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सवाल हमारे, जवाब आपके

लोकल ट्रेन कल बफर से टकरा गई। कल जैसा हादसा पहले भी सीएसएमटी पर हो चुका है। इस तरह के हादसे मानवीय भूल हैं या रेलवे के सिस्टम की लापरवाही?
•  गंभीर दुर्घटना की आशंका
लोकल ट्रेन आगे जाने की बजाय पीछे जाने लगे तो गंभीर दुर्घटना होने की आशंका रहती है। यह मानवीय भूल हो या सिस्टम की लापरवाही, इस पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है। ऐसी छोटी-मोटी लापरवाही कभी बड़ी दुर्घटना को आमंत्रित कर सकती है।
-विलास भोईर, नायगांव

• लगाम लगाना जरूरी
मध्य रेलवे में इस तरह की दुर्घटनाएं होती रहती हैं, जो नहीं होनी चाहिए। क्योंकि इस तरह की लापरवाही कभी बड़ी जनहानी को न्यौता दे सकती है। अति अनुभव, स्मार्टपना इस प्रकार की घटनाओं को जन्म देती हैं। चालक को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उसके हाथ में लोगों के जीवन की स्टेयरिंग है।
-किशन भाटिया, उल्हासनगर

• सिस्टम की लापरवाही
लोकल ट्रेन आगे जाने के बदले पीछे चलने लगे तो यह निश्चित तौर पर सिस्टम की लापरवाही है। इससे बड़े हादसे हो सकते हैं। इससे पहले जो सीएसएमटी पर घटना हुई थी, लगता है उससे सबक नहीं लिया गया था।
-संजय सिंह, काशीमीरा

• गैरजिम्मेदाराना रवैया
इस तरह के हादसों का प्रमुख कारण रेलवे प्रबंधन का गैरजिम्मेदाराना रवैया है। कौन-सी ट्रेन, किस ट्रैक पर चलेगी, यह रेल विभाग को देखना है। मानवीय भूल का नाम देकर लोगों के जीवन को दांव पर लगाना अक्षम्य अपराध है।
-डॉ. वासिफ काजी, इंदौर

• चालक की जिम्मेदारी
रेलवे में हादसे की पुनरावृत्ति रोकना चालक की जिम्मेदारी होती है। ९५ फीसदी घटनाएं मानवीय गलती से होती हैं। ५ फीसदी मशीन जिम्मेदार होती हैं। ऐसी घटना न हो, इसके लिए चालकों की जांच होते रहनी चाहिए।
-विकास सोनवणे, बदलापुर

• मानवीय भूल
इस घटना को तकनीकी दृष्टि से देखें तो भी यह मानवीय भूल है और सिस्टम की लापरवाही भी है। क्योंकि लोकल आगे जाने की बजाए पीछे चली गई। रेल प्रशासन को इसकी गहन जांच करनी चाहिए।
-करण परब, कल्याण

• सीएसएमटी पर ही क्यों?
इस तरह का हादसा अक्सर सीएसएमटी पर ही क्यों होता है? यह खोज का विषय हो सकता है। गनीमत है कि इस हादसे में कोई यात्री घायल नहीं हुआ। रेल विभाग को जांच कर दोषी को सजा देनी चाहिए।
-सुरेश चौहान, डोंबिवली

आज का सवाल?
गुजरात और बिहार दोनों ही राज्यों में शराबबंदी है पर पिछले कुछ दिनों से दोनों ही राज्यों में जहरीली शराब का कहर देखने को मिला है। बिहार में पिछले तीन महीने में दो घटनाएं हुईं। एक में १६ और दूसरे में २ लोगों की जानें गईं, वहीं गुजरात में हालिया घटना में ३७ लोग मर चुके हैं, जबकि ८८ का अस्पताल में इलाज चल रहा है। आखिर ये कैसी शराबबंदी है?
आप क्या सोचते हैं? तुरंत लिखकर भेजें या मोबाइल नं. ९३२४१७६७६९ पर व्हॉट्सऐप करें।

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