मुख्यपृष्ठसमाचारबच्चेदानी बचाओ! ... चिंता बढ़ा रहा है असमय हिस्टेरेक्टॉमी

बच्चेदानी बचाओ! … चिंता बढ़ा रहा है असमय हिस्टेरेक्टॉमी

•  चलाया जा रहा ‘प्रिजर्व द यूट्रस’ अभियान शुरू

सुजीत गुप्ता / मुंबई । महिला मासिक धर्म के मासिक चक्र से हर महीने गुजरती है। जब तक गर्भवती न हो जाए, यह प्रक्रिया हर महीने होती है। पीरियड्स के दिनों में कुछ महिलाओं को खून की कमी के साथ पेट में ऐंठन सहित कई असुविधाओं का सामना करना होता है। हालांकि शरीर के हिसाब से पीरियड्स के दिनों में हर महिला की समस्या अलग-अलग होती है। लेकिन कुछ असुविधाएं ऐसी हैं, जो एक महिला को अपने शरीर से बच्चेदानी यानी यूट्रस निकलवाने के लिए मजबूर करती हैं, जिसे वेजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी कहा जाता है। हालांकि इससे होनेवाले साइड इफेक्ट को देखते हुए बायर, फोगसी और आईएचडब्ल्यू काउंसिल ने हिंदुस्थान में असामयिक हिस्टेरेक्टॉमी को रोकने के लिए ‘प्रेजरव द यूट्रस’ अभियान शुरू किया है।
चिकित्सकों को किया जा रहा शिक्षित
मई में मनाए जानेवाले हिस्टेरेक्टॉमी जागरूकता माह से पहले बायर ने महिलाओं के बीच जागरूकता बढ़ाने और महत्वपूर्ण प्रजनन अंग के बारे में स्वास्थ्य देखभाल चिकित्सकों को शिक्षित करने व असामयिक या अनुचित हिस्टेरेक्टॉमी के कारण होनेवाले रोग से बचने के लिए ‘प्रेजरव द यूट्रस’ नामक एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया।
कुछ वर्षों में बढ़े मामले
हिस्टेरेक्टॉमी महिला के गर्भाशय को हटाने के लिए एक ऑपरेशन को संदर्भित करता है। हालांकि इस शब्द का प्रयोग आमतौर पर पैâलोपियन ट्यूब, अंडाशय, गर्भाशय ग्रीवा या अन्य संबंधित अंगों को हटाने के लिए भी किया जाता है। हिंदुस्थान में पिछले कुछ वर्षों में असमय हिस्टेरेक्टॉमी चिंता का कारण रहा है।
कम उम्र में हो रही शिकार
कम उम्र में महिलाओं में बच्चेदानी निकालने के मामले कुछ वर्षों में बढ़े हैं। महाराष्ट्र का गुमनामी में खोया एक जिला बीड २०१९ में सुर्खियों में आया था। यहां पर ४ हजार से भी ज्यादा महिलाएं बच्चेदानी (यूट्रस) निकलवा चुकी हैं, वो भी २५ से ३० साल की उम्र में। नेशनल पैâमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार जहां पूरे देश में यूट्रस निकालने की दर ३ प्रतिशत है, वहीं अकेले बीड में ये ३६ प्रतिशत है। स्वास्थ्य मंत्रालय निर्देश जारी कर रहा है, ताकि गैरजरूरी होने पर आगे इस तरह के मामले न हों।
यूट्रस वो संरचना है, जिसमें प्रेगनेंसी के दौरान बच्चा पलता-बढ़ता है। यह ब्लेडर और पेल्विक एरिया की हड्डियों को भी सपोर्ट करता है। हालांकि कुछ वजहों से इसे हटाना यानी वेजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी जरूरी हो जाती है।

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