डॉ. रवींद्र कुमार
नेतानी महोदया ने सबको ताकीद की है कि खबरदार मेरे सामने कोई लोकल मुद्दा लाए तो। मेरे पास सिर्फ और सिर्फ वो ही मुद्दे लाए जाएं, जो एक मुझ जैसी सांसद के स्तर के हों। भई! पॉलिसी इशू लाएं। ये क्या कि घर का दरवाजा बंद नहीं हो रहा तो आप मुंह उठाए मेरे दरवाजे पर चले आए। ये क्या सांसद का काम है कि आपकी फसल, आपके दरवाजे को ठीक कराता फिरे। कुछ तो अक्ल से काम करो। क्या आप यू.एन.ओ. में अपनी गली की नाली साफ कराने जाएंगे? नहीं न! बस तो ऐसे ही केवल देश, बोले तो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दे ही मेरे विचार को लाए जाएं।
खबरदार! जो मेरे दफ्तर में कोई छोटा मुद्दा लेकर आया तो। आप तो ये बताओ कि आपके विचार से अब चीन को क्या करना चाहिए? आप बताइए कि अमेरीका में राष्ट्रपति किसको बनना चाहिए और क्यूं। आप बताएं रूस और यूक्रेन के युद्ध में अब विश्वगुरु भारत को नया क्या करना है?
आप मुझे बताइए कि मुद्रा स्फीति की दर का क्या करना है। भारत को ५ ट्रिलियन की इकॉनमी जल्दी से जल्दी बनाने में आपका क्या योगदान है। वो प्रसिद्ध कहावत है न ‘ये मत पूछो कि देश आपके लिए क्या कर सकता है, ये पूछो कि आप देश के लिए क्या कर सकते हो।’ ये दरवाजे, खिड़की, फसल, सेब-संतरे, बाढ़-सूखा से ऊपर उठो। देखो आदमी कहां से कहां पहुंच गया है। एक आप हैं जो अब भी अपना-अपना रोना लिए बैठे हैं। हाय! मेरी नौकरी, हाए! हम बेरोजगार हैं। हाय! महंगाई। तुम्हें अपने रोने-पीटने से फुर्सत मिले तो देश के बारे में भी सोचना। कितना काम अभी बाकी है। मुझे दम मारने की फुर्सत नहीं और एक आप हैं, जिसके दुखड़े ही खत्म नहीं होते। क्या मैंने आपसे अपने इलेक्शन में ऐसा कोई वादा किया था कि मैं आपके दरवाजे ठीक कराऊंगी। आप लोकल मुद्दे, जो कि मात्र राज्य स्तर के हैं या जिले स्तर के हैं या फिर मात्र गांव-खेड़े के लेवल के हैं आप उन्हें मेरे पास लेकर फटकना भी नहीं। और हां सभी मुद्दे फॉन्ट साइज १४ में मंगल फॉन्ट में टाइप करा कर ७ प्रतिलिपि में लाएं। डबल स्पेस में ए-४ साइज के पेपर पर। मुझे इतना टाइम नहीं कि मैं आपके दुखड़े सुनूं। बस आओ, अपनी अर्जी दो और पीछे मुड़कर देखे बिना नौ दो ग्यारह हो जाओ। क्या हो जाओ? नौ दो ग्यारह। ये दफ्तर मैंने आपके ऊंघने के लिए नहीं खोला है। दफ्तर के नाम पर न जाएं, भले ही नाम ‘संवाद’ है मगर यहां संवाद मैं करूंगी आप सिर्फ सुनेंगे। आई बात समझ में। और एक आखिरी बात अगर कोई पर्यटक मेरे दफ्तर के आसपास भी दिख गया तो उसको मैंने जिंदगीभर के लिए किसी और जगह के पर्यटन लायक नहीं छोड़ना है। मेरे दफ्तर में सिर्फ मेरे चुनाव क्षेत्र के लोग आएंगे और कोई नहीं, तो कोई नहीं। पड़ोसी चुनाव क्षेत्र का हो या बाहर-गांव का।
हां, अगर आप मेरे लेटेस्ट फिल्म की टिकट का काउंटर फॉइल दिखाएंगे तो आपको एंट्री मिलेगी फिर चाहे आपने वो फिल्म किसी भी शहर में देखी हो।