्मत के लिए ८२ लाख रुपए का बजट दिया गया है। दो गेट बनाए जा रहे हैं। अस्पताल परिसर में बगीचे का सौंदर्यीकरण शुरू है। अस्पताल के बेड की क्षमता भी बढ़ाने का विचार चल रहा है। फिलहाल अस्पताल में २०२ बेड हैं। इसे बढ़ाकर ३५० बेड करने की मांग चल रही है। ६ डायलिसिस मशीन को बढ़ाकर १० कर दिया गया है। ३ शिफ्ट में २० लोगों की डायलिसिस किया जा रहा है। बच्चों के वॉर्ड को भी मॉड्यूलर किया जा रहा है। थलसेमिया विभाग चल रहा है।
एमआरआई मशीन की मांग
अस्पताल में एमआरआई मशीन की मांग की गई है। कुछ विशेषज्ञ डॉक्टरों की मांग की गई है। अस्पताल को आग से सुरक्षित रखने के लिए फायर ऑडिट कर अग्निशमन यंत्रणा लगाने के लिए सरकार की ओर से मंजूरी दी गई है। उसके लिए २ करोड़ ४० लाख रुपए का बजट मंजूर किया गया है। २ एंबुलेंस की मांग की गई है। नर्सिंग कॉलेज के अलावा ५० बेड का अति दक्षता विभाग (आईसीयू) का कार्य प्रगति पर है। अस्पताल को मेडिकल कॉलेज बनाने की भी मांग काफी समय से शुरू है।

गरीब मरीजों को होगा फायदा
महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल में इस अस्पताल का बेहतरीन सुधार हो रहा है। इसे सर्वसुविधायुक्त बनाने पर बल दिया जा रहा है। इसका फायदा गरीब मरीजों को मिलेगा। अस्पताल का सर्वांगीण विकास होने के बाद मरीजों को उपचार के लिए ठाणे, मुंबई के अस्पताल में नहीं जाना होगा। अस्पताल में मरीजों का बेहतरीन उपचार हो इसके लिए सिविल सर्जन डॉ. सुधाकर शिंदे व निवासी सिविल सर्जन डॉ.क्टर शशिकांत ढोने द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं।
-राजू तेलकर, स्थानीय निवासी
अस्पताल का कायाकल्प
पालकमंत्री एकनाथ शिंदे, सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे, विधायक डॉ. बालाजी किणीकर व स्थानीय शिवसेना नेताओं की मेहनत का फल है कि मध्यवर्ती अस्पताल का कायाकल्प हो रहा है। अस्पताल के विकास में महाविकास आघाड़ी की प्रमुख भूमिका है।
-महेंद्र यादव, स्थानीय निवासी

८०ज्ञ् समस्याएं खत्म
इस अस्पताल की ८० फीसदी समस्याओं का समाधान हो गया है। अस्पताल के आंतरिक क्षेत्र की सड़कों को सीमेंट से बनाया जा रहा है। २ बंद लिफ्ट की मरम्मत की जा रही है और इसे जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा।
-डॉ. सुधाकर शिंदे, सिविल सर्जन

अन्य समाचार