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सवाल हमारे, जवाब आपके?

मुंबई में इस बार बारिश की सटीक भविष्यवाणी करने में केंद्र सरकार के अधीन आनेवाला क्षेत्रीय मौसम विभाग असफल साबित हो रहा है। पता चला कि उसका डॉप्लर रडार पिछले कई दिनों से काम ही नहीं कर रहा है। मानसून के मौसम में केंद्र सरकार की ये लापरवाही बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।
• सिर्फ बड़ी घोषणाएं
मानसून से पहले डॉप्लर रडार खराब होना और उसे मरम्मत न करवाना एक तरह से लापरवाही ही है। केंद्र सरकार बड़ी-बड़ी योजनाओं की घोषणाएं कर रही है लेकिन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान नहीं दे रही है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।
-हर्षिता गौड़, कल्याण

•मौसम विभाग फेल
बरसात को लेकर मौसम विभाग ने भारी बरसात का जिस दिन अलर्ट जारी किया, उस दिन एक बूंद भी बरसात नहीं हुई। मौसम विभाग फेल हो गया और उसके तज्ञ लोगों द्वारा की गई घोषणा ने विभाग की पोल खोलकर रख दी। अब तो केंद्र सरकार के अधीन आनेवाला मौसम विभाग मजाक बन गया है। फेल मौसम विभाग के नाम से पुकारने की नौबत आ गई है। मौसम विभाग की घोषणा से हर तबका परेशान हो गया है।
– कैलाश तिवारी, बदलापुर

•किसान होता है परेशान
मौसम विभाग की गलत जानकारी के कारण हमारे किसान परेशानी में पड़ जाते हैं। मौसम विभाग की घोषणा के आधार पर किसान बरसाती फसल की तैयारी जैसे धान की बेहन डाल देते हैं। बरसात न होने पर बेहन की रोपाई खेत में नहीं हो सकती। इससे किसान के धान की फसल अधर में लटक जाती है। बरसात की सही जानकारी पर किसान बर्बाद होने से बच सकता है।
-मालिक पाल, उल्हासनगर

•केंद्र की लापरवाही
मौसम विभाग हर बार की तरह इस बार भी फेल ही साबित हुआ है। डॉप्लर रडार की खराबी एक बहाना है। सही मायने में केंद्र की लापरवाही का ही नतीजा है कि मानसून की सटीक जानकारी मौसम विभाग नहीं दे पा रहा है।
-प्रत्यूष श्रीवास्तव, अंबरनाथ

•केंद्र का दायित्व
मानसून की सटीक जानकारी न देना केंद्र सरकार के अधीन आनेवाले क्षेत्रीय मौसम विभाग की लापरवाही ही कही जाएगी। कहा जा रहा है कि मौसम विभाग का डॉप्लर रडार पिछले कई दिनों से काम नहीं कर रहा है, जिसके कारण सही जानकारी नहीं उपलब्ध कराई जा रही है। केंद्र सरकार का यह दायित्व बनता है कि किसी विभाग में यदि कोई कमी की जानकारी है तो उसे तत्काल ठीक कराए अन्यथा मानसून में आपदा के समय बड़ी अनहोनी हो सकती है।
-चंदन कुमार, ठाणे

आज का सवाल?
कांग्रेस के नेता व सांसद राहुल गांधी से चौथे दिन की पूछताछ के बाद ईडी अधिकारियों ने उनसे कहा, ‘हम आपसे सवाल पूछते-पूछते थक गए पर आप नहीं थके।’ ईडी अधिकारियों की ये बातें इस बात का स्पष्ट इशारा है कि ईडी जबरन परेशान करने की नीयत से विपक्षी नेताओं को टारगेट कर रही है। आपको क्या लगता है?
आप क्या सोचते हैं? तुरंत लिखकर भेजें या मोबाइल नं. ९३२४१७६७६९ पर व्हॉट्सऐप करें।

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