मुख्यपृष्ठस्तंभसटायर : नया सिलेबस जिंदाबाद

सटायर : नया सिलेबस जिंदाबाद

डॉ. रवींद्र कुमार

मुझे बेहद खुशी हुई जब पता चला कि इब्ने सफी साब के जासूसी नॉवेल, गुलशन नंदा जी के सामाजिक/रोमांटिक और वर्दीवाला गुंडा आदि स्कूल-कॉलेज में पढ़ाए जाएंगे। काश! ये हमारे दौर में होता तो इनको पढ़ते हुए रंगे हाथों पकड़े जाने पर हमें थर्ड डिग्री यातनाओं से नहीं गुजरना पड़ता। खुलेआम पढ़ते और कहीं-कहीं तो इसके ट्यूशन और कोचिंग सेंटर भी खुल जाते। अपने वक्त में तो हमें ये और इसी तरह की तमाम किताबें, कोर्स की किताब में छुपाकर पढ़नी पड़ती थीं। उसमें भी हमेशा खटका लगा रहता था कि अब पकड़े गए, तब पकड़े गए। अब सब कितना खुला-खुला खेल फर्रूखाबादी हो गया है।
सोचनेवाली बात है कि ये साइन थीटा, कौस थीटा, ट्रिगनोमैट्री, केमिस्ट्री, फिजिक्स, रेल की रफ्तार बताओ, एक मकान इतने मजदूर इतने दिन में बनाते हैं तो… आदि-आदि जब से स्कूल और कॉलेज छोड़ा ये भी वहीं छूट गए। सच कहूं तो दोबारा कभी जीवन में इनकी जरूरत ही नहीं पड़ी और ये कभी काम नहीं आए, जबकि `वर्दीवाला गुंडा’ आज भी हम सबके दैनिक जीवन में पैठ लगाए है। उसी तरह झील के उस पार, कटी पतंग सभी तो खूब ही रिलेवेंट हैं।
साइबर क्राइम/डेटिंग एप के जमाने में कुछ सम्मानित लेखकगण किताबों में आने से रह गए। सिलेबस में भले नहीं, मगर खूब पढ़े जाते हैं, कोर्स की किताबों से कहीं कालजयी हैं। बस अब प्रतीक्षा है कि काला जादू, सिर कटा भूत, चीखती लाशें, खजाने का रहस्य, देवर-भाभी विनोद, किस्सा तोता-मैना, जीजा-साली चुटकुले आदि और आ जाएं तो सिलेबस सही मायने में संपूर्ण समावेशी हो जाएगा। सोचो विद्यार्थी कितना मन लगाकर पढ़ेंगे।
देखिए डर, रोमांस, जासूसी और सजगता जीवन का एक अहम हिस्सा है। यह २१वीं सदी है। अब शेक्सपियर, प्रेमचंद, टॉलस्टॉय, चार्ल्स डिकन्स नहीं चल पाएंगे। उतनी पेशेंस किसके पास है? आज के पेगासस और जामताड़ा के युग में भावी नागरिक वर्दी वाला गुंडा, वैâप्टन हमीद और जेम्स बांड बनना चाहेगा। उसे बनना पड़ेगा, अत: अच्छा है स्कूल-कॉलेज से ही वह तैयार होकर निकले।
मशहूर शायर तहजीब हाफीr का वो शेर इसी मौजू के लिए लिखा लगता है-
तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है
मुहब्बत-मुहब्बत बड़ा जानते हो
तो फिर ये बताओ कि तुम उसकी आंखों के बारे में क्या जानते हो
ये जुगराफिया, फलसफा, साइंस, सायकोलॉजी रियाजें वगैरह
ये सब जानना भी अहम है मगर
उसके घर का पता जानते हो।

नोट: इस पाठ्यक्रम पर आधारित प्रश्न-पत्र भी कम रोचक न होंगे मसलन-
१. कटी पतंग और झील के उस पार कथानक का तुलनात्मक अध्ययन।
२. कत्ल का केस सुलझाने में कैप्टन हमीद की कार्य प्रणाली कर्नल विनोद की शैली से कितनी भिन्न है।
३. समाज को वर्दीवाले गुंडे की जरूरत आज सर्वाधिक है। अपने विचार रखें।
४. एक आदर्श जासूस की सफलता में हैट, सिगार, ओवरकोट और ग्लब्ज की भूमिका।
५. गुलशन नंदा जी के लेखन में नारी सशक्तिकरण और स्त्री विमर्श

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