मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाव्यंग्य विधा नहीं दुविधा है- डॉ.वागीश सारस्वत

व्यंग्य विधा नहीं दुविधा है- डॉ.वागीश सारस्वत

रचना के हर शब्द, हर वाक्य, हर पैरा में व्यंग्य जरूरी नहीं है। कई बार व्यंग्य करने के लिए एक कथा का निर्माण करना पड़ता है। कथा की अंतिम पंक्ति व्यंग्य की पराकाष्ठा होती है। ऐसे में पूरी कथा को व्यंग्य ही कहा जाएगा। डॉ. प्रेम जनमेजय का `बर्फ का पानी’ इसका सबसे बढ़िया उदाहरण है।
अखबारी और साहित्यिक व्यंग्य विभाजित करने से कोई हल नहीं निकल सकता। अखबारी कॉलम से भी बेहतरीन व्यंग्य रचनाएं मिली हैं। किसी भी रचनाकार की सभी रचनाएं मील का पत्थर नहीं हो सकतीं। ज्यादातर रचनाएं साधारण होती हैं। बहुत कम रचनाएं असाधारण होती हैं। कालजयी तो अंगुलियों पर गिनी जा सकती हैं। व्यंग्य के साथ सबसे बड़ी मुश्किल तात्कालिकता की होती है। ऐसी रचनाएं, जिनमें वर्तमान का उल्लेख है उन्हें देखने का नजरिया बदलना होगा। इन रचनाओं को ऐतिहासिक रेफरेंस दस्तावेज के रूप में लेना होगा, पर बहुत मुश्किल है। एक तो हम ज्यादातर हिंदी लेखक पूर्वाग्रही, संकुचित सोच, अहंकारी, गुस्सैल और स्वयं को सर्वज्ञानी मानने वाले होते हैं। ऐसे में खुलेपन की उम्मीद करना बेमानी है।
दूसरे हम हिंदी के लेखक गुटों में बंटे हैं। हर पल चालाकियों की जुगत भिड़ाते रहते हैं। स्वयं और अपने गुट के लेखकों को ही पहचानते हैं। बाकी के कितना भी अच्छा लिख रहे हों, पर हम उनका जिक्र तक नहीं करेंगे।
अहो रूपम् अहो ध्वनिम् जाल में से बाहर निकल नहीं सकते क्योंकि ये जाल अपने सुख और सुविधा के लिए हमने बुना है। व्यंग्य के लिए अनेक रचनाकार इसे विधा मानने के लिए लड़ते रहे हैं। कई तो अब तक अड़े हैं कि विधा है। ये उनकी सुविधा है। मैं नहीं मानता। व्यंग्य हर किसी में हो रहा है। कविता में, कहानी में, नाटक में उपन्यास में और निबंध में यहां तक कि पत्र लेखन में भी व्यंग्य है। व्यंग्य को विधा कहने वाले सबसे पहले कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास और निबंध के साथ व्यंग्य जोड़ना बंद कर दें, जो फिलहाल तो नहीं किया जा सकता। क्योंकि इन दिनों अनेक व्यंग्यकारों में उपन्यास लिखने की होड़ लगी है।
शरद जोशी ने कहा था, `मुझे व्यंग्य लिखने में कष्ट होता है क्या इसे व्यंग नहीं लिख सकते?’ और भी अनेक रचनाकार आए जो `व्यंग’ लिखने के पैरोकार थे। पर हिंदी को तालाब का ठहरा पानी बनाने में जुटे विद्वानों ने मंजूर नहीं किया।
अनेक सवाल हैं?
पर उत्तर नदारद हैं।

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