मुख्यपृष्ठनए समाचारसटायर : स्टार प्रचारक का दर्द साब, कोई हमको बुलाएगा कि नहीं!

सटायर : स्टार प्रचारक का दर्द साब, कोई हमको बुलाएगा कि नहीं!

डॉ. रवींद्र कुमार

जी हां, मुझे बतौर प्रचारक आगामी चुनाव में बुलाया नहीं जा रहा। यूं इस बार बड़ों-बड़ों का नाम स्टार प्रचारक सूची में नहीं है। वे बड़े लोग हैं। हिमालय-विमालय जा सकते हैं। मैं हिमालय तो नहीं जा सकता। अलबत्ता बाल-बच्चों को लेकर गम गलत करने पड़ोस के ‘हिमालय-मॉल’ में पिज्जा खाने चला गया। पार्टी में वरिष्ठों (बूढ़े नहीं) की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मुझे मार्गदर्शन मंडल में डाल दिया गया हो। यूं मैंने कई बार इत्तिला भिजवाई कि इन दिनों मैं खाली हूं, देश के अन्य नौजवानों की तरह बेरोजगार हूं। पार्टी चाहे तो चुनाव-प्रचार के लिए, प्रचार सभाओं में मेरी ओजमयी वाणी और लटकों-झटकों का इस्तेमाल कर सकती है। दरअसल, पहले पार्टी में एक नेता बाकी सब स्वयंसेवक होते थे। अब तो बहुत कैटेगरी हो गईं हैं। उसी में से एक है स्टार प्रचारक। सो साब हाईकमांड के न रेंगनी थी, न रेंगी कान पर जूं। अब देखना नतीजा। मैंने बहुतेरा कहा था मैं पिछली बार की तरह आपकी शान में कविताएं सुनाऊंगा। प्रतिद्वंद्वी की हास्य रस की चुटकियों से ऐसी-तैसी कर छोड़ूंगा, पर नहीं, पता नहीं क्यों किसी को इस बार ये आइडिया भाया ही नहीं और बात-बात में मेरा ही मखौल उड़ा दिया यह कह-कहकर कि ‘वाट एन आइडिया?’
हमने तो यहां तक कह दिया है कि आप को कविता-कहानी का शौक नहीं? कोई बात नहीं! हम ‘विरोधी’ खेमें में जा के अपनी चुनिंदा कविताएं और जोक्स सुना आता हूं। दोनों में आजकल वैसे भी फर्क कहां रह गया है। जोक को लय में सुना दो हास्य रस की कविता बना दो। अपने वोट नहीं पड़ते न पड़ते ससुर विरोधियों के वोट तो कटते। वो क्या कहते हैं ‘अटैक इज द बेस्ट डिफेंस।’ जब हमें पक्का हो गया कि इस बार यहां दाल नहीं गलेगी तब हम भी ‘अंडर ग्राउंड’ हो गए। कनसुआ लेते रहे कि कोई अब आये! कोई अब पुकारे! हमें बूझता हुआ आए ‘चलिए हाई कमांड ने अरजेंट बुलाया है’ मगर न जी! न कोई आना था, न आया। अब करते रहना चिंतन-शिविर में अपनी हार पर मनन-चिंतन। दाल से याद आया आपने दाल का ये किया क्या? दाल को ड्राई फ्रूट बना दिया।
आरक्षण पर आपको कहना चाहिए १०० फीसदी आरक्षण होगा, आप उल्टा बोल दिए कि इसकी समीक्षा करेंगे। सब जानते हैं समीक्षा आप बढ़ाने को तो करेंगे नहीं जरूर से जरूर घटाने को ही करेंगे। आप को कहना चाहिए था १०० फीसदी का १०० फीसदी, भारतीयों के लिए आरक्षण रहेगा। हिंदुस्थान तो पूरा का पूरा गरीब, पिछड़ा हुआ है। अत: अब न कोई दलित रहेगा और न महा-दलित, सब हिंदुस्थानी हैं। पॉपुलेशन की गिनती दुबारा से कराई जाएगी और अंत में ये गाय-चीता से ऊपर उठिए। ये गाय-बैल में कुछ नहीं रखा है सिवाय फजीहत के। कांग्रेस क्या पागल है, जो अपना चुनाव चिह्न गाय-बछड़ा से बदल कर ‘हाथ’ रखी। जिनको बीफ खाना है खाएं और जिसे पालना है पाले। ‘नॉन इशू’ को ‘इशू’ बना दिया। आपके जितने छुट भैय्ये नेता लोग ‘लूज टॉक’ करते हैं सबको बुलाकर कह दीजिये ‘खामोश….जली को आग… बुझी को राख कहते हैं…’ वगैरा वगैरा। आप सहयोगी दल भी तो ऐसे ऐसे रखे हैं कि लोग बाग हंसते हैं। अब क्या बताया जाए। गलती तो आप कर दिए। अपने साथ कुछ पढ़े-लिखे लोग रखिए, जानकार लोग रखिए, समझदार लोग रखिए। अब क्या हमारे मुंह से ही कहलवाएंगे कि हमें रखिए।

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